ट्रेड यूनियनों की देशव्यापी हड़ताल के बीच गुरुवार को इंडस्ट्रियल रिलेशंस (अमेंडमेंट) बिल लोकसभा और राज्यसभा, दोनों सदनों से पारित हो गया है. इस बिल पर चर्चा के दौरान विपक्षी दलों के सांसदों ने चार नए लेबर कोड को श्रमिक हितों के खिलाफ बताते हुए इसका विरोध किया और वापस लेने की मांग की. वहीं, चर्चा का जवाब देते हुए श्रम मंत्री मनसुख मंडाविया ने इस कानून को श्रमिकों के हित में बताया.
इस बिल को पेश करते हुए श्रम मंत्री मनसुख मंडाविया ने कहा कि लीगल क्लैरिटी के लिए ये छोटा सा तकनीकी संशोधन लेकर आया हूं. सदन इस पर विचारकर इसे पारित करे. इस बिल पर चर्चा के दौरान बिहार के आरा से लेफ्ट के सांसद सुदामा प्रसाद ने बिल का विरोध करते हुए कहा कि सरकार ने जो चार नए श्रम कानून बनाए हैं, वो दरअसल भारत के श्रमिकों की गुलामी का दस्तावेज हैं. उन्होंने कहा कि यह नया कानून मजदूरों के शोषण और उत्पीड़न को बढ़ावा देने वाला कानून है.
लेफ्ट सांसद सुदामा प्रसाद ने कहा कि इन कानूनों के जरिये पूंजीपतियों के हाथ में हंटर थमाया गया है. हम इसका विरोध करते हैं. उन्होंने आगे अपने भाषण में यह भी कहा कि आज पूरे भारत में इन कानूनों को वापस लेने और मनरेगा की बहाली के लिए आम हड़ताल है, सफल हड़ताल है. लेफ्ट सांसद सुदामा प्रसाद ने कहा कि करोड़ों किसान-मजदूर इस हड़ताल में शामिल हैं. उन्होंने कहा कि हमारी मांग है कि उनकी (मजदूरों, किसानों की) मांगों को पूरा किया जाए, इसे वापस लिया जाए.
नए कानून ट्रेड यूनियन के अधिकार पर कैंची- सुदामा प्रसाद
बिहार के आरा से सांसद सुदामा प्रसाद ने कहा कि देश को किसान-मजदूर ही चला रहे हैं. कहा जा रहा है कि 1936 के कानून हैं, औपनिवेशिक कानून हैं इसलिए हम इनको खतम कर रहे हैं. लेफ्ट सांसद ने कहा कि पहले के कानून में सौ से अधिक श्रमिकों पर ही यूनियन बनाने का प्रावधान था. नए कानूनों में यूनियनों के अधिकारों पर कैंची चलाई गई है.
हायर और फायर की छूट देता है ये कानून- चंद्रशेखर
वहीं, आजाद समाज पार्टी के प्रमुख एडवोकेट चंद्रशेखर ने कहा कि इसे केवल तकनीकी संशोधन बताया जा रहा है. बात जब मजदूरों और उनके अधिकारों पर आती है, तब कोई संशोधन केवल तकनीकी नहीं होता. उन्होंने बिल का विरोध करते हुए कहा कि जिनके लिए कानून ला रहे हैं, उनसे कोई सलाह ली है क्या आपने. क्यों ट्रेड यूनियनें हड़ताल पर हैं.
एडवोकेट चंद्रशेखर ने कहा कि कर्मचारियों की सीमा घटा दी गईं छंटनी के लिए. इससे एससी, एसटी और पिछड़े वर्ग के ज्यादातर श्रमिक इस कानून से प्रभावित होंगे. उन्होंने कहा कि छोटी इकाइयों में कार्यरत श्रमिकों पर असर पड़ेगा. यह कानून पूंजीपतियों को हायर और फायर की छूट देते हैं. सरकार ट्रेड यूनियनों का पर्याप्त प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करे.
यह भी पढ़ें: संसद में संग्राम! जब इस मुद्दे पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और जया बच्चन के बीच हो गई तीखी नोक-झोंक
एडवोकेट चंद्रशेखर ने यह भी कहा कि हम सुधार विरोधी नहीं हैं, लेकिन श्रमिकों के हित सुरक्षित रहें. कर्मचारियों को पूर्ण संरक्षण मिले. उन्होंने कहा कि जब विरोध का अधिकार ही छीन लेंगे, तो मजदूरों को पूंजीपति मार देंगे न. सरकार उचित संशोधन करे, जिससे श्रमिकों के साथ अन्याय न हो.
इंजीनियर राशिद और उमेशभाई ने भी किया विरोध
वहीं, जम्मू कश्मीर के बारामूला से निर्दलीय सांसद इंजीनियर राशिद ने कहा कि मजदूर को मजदूरी पसीना आने से पहले दिया जाना चाहिए. जम्मू कश्मीर में मजदूर नहीं, मजदूरों के परिजन हड़ताल कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि आप एक पॉलिसी लाकर दर-दर की ठोकरें खा रहे लोगों का जीवन सुरक्षित करें. सेना के साथ काम करने वाले पोर्टर्स के अधिकार सुरक्षित करें. मेहरबानी करके इन चीजों का खयाल किया जाए. मजदूरों का गला काटेंगे, तब उनको विरोध का हक भी न देना उनके साथ अन्याय है.
यह भी पढ़ें: विपक्ष ने बताया श्रमिक विरोधी, मंडाविया बोले- हित में है... इंडस्ट्रियल रिलेशंस बिल लोकसभा से पारित
दमन दीव के निर्दलीय सांसद उमेशभाई बाबूभाई पटेल ने इस बिल का विरोध किया और कहा कि सुधार विरोधी नहीं हूं, लेकिन श्रमिक हितों का ध्यान नहीं रखा जाएगा तो विरोध करेंगे. उन्होंने बिल की व्यापक स्क्रूटनी की डिमांड की और कहा कि ऐसे बिल जब भी आएं, व्यापक चर्चा के बाद आएं.