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3 घंटे तक बंधक बना रहा नोएडा! मजदूरों के बवाल में घिरा सिस्टम, पुलिस और इंटेलिजेंस फेलियर पर उठे सवाल

नोएडा और ग्रेटर नोएडा में मजदूरों का विरोध प्रदर्शन अचानक हिंसक नहीं हुआ, बल्कि इसके संकेत कई दिनों पहले से मिल रहे थे. अब इस पूरे मामले में पुलिस और प्रशासन की तैयारी पर बड़े सवाल उठ रहे हैं. वहीं, इस मामले में पुलिस ने अब तक लगभग तीन सौ लोगों को गिरफ्तार किया है.

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 हाईटेक सिटी नोएडा में हंगामा होने की वजह से पुलिस की कमी और लापरवाही पर बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं (Photo: PTI)
हाईटेक सिटी नोएडा में हंगामा होने की वजह से पुलिस की कमी और लापरवाही पर बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं (Photo: PTI)

5 दिन से नोएडा और ग्रेटर नोएडा की तमाम फैक्ट्रियों के बाहर प्लान के तहत मजदूर बैठे थे, लेकिन न पर्याप्त पुलिस बल बुलाया गया और न ही ढंग से कोई इंटेलिजेंस जुटाई गई. नतीजा यह रहा कि बवाल होने के बाद सड़क पर पुलिस की संख्या बेहद कम थी और भीड़ के सामने चंद पुलिसकर्मी मूक दर्शक बने रहे.

आइए समझते हैं मजदूरों की हड़ताल और 3 घंटे से ज्यादा वक्त तक हाईटेक शहर बंधक कैसे बना और क्यों पुलिस प्रशासन पर सवाल उठ रहे हैं.

9 अप्रैल से नोएडा में मजदूरों की हड़ताल शुरू हुई. हड़ताल की वजह से 10 अप्रैल से नोएडा फेज-2 के इलाके में ट्रैफिक डायवर्जन करना पड़ा था और कई जगह ट्रैफिक बाधित रहा. अब जब शहर में इतने बड़े पैमाने पर अलग-अलग जगहों पर हड़ताल हो रही थी और भीड़ जमा थी, तो पुलिस की संख्या क्यों नहीं बढ़ाई गई? आखिर क्यों बड़ी संख्या में अर्धसैनिक बल नहीं बुलाए गए?

लोकल इंटेलिजेंस यूनिट (LIU) पर सवाल

नोएडा पुलिस में लोकल इंटेलिजेंस यूनिट (LIU) जैसा विभाग मौजूद है. LIU का काम भीड़ और प्रदर्शन के बीच शामिल होकर इंटेलिजेंस इकट्ठा करना और उसके बाद वरिष्ठ अधिकारियों को रिपोर्ट देना होता है. LIU की रिपोर्ट के आधार पर पुलिस अपनी तैयारी करती है, लेकिन ऐसा लगता है कि इस मामले में LIU पूरी तरह से फेल रही.

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नोएडा में प्रदर्शन के दौरान आगजनी (Photo: PTI)

गुरुग्राम से नहीं लिया सबक?

3 अप्रैल को गुरुग्राम में भी मजदूरों का आंदोलन हुआ था, जिसके बाद मानेसर की कई फैक्ट्रियों में तोड़फोड़ और हिंसा हुई थी. ठीक वैसा ही आंदोलन नोएडा में भी हुआ, लेकिन सवाल यह है कि नोएडा पुलिस ने गुरुग्राम में हुए हिंसक आंदोलन से सबक क्यों नहीं लिया?

यह भी पढ़ें: आंखों देखी: मजदूरों के प्रदर्शन की पूरी तस्वीर, नोएडा से फरीदाबाद तक हालात कैसे बिगड़े

रविवार को नोएडा DM, नोएडा पुलिस और श्रम विभाग ने तमाम स्टेकहोल्डर्स के साथ बैठक की. सूत्र बताते हैं कि इस बैठक का संदेश भी ठीक तरीके से आंदोलनकारियों तक नहीं पहुंचा. हालांकि नोएडा डीएम ने सोशल मीडिया पर बयान जारी कर बैठक की जानकारी दी थी.

मजदूरों की हड़ताल की आड़ में ग्रेटर नोएडा से लेकर नोएडा तक 80 से ज्यादा फैक्ट्रियों में जमकर तोड़फोड़ की गई और सड़कों पर आगजनी हुई. करीब 3 घंटे से ज्यादा वक्त तक दिल्ली से सटा हाईटेक नोएडा शहर उपद्रवियों के हाथों बंधक बना रहा.

आजतक/इंडिया टुडे की टीम नोएडा और ग्रेटर नोएडा के सेक्टर 59, 62, फेज-2 और सेक्टर 63 जैसे इलाकों में मौजूद थी, जहां साफ देखा गया कि मुट्ठी भर पुलिस और PAC के जवान तैनात थे, जबकि उनके सामने सैकड़ों की तादाद में भीड़ तोड़फोड़ और आगजनी करती नजर आई.

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खबर लिखे जाने तक पुलिस ने इस पूरे मामले में अब तक लगभग 300 लोगों को गिरफ्तार कर लिया है. जिन लोगों ने प्रदर्शन के दौरान उपद्रव मचाया था उनकी पहचान सीसीटीवी के जरिए की जा रही है. 

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