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ममता बनाम ED: I-PAC रेड मामले में अब अगले महीने होगी सुनवाई, CM पर डेटा चोरी और दखलअंदाजी का आरोप

ईडी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, डीजीपी राजीव कुमार और कोलकाता पुलिस कमिश्नर मनोज कुमार वर्मा के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की है. ईडी का आरोप है कि ममता बनर्जी ने आई-पैक दफ्तर की छापेमारी में बाधा डाली और महत्वपूर्ण दस्तावेज हटाए लिए.

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ईडी ने सुप्रीम कोर्ट में ममता बनर्जी पर वैधानिक सर्च ऑपरेशन में बाधा डालने, सबूतों से छेड़छाड़ व उन्हें नष्ट करने का आरोप लगाया. (Photo: PTI)
ईडी ने सुप्रीम कोर्ट में ममता बनर्जी पर वैधानिक सर्च ऑपरेशन में बाधा डालने, सबूतों से छेड़छाड़ व उन्हें नष्ट करने का आरोप लगाया. (Photo: PTI)

आई-पैक (I-PAC) दफ्तर पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की छापेमारी में पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा कथित बाधा डालने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई एक महीने के लिए स्थगित कर दी है. अब इस याचिका पर अगली सुनवाई 18 मार्च को होगी.

ED ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, राज्य के डीजीपी राजीव कुमार और कोलकाता पुलिस कमिश्नर मनोज कुमार वर्मा को पक्षकार बनाते हुए उनके खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की है.

ED का आरोप है कि 8 जनवरी को कोलकाता में I-PAC के दफ्तर और उसके निदेशक प्रतीक जैन के आवास पर छापेमारी के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने व्यक्तिगत रूप से पहुंचकर जांच में बाधा डाली और महत्वपूर्ण दस्तावेज व इलेक्ट्रॉनिक सामग्री को हटा लिया. ED ने इसे जांच में गंभीर हस्तक्षेप बताया है.

आज जवाब दाखिल करेगी ED

वहीं, ईडी की ओर से कोर्ट में पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि ED अपना जवाब (rejoinder) आज ही दाखिल कर देगी.

'ईडी ने चुराया टीएमसी का डेटा'

दूसरी ओर ममता बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे में ED पर गंभीर आरोप लगाए हैं. अपने हलफनामे में उन्होंने कहा कि ईडी अधिकारियों ने कोलकाता में आईपैक कार्यालयों में तलाशी के नाम पर टीएमसी का गोपनीय और चुनावी रणनीति से जुड़ा डेटा चुरा लिया.

ममता ने अदालत को बताया कि जैसे ही उन्हें सूचना मिली कि I-PAC दफ्तरों में छापेमारी चल रही है और वहां पार्टी का संवेदनशील डेटा मौजूद है, वे खुद वहां पहुंचीं. उनका उद्देश्य केवल TMC की संवेदनशील सामग्री को वापस लेना था, ताकि उसका दुरुपयोग न हो.

ममता बनर्जी ने अदालत से कहा कि ईडी की ये कार्रवाई न केवल अवैध थी, बल्कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया में दखल देने जैसी भी है. उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्होंने ED की कार्रवाई में कोई बाधा नहीं डाली.

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