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कोलकाता: RG कर अस्पताल में पैदल टॉयलेट जाने को किया मजबूर, तड़प-तड़प कर मरीज ने तोड़ा दम!

आर जी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में एक मरीज की मौत हो गई. उसके परिवार ने अस्पताल प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं. दावा है कि ट्रॉली या व्हीलचेयर न मिलने के कारण मरीज को पैदल टॉयलेट ले जाया गया और रास्ते में ही उसकी मौत हो गई.

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ट्रॉली या व्हीलचेयर नहीं मिलने पर टॉयलेट के लिए मरीज को पैदल जाना पड़ा, सवालों के घेरे में अस्पताल. (File Photo: ITG)
ट्रॉली या व्हीलचेयर नहीं मिलने पर टॉयलेट के लिए मरीज को पैदल जाना पड़ा, सवालों के घेरे में अस्पताल. (File Photo: ITG)

कोलकाता का आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल एक बार फिर चर्चा में है. यहां इलाज के दौरान एक मरीज की मौत हो गई. इसके बाद अस्पताल प्रशासन पर गंभीर आरोप लगे हैं. मृतक मरीज के परिजनों का आरोप है कि ट्रॉली या व्हीलचेयर नहीं मिलने की वजह से गंभीर हालत में उसको पैदल टॉयलेट ले जाया गया. इस दौरान उसकी जान चली गई.

मृतक की पहचान निमता निवासी विश्वजीत सामंत के रूप में हुई है. उसके परिवार के मुताबिक, सोमवार तड़के उसको सांस लेने में दिक्कत और नाक से खून आने की शिकायत के बाद ट्रॉमा केयर यूनिट में भर्ती कराया गया था. डॉक्टरों ने शुरुआती इलाज के बाद भर्ती प्रक्रिया पूरी होने तक इंतजार करने को कहा था. इसी बीच मरीज ने टॉयलेट जाने की इच्छा जताई.

आरोप है कि अस्पताल स्टाफ ने उसको ट्रॉमा यूनिट के बाहर बने 'पे-एंड-यूज' टॉयलेट में ले जाने की सलाह दी. परिवार का कहना है कि कई बार अनुरोध करने के बावजूद उन्हें न तो ट्रॉली दी गई और न ही व्हीलचेयर. मरीज को पैदल ही टॉयलेट कॉम्प्लेक्स की पहली मंजिल तक ले जाया गया. लेकिन टॉयलेट तक पहुंचने से पहले ही वो अचानक गिर पड़ा.

इसके बाद उसे तुरंत इमरजेंसी विभाग ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया. परिजनों का दावा है कि ट्रॉमा केयर यूनिट के अंदर मौजूद मरीजों का टॉयलेट मरम्मत के कारण बंद था. वहीं स्टाफ के लिए बने टॉयलेट अलग थे, जिनका इस्तेमाल मरीज को करने नहीं दिया गया. पुलिस ने इस मामले में अप्राकृतिक मौत का केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है.

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अस्पताल के MSVP सप्तर्षि चटर्जी ने कहा कि इमरजेंसी एरिया में फिलहाल मरीजों के लिए सीमित टॉयलेट सुविधा है. वहां मरम्मत का काम चल रहा है. उन्होंने बताया कि भविष्य में बायो-टॉयलेट जैसी सुविधाएं जोड़ने की कोशिश की जा रही है. तृणमूल कांग्रेस विधायक अतीन घोष ने इस घटना को अस्पताल प्रशासन की तरफ से की गई गंभीर लापरवाही बताया है. 

उन्होंने कहा कि किसी भी गंभीर मरीज को ट्रॉमा सेंटर से बाहर टॉयलेट जाने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए थी. जरूरत पड़ने पर मरीज को स्टाफ के लिए आरक्षित टॉयलेट इस्तेमाल करने की अनुमति दी जानी चाहिए. गौरतलब है कि 20 मार्च को इसी अस्पताल में लिफ्ट में फंसने से एक 40 वर्षीय व्यक्ति की मौत हो गई थी. इस मामले में पांच लोगों की गिरफ्तारी भी हुई थी.

बताते चलें कि इसी अस्पताल में एक महिला डॉक्टर की बलात्कार के बाद बेरहमी से हत्या कर दी गई थी. इस मामले में एक सिविक वांलटियर को पुलिस ने गिरफ्तार किया था. वो इसी अस्पताल के पीछे एक बैरक में रहता था. उसने आधी रात को खौफनाक वारदात को अंजाम दिया था. इस मामले के सामने आने के बाद अस्पताल प्रशासन पर भ्रष्टाचार के आरोप भी लगे थे.

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