मणिपुर के बिष्णुपुर जिले स्थित फुगाकचाओ इखाई में गुरुवार को उस समय तनाव भड़ गया जब बड़ी संख्या में आंतरिक रूप से विस्थापित लोग (IDPs) अपने छोड़े गए गांवों की ओर पैदल मार्च करने निकले. ये लोग चुराचांदपुर, तोरबुंग बांगला और चुराचांदपुर-बिष्णुपुर सीमा के आसपास के कई खाली हो चुके गांवों में वापस जाने की मांग कर रहे थे.
पत्थरबाजी और धक्का-मुक्की के दौरान पांच IDPs को मामूली चोटें आई हैं.
बीते ढाई साल से शिविरों में रह रहे ये IDPs सुरक्षित वापसी की मांग को लेकर भारी संख्या में जुटे. लेकिन सुरक्षा बलों ने उन्हें फुगाकचाओ इखाई पर ही रोक दिया. यह वही अंतिम बिंदु है, जिसके आगे मैतेई समुदाय के लोगों को जाने की अनुमति नहीं है. इसके बाद दोनों पक्षों के बीच हालात तनावपूर्ण हो गए.
अधिकारियों के मुताबिक, भीड़ ने कई बार चेतावनी देने के बावजूद आगे बढ़ने की कोशिश की, जिसके चलते स्थिति बिगड़ने लगी. हालात नियंत्रण से बाहर जाते देख सुरक्षा बलों ने आंसू गैस के गोले दागकर प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर किया.
फोन पर बातचीत में एक IDP प्रदर्शनकारी ने बताया कि यह मार्च राज्य प्रशासन द्वारा संगाई महोत्सव आयोजित करने के फैसले के विरोध में किया गया. उनका कहना था कि अगर राज्य में हालात सामान्य बताकर इतना बड़ा पर्यटन कार्यक्रम हो सकता है, तो विस्थापित लोगों को भी अपने घर लौटने दिया जाना चाहिए.
उन्होंने कहा, “अगर संगाई फेस्टिवल सामान्य स्थिति का संकेत है तो हम क्यों नहीं लौट सकते? ढाई साल हो गए, हम राहत शिविरों में रह रहे हैं. अपने ही राज्य में शरणार्थी बन गए हैं. वास्तविक सामान्य स्थिति तब होगी जब लोग अपने गांव लौट सकेंगे. सरकार द्वारा सुरक्षित एस्कॉर्टेड रेसटलमेंट की व्यवस्था होने तक विरोध जारी रहेगा."