लोकसभा में इंडस्ट्रियल रिलेशंस (अमेंडमेंट) बिल पर ध्वनिमत से मतदान हुआ. यह बिल ध्वनिमत से पारित हो गया है. लेफ्ट और आजाद समाज पार्टी समेत अन्य विपक्षी दलों ने टइस बिल पर चर्चा के दौरान ट्रेड यूनियनों की आम हड़ताल का उल्लेख किया और इसे श्रमिक विरोधी बताते हुए वापस लेने की मांग की.
श्रम मंत्री मनसुख मंडाविया लेबर कोड पर चर्चा का जवाब दे रहे हैं. मनसुख मंडाविया ने दावा किया कि ये कानून श्रमिकों के हित में हैं. उन्होंने कहा कि कुछ संगठन विरोध में हो सकते हैं, लेकिन 17 ट्रेड यूनियनों ने इनका समर्थन भी किया है. मनसुख मंडाविया ने विपक्ष पर राजनीतिक विरोध का आरोप लगाते हुए कहा कि आप विरोध करते रह गए और देश ने पीएम मोदी पर भरोसा किया. ये कानून पूरी तरह से श्रमिकों के हित में है. हमने महिला-पुरुष के लिए समान वेज के साथ ही एक भी कर्मचारी होने पर ईएसआई की सुविधा का प्रावधान किया गया है.
केंद्रीय मंत्री मनसुख मंडाविया ने कहा कि ट्रेड यूनियन के रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया में हमने कोई बदलाव नहीं किया है. सोशल सिक्योरिटी सुनिश्चित करने के लिए हमने ईएसआई का प्रावधान किया है. उन्होंने कहा कि आज भारत 94 करोड़ लोगों को सोशल सिक्योरिटी कवरेज देने वाला देश है. पहले केवल 25 करोड़ लोगों को सोशल सिक्योरिटी मिलती थी. 2028 तक सौ करोड़ लोगों को इसके दायरे में लाए जाने की योजना है. कार्य स्थल पर न्याय ही सामाजिक न्याय की नींव है. यही इन श्रमिक कानूनों की नींव है. श्रमेव जयते ही इस सरकार का उद्देश्य है. चाय बेचने वाला जब प्रधानमंत्री की कुर्सी पर बैठा है, यही आपको नहीं पच रहा है. जो व्यक्ति खुद अपने परिवार में देखकर आया है, झेलकर आया है, आप उसको सिखाओगे कि श्रमिक का कल्याण कैसे करना है.
उन्होंने कहा, जब वन परसेंट जीडीपी ग्रोथ होता है, तब वन परसेंट एम्प्लॉयमेंट ग्रोथ होना चाहिए, तब ग्रोथ होता है. हमारी सरकार 2017 से 2024 तक, हमारा आर्थिक विकास 7 से 8 परसेंट है. हमारी सरकार में एम्प्लॉयमेंट 1.1 परसेंट की दर से बढ़ रहा है. 2017 के पहले तक रोजगार-बेरोजगार को लेकर कोई मैकेनिज्म नहीं था. आज सारी दुनिया में भारत के पीएलएफएस के डेटा को ऑथेंटिक मानती है. पूरे देश की कुल आबादी में कामकाजी कितने हैं. 2017 में यह 48 परसेंट था और आज 57 परसेंट है. हमने ज्यादा लोगों को काम दिया है. अंतरराष्ट्रीय संगठन कहता है कि बेरोजगारी दर कम होकर 3.2 परसेंट हो गया है. सच के साथ रहने से लोग भरोसा करते हैं. देश में स्वरोजगार 2017 में 52 परसेंट था, वह बढ़कर 58 परसेंट हुआ है.
मनसुख मंडाविया ने कहा कि अनऑर्गेनाइज सेक्टर में काम करने वाले कैजुअल लेबर 24 परसेंट से कम होकर 19 परसेंट हो गए हैं. देश आगे बढ़ रहा है, विकास कर रहा है. रोजगार और बेरोजगारी को लेकर एक डेटा रखना चाहता हूं. 1935 में रिजर्व बैंक बना था. आरबीआई क्लेम डेटा सर्वे करता था. 2003-04 में 44 करोड़ लोगों को काम मिला था. 2013-14 में 47 करोड़ को काम मिला. 2023-24 में क्लेम डेटा ने कहा कि 64 करोड़ लोगों को काम मिला.
उन्होंने कहा कि ये लेबर कोड हर श्रमिक को प्रोटेक्ट करता है. उन्होंने मैन्यूफैक्चरिंग से लेकर सर्विस सेक्टर तक, जॉब के अवसर से जुड़े आंकड़े बताते हुए मनसुख मंडाविया ने कहा कि ईपीएफ के डेटा में हर वर्ष 1 करोड़ से अधिक लोग नई जॉब में आए हैं. यह संभव तब हुआ, जब देश ने रोजगार के लिए समय-समय पर कदम उठाया. मोदी जी ने पहले ही बजट में दो लाख करोड़ का पैकेज घोषित की नई जॉब के लिए. प्रधानमंत्री विकसित भारत स्वरोजगार योजना के जरिये भी लोगों को रोजगार के मौके दिए गए. कामगार को काम मिले, हितों की रक्षा भी हो, समान वेतन भी मिले और सोशल सिक्योरिटी की गारंटी भी मिले. कामगार की ओर से इन चार कानूनों पर अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है. ये एक छोटा सा अमेंडमेंट है, लीगल क्लैरिटी लाने के लिए ये बिल लाया हूं. मजदूरों के हित में आगे भी जो कुछ भी सुझाव आपकी ओर से आएगा, हम करेंगे.