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सोनिया गांधी और ममता बनर्जी की नहीं हुई मुलाकात, शीतकालीन सत्र में कितना मजबूत दिखेगा विपक्ष?

टीएमसी खुद को देश में प्रमुख विपक्षी पार्टी के तौर पर स्थापित करने की कोशिश में जुटी है और ऐसे में कांग्रेस के लिए विकट समस्या आ खड़ी हुई है. लोग भलीभांति जानते हैं कि कांग्रेस की तुलना में यह क्षेत्रीय दल सदन के पटल पर अपने हमले में कहीं अधिक आक्रामक रहा है.

सोनिया गांधी और ममता बनर्जी (फाइल फोटो) सोनिया गांधी और ममता बनर्जी (फाइल फोटो)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • दिल्ली में सोनिया और ममता के बीच दूरी
  • प्रमुख विपक्षी दल का दर्जा कायम रखना चाहती है कांग्रेस
  • TMC के 'विस्तार' से परेशान कांग्रेस

तृणमूल कांग्रेस (TMC) प्रमुख और पश्चिम बंगाल (West Bengal) की मुख्‍यमंत्री ममता बनर्जी (Mamata Banerjee)  तीन दिन की यात्रा पर दिल्‍ली आई हुई हैं, लेकिन उनकी कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) के साथ बैठक अभी भी तय नहीं हो पाई है. राजनीतिक गलियारों में इसका मतलब यह निकाला जा रह है कि पार्टी का विस्तार करने में जुटी टीएमसी को कांग्रेस संसद में विपक्ष का स्पेस नहीं देना चाहती है. कांग्रेस संसद के अंदर और देश के बाहर किसी भी हालत में दूसरे दल को ये जगह नहीं देना चाहती है.

तृणमूल कांग्रेस अपनी विस्तारवादी रणनीति के तहत कांग्रेस के बड़े नेताओं को अपनी पार्टी में शामिल करा चुकी है. इसके अलावा गोवा के राजनीतिक गलियारे में टीएमसी के प्रवेश ने भी इन दोनों दलों के बीच तनाव पैदा कर दिया है.     

टीएमसी और कांग्रेस के बीच तनावपूर्ण समीकरण के बीच गुरुवार को कांग्रेस के संसदीय रणनीति समूह की बैठक काफी अहम मानी जाएगी. जरूरी मुद्दों पर अपना रुख स्पष्ट करने के अलावा यह ग्रुप संसद में फ्लोर मैनेजमेंट और समान विचारधारा वाले अन्य दलों के साथ बेहतर समन्वय पर भी विचार करेगा.

यह बैठक पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री की दिल्ली यात्रा और पूर्व कांग्रेस नेताओं के पार्टी छोड़कर टीएमसी में शामिल होने के बाद हो रही है. सोनिया गांधी इस बैठक की अध्यक्षता करेंगी जिसमें राहुल गांधी और रणनीति समूह के अन्य सदस्य शाम करीब साढ़े चार बजे 10 जनपथ पर शामिल होंगे. एक दिलचस्प घटनाक्रम में  सोनिया गांधी ने पिछले दो दिनों में वरिष्ठ नेता आनंद शर्मा और कमलनाथ के साथ आमने-सामने मुलाकात की है. दोनों नेताओं के टीएमसी प्रमुख के साथ बहुत अच्छे ताल्लुकात हैं. माना जा रहा है कि सोनिया ने टीएमसी के मिजाज का जायजा लिया है.

विपक्ष की एकता में दरार

टीएमसी खुद को देश में प्रमुख विपक्षी पार्टी के तौर पर स्थापित करने की कोशिश में जुटी है और ऐसे में कांग्रेस के लिए विकट समस्या आ खड़ी हुई है. लोग भलीभांति जानते हैं कि कांग्रेस की तुलना में यह क्षेत्रीय दल सदन के पटल पर अपने हमले में कहीं अधिक आक्रामक रहा है. बता दें कि मॉनसून सत्र में विपक्षी एकता में दरार आ गई थी क्योंकि विधानसभा चुनावों में प्रचंड जीत के बाद टीएमसी केंद्र सरकार पर आक्रामक हो गई थी. अब इस बार सदन में एक बार फिर देखना होगा कि कृषि कानूनों की वापसी के बाद कौन सी पार्टी सदन में अधिक हमलावर रुख अपनाती है. 

मेगा रैली की योजना

इस सत्र में कांग्रेस मुख्य विपक्षी दल के रूप में ताजे मुद्दों पर ध्यान खींचकर सरकार पर अपना हमला तेज करना चाहेगी. पार्टी बिना किसी व्यवधान और वॉकआउट के सरकार को घेरना चाहती है ताकि बार बार के स्थगन प्रस्ताव से विपक्ष के प्रचंड विरोध का मुद्दा डिरेल न हो जाए. 

इन मसलों में महंगाई एक प्रमुख मुद्दा होगी, यहां तक ​​​​कि शीतकालीन सत्र के दौरान कांग्रेस ने इस विषय पर एक मेगा रैली की योजना बनाई है. कमेटी की बैठक में कृषि कानूनों को निरस्त करने और उससे संबंधित मांगों पर भी चर्चा की जाएगी. राष्ट्रीय सुरक्षा के मोर्चे पर भारत-चीन सीमा की स्थिति और अफगानिस्तान भी एजेंडे में होगा. इसके अलावा पार्टी राहुल गांधी के नेतृत्व वाले कोविड न्याय अभियान पर भी जोर देगी, क्योंकि कांग्रेस कोविड पीड़ितों के लिए 4 लाख मुआवजे की मांग करती आ रही है. इसके अलावा पेगासस और राफेल जैसे अन्य मुद्दे भी उठाए जाएंगे.

 

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