कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमतों में भारी बढ़ोतरी ने आम लोगों से लेकर छोटे कारोबारियों तक की चिंता बढ़ा दी है. तेल कंपनियों ने 19 किलो वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर के दाम में रिकॉर्ड ₹993 की बढ़ोतरी कर दी है, जिसके बाद दिल्ली में इसकी कीमत ₹3,071.5 तक पहुंच गई है. यह लगातार तीसरा महीना है जब दाम बढ़े हैं और कुल मिलाकर तीन महीनों में ₹1,303 तक की बढ़ोतरी हो चुकी है.
इस फैसले के पीछे वैश्विक बाजार में बढ़ती ऊर्जा कीमतें और पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष को मुख्य वजह माना जा रहा है, जिसने सप्लाई चेन पर गहरा असर डाला है. हालांकि घरेलू रसोई गैस के दाम फिलहाल स्थिर रखे गए हैं, लेकिन कमर्शियल गैस महंगी होने से होटल, ढाबे और रेस्टोरेंट कारोबारियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं.
कीमतों में इस बेतहाशा वृद्धि से छोटे दुकानदार और रेस्टोरेंट मालिक सकते में हैं. दुकानदारों का कहना है कि चुनाव खत्म होते ही यह बढ़त तय मानी जा रही थी.
रेस्टोरेंट संचालक बोले- अब रेट बढ़ाने होंगे
दिल्ली के एक रेस्टोरेंट संचालक ने आज तक से बात करते हुए कहा, "आम आदमी की सैलरी नहीं बढ़ी है, लेकिन खर्च दोगुना हो गया है. आज भी एक मजदूर 50 से 100 रुपये में पेट भरना चाहता है, लेकिन अब हम पुराने रेट पर खाना नहीं खिला पाएंगे. हमारे पास या तो मेन्यू में कटौती करने का विकल्प है या फिर खाने के दाम बढ़ाने का."
दिल्ली के खालसा रेस्टोरेंट मालिक ने बताया, 'अभी हमें कोई हल नहीं सूझ रहा है. हम सोच रहे हैं कि क्या स्टाफ़ कम करें, मेन्यू से कुछ चीज़ें हटा दें, या शायद रेस्टोरेंट को पूरी तरह से बंद ही कर दें. यह हमारा पारिवारिक रेस्टोरेंट है, और लोग यहां घर जैसा खाना खाने आते हैं. अगर हम कुछ चीज़ें कम करेंगे, तो हमारे पास कीमतों को परोक्ष रूप से बढ़ाने के अलावा कोई और चारा नहीं बचेगा.'
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लखनऊ के रहने वाले एक दुकानदार ने आजतक से बात करते हुए कहा, 'अब हर चीज के दाम बढ़ाने पड़ेंगे। जो चाय ₹15 की थी वह ₹20 की करनी पड़ेगी जो सामान ₹20 का मिलता था उसे ₹25 में बेचना पड़ेगा. लकड़ी की भट्टी से बस सिलेंडर नहीं मिलने पर मदद मिलती है, लेकिन भट्टी में समस्या है कि एक बार जली तो जलती रहेगी. एक knob से कम ज्यादा नहीं होता ऐसे में भट्टी से भी कीमत कम रखने में मदद नहीं मिलने वाली.'
भोपाल के अनुपम स्वीट्स एंड रेस्टोरेंट के संचालक ने बताया, 'हमें उम्मीद है कि सरकार कोई बीच का रास्ता निकालेगी, ताकि दुकानदारों का कारोबार बिना किसी रुकावट के चलता रहे और उनके काम पर कोई असर न पड़े. हम सरकार की चिंताओं को भी समझते हैं. पूरा देश सरकार के साथ खड़ा है, लेकिन इस संकट से निपटने के लिए इतना बड़ा और अचानक बदलाव लाना उचित नहीं लगता.'
रेस्टोरेंट और फूड स्टॉल चलाने वाले लोग अब दोहरे दबाव में हैं, एक तरफ बढ़ती लागत और दूसरी तरफ ग्राहकों की सीमित जेब. अगर वे दाम बढ़ाते हैं तो ग्राहकों की संख्या घटने का डर है, और अगर नहीं बढ़ाते तो मुनाफा खत्म होने का खतरा है.
दरअसल, तेल कंपनियां हर महीने की पहली तारीख को अंतरराष्ट्रीय कीमतों और डॉलर-रुपया विनिमय दर के आधार पर एलपीजी और एटीएफ के दाम तय करती हैं. पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में करीब 50% तक उछाल आ चुका है, जिसका सीधा असर भारत में ईंधन कीमतों पर पड़ रहा है.
कुल मिलाकर, कमर्शियल गैस की बढ़ती कीमतें अब सिर्फ कारोबारियों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इसका सीधा असर आम आदमी की थाली पर पड़ना तय है. बाहर खाना महंगा हो सकता है और छोटे कारोबारियों के लिए टिके रहना और भी मुश्किल हो सकता है.