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'जंग से किसी का फायदा नहीं...', इंडिया टुडे कॉन्क्लेव में बोले जॉर्डन के राजदूत यूसुफ अब्दुल गनी

मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और युद्ध के कारण वैश्विक स्तर पर ऊर्जा आपूर्ति और व्यापार प्रभावित हो रहे हैं. जॉर्डन के राजदूत यूसुफ अब्दुल गनी ने India Today Conclave 2026 में कहा कि जॉर्डन शांति और स्थिरता की नीति पर कायम है.

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इंडिया टुडे कॉन्क्लेव 2026 में पहुंचे भारत में जॉर्डन के राजदूत यूसुफ अब्दुल गनी ने की शिरकत
इंडिया टुडे कॉन्क्लेव 2026 में पहुंचे भारत में जॉर्डन के राजदूत यूसुफ अब्दुल गनी ने की शिरकत

मिडिल ईस्ट में तनाव जारी है. युद्ध के सायरन गूंज रहे हैं और इसी के साथ दुनिया तमाम तरह की किल्लतों का सामना करने लगी है. युद्ध के इसी तनाव भरे माहौल में ये बात करनी जरूरी हो जाती है कि जंग कभी किसी के लिए फायदेमंद नहीं होती है. नई दिल्ली में आयोजित India Today Conclave 2026 में यही मुद्दा उठा और इस पर बात करने के लिए मंच पर मौजूद थे जॉर्डन के राजदूत यूसुफ अब्दुल गनी.  बातचीत के दौरान उन्होंने पश्चिम एशिया के मौजूदा संकट, शांति प्रयासों और जॉर्डन की भूमिका पर विस्तार से बात की.

पश्चिम एशिया इस समय बड़े भू-राजनीतिक बदलाव के दौर से गुजर रहा है. यह वही क्षेत्र है जहां लंबे समय से संघर्ष, अस्थिरता और युद्ध जैसी स्थितियां बनी रही हैं. मौजूदा समय में भी क्षेत्र के कई हिस्सों में तनाव और युद्ध जैसे हालात बने हुए हैं, जिसका असर न केवल क्षेत्रीय बल्कि वैश्विक स्तर पर भी देखने को मिल रहा है. तेल और गैस की आपूर्ति से लेकर वैश्विक सप्लाई चेन तक कई क्षेत्रों पर इसका प्रभाव पड़ा है.

राजदूत यूसुफ अब्दुल गनी ने कहा कि जॉर्डन एक ऐसे क्षेत्र में स्थित है जहां लंबे समय से संघर्ष और अस्थिरता देखी जा रही है. इसके बावजूद जॉर्डन ने हमेशा शांति और स्थिरता की नीति को अपनाया है. उन्होंने कहा कि गाजा और ईरान से जुड़े मौजूदा संघर्षों का असर केवल जॉर्डन पर ही नहीं बल्कि पूरे पश्चिम एशिया क्षेत्र पर पड़ रहा है. उन्होंने कहा कि जॉर्डन की विदेश नीति के प्रमुख स्तंभों में से एक शांति को बढ़ावा देना है. खासकर फिलिस्तीन मुद्दे पर जॉर्डन लंबे समय से शांतिपूर्ण समाधान के लिए प्रयास करता रहा है. उनका मानना है कि युद्ध और हिंसा किसी भी समस्या का समाधान नहीं हैं और स्थायी समाधान केवल बातचीत और कूटनीति के जरिए ही संभव है.

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राजदूत ने कहा कि युद्ध से न केवल ऊर्जा आपूर्ति और व्यापार प्रभावित होता है, बल्कि लोगों के बीच संबंधों पर भी इसका नकारात्मक असर पड़ता है. उन्होंने बताया कि जॉर्डन के किंग अब्दुल्ला द्वितीय हमेशा क्षेत्र में शांति, स्थिरता और संवाद के जरिए विवादों के समाधान की वकालत करते रहे हैं. उन्होंने यह भी बताया कि हाल ही में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किंग अब्दुल्ला द्वितीय से बातचीत की थी. इस दौरान दोनों नेताओं ने क्षेत्र की मौजूदा स्थिति पर विचारों का आदान-प्रदान किया और इस बात पर सहमति जताई कि संघर्ष का समाधान केवल शांतिपूर्ण तरीकों से ही संभव है.

जॉर्डन की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कुछ आलोचकों द्वारा लगाए जाने वाले आरोपों का जवाब देते हुए राजदूत ने स्पष्ट किया कि जॉर्डन किसी भी पक्ष का समर्थन नहीं करता और वह पूरी तरह तटस्थ है. उन्होंने कहा कि संघर्ष शुरू होने से पहले ही जॉर्डन ने स्पष्ट कर दिया था कि उसका हवाई क्षेत्र किसी भी देश के हमले के लिए इस्तेमाल नहीं होने दिया जाएगा. राजदूत ने यह भी बताया कि जॉर्डन ने साफ कहा है कि यदि कोई मिसाइल या विमान उसके हवाई क्षेत्र में प्रवेश करेगा तो उसे मार गिराया जाएगा.

अल-अक्सा मस्जिद के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि जॉर्डन के किंग अब्दुल्ला द्वितीय यरुशलम में इस्लामी और ईसाई पवित्र स्थलों के संरक्षक हैं. 1967 के युद्ध के बाद भी जॉर्डन ने इन पवित्र स्थलों के प्रशासन की जिम्मेदारी निभाई है. उन्होंने कहा कि 1994 के शांति समझौते में भी इजरायल ने जॉर्डन की इस संरक्षक भूमिका को मान्यता दी थी. उन्होंने कहा कि जब भी पवित्र स्थलों की स्थिति में बदलाव की कोशिश होती है, तब जॉर्डन इजरायली पक्ष से संपर्क कर समझौते के तहत तय स्थिति को बनाए रखने की मांग करता है.

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