पश्चिम बंगाल में नई सरकार बनने के बाद अब वहां की राजनीति और प्रशासन में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है. राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) रहे मनोज अग्रवाल को बंगाल सरकार का नया मुख्य सचिव नियुक्त किया गया है.
सोमवार को जारी एक आधिकारिक आदेश के जरिए बताया गया कि मनोज अग्रवाल अब शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली बीजेपी सरकार के मुख्य सचिव होंगे. मनोज अग्रवाल 1990 बैच के पश्चिम बंगाल कैडर के IAS अधिकारी हैं. उनकी गिनती राज्य के अनुभवी अधिकारियों में होती है.
मनोज अग्रवाल ने IIT कानपुर से अपनी पढ़ाई पूरी की है. वो खाद्य, वन, अग्नि और आपातकालीन सेवाओं जैसे विभागों में भी काम कर चुके हैं.
मनोज अग्रवाल की नियुक्ति शुभेंदु अधिकारी के प्रशासनिक सर्कल में दूसरी अहम कड़ी है. महज 48 घंटे पहले ही चुनाव आयोग के विशेष रोल ऑब्जर्वर रहे सुब्रत गुप्ता को मुख्यमंत्री का सलाहकार नियुक्त किया गया था. अब मनोज अग्रवाल के मुख्य सचिव बनने से मुख्यमंत्री की मुख्य टीम में चुनाव आयोग के पूर्व शीर्ष अधिकारियों का दबदबा बढ़ गया है.
टीएमसी का तीखा हमला
मनोज अग्रवाल की नियुक्ति पर टीएमसी ने सख्त प्रतिक्रिया दी है. पार्टी ने हाल ही में संपन्न हुए विधानसभा चुनावों की निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं. टीएमसी के पूर्व सांसद साकेत गोखले ने आरोप लगाया कि बीजेपी और चुनाव आयोग अब खुलेआम चुनाव चोरी करने की बात स्वीकार कर रहे हैं. वहीं, डेरेक ओ ब्रायन ने तंज कसते हुए कहा, 'निश्चित रूप से, ये महज एक इत्तेफाक है!'
टीएमसी सांसद सागरिका घोष ने कहा कि चुनाव अधिकारी को मुख्य सचिव बनाना चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता को खत्म करता है. उन्होंने सवाल उठाया कि क्या अब भी कोई इन चुनावों को 'स्वतंत्र और निष्पक्ष' मान सकता है?
मनोज अग्रवाल का विवादों से पुराना नाता
मनोज अग्रवाल का विवादों से पुराना नाता रहा है. जब वो फूड एंड सप्लाई डिपार्टमेंट के प्रधान सचिव थे, तब उन्होंने कोरोनाकाल में राशन कूपन बांटने का काम राजनीतिक प्रतिनिधियों के बजाय सरकारी अधिकारियों को सौंप दिया था. उस समय की टीएमसी सरकार को ये फैसला पसंद नहीं आया था और उनका तबादला वन विभाग में कर दिया गया था.
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हालांकि, बाद में मनोज अग्रवाल मुख्य निर्वाचन अधिकारी के रूप में एक हाई-प्रोफाइल पोस्टिंग पर लौटे. उन्होंने स्टेट हाईवे अथॉरिटी के चेयरमैन के रूप में कोना एक्सप्रेसवे पर बन रहे एलीवेटेड कॉरिडोर की योजना में भी बड़ी भूमिका निभाई है.
क्या आगे बढ़ेगा कार्यकाल?
मनोज अग्रवाल इसी साल जुलाई में रिटायर होने वाले हैं. लेकिन सचिवालय के सूत्रों का कहना है कि उन्हें सेवा विस्तार मिलना लगभग तय है. शुभेंदु अधिकारी सरकार उन पर काफी भरोसा जता रही है.