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'ये तो रोटी है, ये आलू-गोभी...', मूक-बधिर पति-पत्नी की 'क्लाउड किचन' हुई फेमस, बेटा बना उनकी 'आवाज'

Deaf and Mute Couple Food Business: मोहाली का यह परिवार आज इंटरनेट की दुनिया में 'प्रेरणा' का दूसरा नाम बन गया है. Quietly Delicious नाम का यह क्लाउड किचन न केवल स्वादिष्ट खाना परोस रहा है, बल्कि बाधाओं को पार करने की एक अनूठी मिसाल भी पेश कर रहा है.

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UP से आए ट्रांसपोर्टर परिवार ने शुरू किया क्लाउड किचन.(Photo:PTI)
UP से आए ट्रांसपोर्टर परिवार ने शुरू किया क्लाउड किचन.(Photo:PTI)

कहते हैं कि मुश्किलें चाहे कितनी भी बड़ी क्यों न हों, अगर परिवार का साथ हो तो हर चुनौती को अवसर में बदला जा सकता है. मोहाली के वंशप्रीत सिंह और अनमोल कौर की कहानी कुछ ऐसी ही है. यह मूक-बधिर जोड़ा अपना क्लाउड किचन चला रहा है, जिसे उनके छोटे बेटे सुखमेहर की मासूमियत और सोशल मीडिया के सपोर्ट ने रातों-रात मशहूर कर दिया है.

जोड़े ने अपने हालात को अपनी पहचान बनाते हुए क्लाउड किचन का नाम 'क्वाइटली डिलीशियस' रखा है. इनका स्कूल जाने वाला बेटा सुखमेहर वीडियो में खाने के बारे में बताकर अपने माता-पिता की 'आवाज' बनता है. उसके सरल शब्द "यह रोटी है, यह आलू-गोभी है...' हजारों लोगों को भावुक कर रहे हैं. 

एक न्यूज एजेंसी के हवाले से बताया गया कि इंस्टाग्राम पर मूक बधिर जोड़े के 21 हजार 600 से ज्यादा फॉलोअर्स हो चुके हैं. इनका सोशल मीडिया विदेश में रहने वाली इनकी बहू हिमांशी संभालती है. 

दरअसल, सीतापुर (UP) में ट्रांसपोर्ट बिजनेस में दिक्कतें आने के बाद पूरा परिवार मोहाली शिफ्ट हो गया और इस बिजनेस को सफल बनाने में जुट गया. दादा गुरमीत सिंह और दादी इंदरजीत कौर खाना बनाने और मैनेजमेंट में मदद करते हैं. 

यहां थाली सिस्टम है, जिसमें दाल, छोले, पनीर और घर जैसी मिठाइयां परोसी जाती हैं. छोले-पूरी की यहां सबसे ज्यादा डिमांड है. वंशप्रीत और अनमोल सिर्फ बिजनेस ही नहीं करते, बल्कि अपनी कमाई का एक हिस्सा गरीबों और जरूरतमंदों को खाना खिलाने (सेवा) में भी लगाते हैं. 

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मूक बधिर वंशप्रीत ने अपने पिता के माध्यम से बताया कि वे लोगों के रिस्पॉन्स से गदगद हैं. उन्हें न सिर्फ आसपास की सोसाइटियों से, बल्कि धार्मिक कार्यों और दान के लिए भी काफी ऑर्डर मिल रहे हैं.

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