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मेघालय में ममता की 'सर्जिकल स्ट्राइक', जानें क्यों TMC में गए कांग्रेस MLA

लोकसभा चुनाव 2024 से पहले विपक्ष को लामबंद करने के लिए लगातार कोशिशें हो रही थीं, लेकिन हालिया घटनाओं से सवाल खड़े होने लगे हैं कि विपक्ष को मजबूती कैसे मिलेगी.

कांग्रेस नेताओं का टीएमसी में शामिल होने का सिलसिला जारी हैं। कांग्रेस नेताओं का टीएमसी में शामिल होने का सिलसिला जारी हैं।
स्टोरी हाइलाइट्स
  • टीएमसी चीफ ममता बनर्जी ने एक बार फिर से कांग्रेस को दिया जोर का झटका
  • मेघालय के पूर्व सीएम मुकुल संगमा समेत कांग्रेस के 12 विधायक टीएमसी में गए
  • इसी के साथ मेघालय की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस मुख्य विपक्षी पार्टी बन गई

मेघालय के पूर्व मुख्यमंत्री मुकुल संगमा (Mukul Sangma) समेत कांग्रेस पार्टी के 17 में 12 विधायक तृणमूल कांग्रेस (TMC) में शामिल हो गए हैं. टीएमसी ने ही कांग्रेस नेतृत्व के बड़े पैमाने पर पलायन की पुष्टि की है. इसी के साथ मेघालय में अब तृणमूल कांग्रेस मुख्य विपक्षी पार्टी बन गई है. बुधवार देर रात कांग्रेस ने मुकुल संगमा और अन्य बगावत करने वाले नेताओं को पार्टी में वापस लेने की आखिरी कोशिश की. हालांकि प्रदेश प्रभारी मनीष चतरथ बागी विधायकों से संपर्क नहीं कर पाए.

 मेघालय के पूर्व मुख्यमंत्री ने पार्टी के सीनियर लीडर केसी वेणुगोपाल और मनीष चतरथ से हाल ही में 18 नवंबर को दिल्ली में मुलाकात की थी. मीटिंग में प्रदेश अध्यक्ष विंसेंट एच पाला सहित राज्य के नेताओं ने भाग लिया था और एक प्रेस रिलीज जारी की गई थी कि 2023 में राज्य में विधानसभा चुनाव के लिए पार्टी को मजबूत करने के लिए सभी प्रयास किए जाएंगे.

कांग्रेस नेता चतरथ ने इंडिया टुडे को बताया था, 'हमने उपचुनावों में 3 सीटें जीती थीं. इसी के बाद पार्टी के जिम्मेदारों के साथ मेल-मुलाकात की और पार्टी के प्रदर्शन पर चर्चा की. केसी वेणुगोपाल की मौजूदगी में हमने पार्टी को मजबूत करने के लिए किए जाने वाले उपायों पर चर्चा की और सभी नेताओं ने अगले विधानसभा चुनाव से पहले चुनौतियों से निपटने का प्रण लिया था.'

असल में, अक्टूबर में ही मुकुल संगमा कांग्रेस सुप्रीमो सोनिया और राहुल गांधी से भी मिले थे. पूर्व मुख्यमंत्री पाला की राज्य के अध्यक्ष के रूप में नियुक्ति से नाखुश थे और तभी से बगावत की अटकलें तेज हो गई थीं.

टीएमसी बनी कांग्रेस के लिए सिरदर्द

अब यह संकट कांग्रेस को मेघालय में ही नहीं, बल्कि देशभर में झेलना पड़ सकता है. क्योंकि टीएमसी प्रमुख ने स्पष्ट रूप से पूरे भारत में अपनी पार्टी के विस्तार की योजना बनाई है. इससे पूर्व भी यह क्षेत्रीय दल कांग्रेस के दूसरे बड़े नेताओं को अपने पाले में खींच लाया है.  

ये कांग्रेस नेता गए टीएमसी में

इनमें जनता दल यूनाइटेड (JDU) के पूर्व नेता पवन वर्मा के साथ-साथ पूर्व क्रिकेटर कांग्रेस नेता कीर्ति आजाद व उनकी पत्नी पूनम आजाद और हरियाणा कांग्रेस के पूर्व नेता अशोक तंवर को भी ममता बनर्जी ने बीते मंगलवार को तृणमूल कांग्रेस (TMC) की सदस्यता दिलाई. 

इससे पहले असम में कांग्रेस नेता सुष्मिता देव और गोवा के पूर्व मुख्यमंत्री लुइजिन्हो फलेरियो टीएमसी में शामिल हुए थे, जिन्हें पार्टी ने राज्यसभा तक पहुंचा दिया है.  पूर्व राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी के बेटे अभिजीत मुखर्जी और यूपी से कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रहे कमलापति त्रिपाठी के प्रपौत्र ललितेश पति त्रिपाठी भी टीएमसी का दामन थाम चुके हैं.

बता दें कि टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के तीन दिवसीय दौरे पर हैं. इस दौरान उनकी कांग्रेस सुप्रीमो सोनिया गांधी से भी मुलाकात नहीं हो पाई है. लोकसभा चुनाव 2014 से पहले विपक्ष को लामबंद करने के लिए लगातार कोशिशें हो रही थीं, लेकिन हालिया घटनाओं से सवाल खड़े होने लगे हैं कि विपक्ष को मजबूती कैसे मिलेगी.

 

 

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