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दिल्लीः कोरोना महामारी के बीच डिजिटल रामलीलाओं का मंचन, विदेश से भी जुड़े लोग

कोरोना महामारी के बड़े प्रकोप के चलते देशभर में होने वाली रामलीलाओं के कार्यक्रम नहीं हो रहे हैं. महामारी और कोरोना निर्देशों के चलते इस बार नमो मंत्र फउंडेशन की ओर से डिजिटल रामलीलाओं का आयोजन किया जा रहा है.

दिल्ली में डिजिटल रामलीला का मंचन (फोटो-सुशान्त) दिल्ली में डिजिटल रामलीला का मंचन (फोटो-सुशान्त)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • नमो मंत्र फउंडेशन कर रहा डिजिटल रामलीला का आयोजन
  • उत्तराखंड से MP अजय बट्टा ने की रामलीला की शुरुआत
  • रामलीला में राम बारात, भरत मिलाप का दृश्य नहीं होगा

कोरोना महामारी के बीच इस बार दिल्ली में होने वाली ऐतिहासिक रामलीलाओं का मंचन नहीं हो रहा है, लेकिन हर साल देशभर में शारदीय नवरात्रों की शुरुआत के साथ ही रामलीलाओं का मंचन शुरू हो जाता है और दशहरे के पर्व पर रावण के पुतलों के दहन के साथ लीलाओं का समापन होता है.

हालांकि इस बार कोरोना महामारी के बड़े प्रकोप के चलते देशभर में होने वाली रामलीलाओं के कार्यक्रम नहीं हो रहे हैं. महामारी और कोरोना निर्देशों के चलते इस बार नमो मंत्र फउंडेशन की ओर से डिजिटल रामलीलाओं का आयोजन किया जा रहा है. 

डिजिटल होते समाज के साथ इस बार रामलीलाओं को आम लोगों के घर तक ले जाने की कवायद डिजिटल तरीके से की जा रही है. डिजिटल रामलीला की शुरुआत उत्तराखंड से सांसद अजय बट्टा ने की. सांसद अजय बट्टा ने इस अवसर पर कहा कि डिजिटल युग में रामलीलाओं का मंचन हर रोज होगा और डिजिटल के माध्यम से सिर्फ देश में ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया के लोग प्रभु राम की लीलाओं को देख सकेंगे. उनसे शिक्षा ले सकेंगे.

पिछले 50 सालों से देशभर के कोने कोने में हर साल रामलीलाओं का मंचन करने वाले गोस्वामी सुशील महाराज कहना था कि मुझको उम्मीद नहीं थी कि मेरे जीवन में अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण होगा, लेकिन आज राम के भव्य मंदिर का निर्माण हो रहा है.

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संसद अजय बट्टा ने कहा कि रामलीला का मंचन देशभर में पहली बार डिजिटल के माध्यम से हो रहा है. जो काफी सराहनीय कदम है. आज डिजिटल के माध्यम से हर बच्चे के हाथ में फोन के जरिये राम की लीलाओं का मंचन हो रहा है ताकि युवा पीढ़ी राम की लीलाओं को देख सकें.

हालांकि कोरोना काल के चलते इस साल रामलीला के संवाद नहीं सुनाई पड़ेंगे. न तो राम बारात निकलेगी और न ही भरत मिलाप का हृदय विदारक दृश्य ही नजर आएगा. न तो राम और न ही रावण के किरदार नजर आएंगे. दिखेगा तो बस डिजिटल रंग. इसी के चलते डिजिटल रामलीलाओं का मंचन किया जा रहा है.

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