बंगाल में प्रदर्शन कर रहे जूनियर डॉक्टर अब दो फाड़ नजर आ रहे हैं. कारण जूनियर डॉक्टरों के एक समूह ने अलग एसोसिएशन बनाकर आरोप लगाया है कि पश्चिम बंगाल जूनियर फ्रंट के डॉक्टरों ने आंदोलन को आरजी कर घटना के लिए न्याय की मूल मांग से दूर कर दिया है और व्यक्तिगत टारगेट पर आ गए हैं. अब जो डॉक्टरों ने एसोसिएशन बनाया है, उसका नाम पश्चिम बंगाल जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन है.
इस एसोसिएशन के डॉक्टरों ने आरोप लगाया है कि यह वे ही हैं जिन्हें रेजिडेंट डॉक्टर एसोसिएशन और पश्चिम बंगाल जनता दल फ्रंट के सदस्यों द्वारा धमकाया जा रहा है और व्यक्तिगत प्रतिशोध के लिए निष्कासित किया गया है.
कलकत्ता हाईकोर्ट ने 22 अक्टूबर, 2024 को शहर के आर.जी. कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के 51 डॉक्टरों के निलंबन पर रोक लगा दी. डॉक्टरों को उनके खिलाफ शिकायतों की जांच करने वाली एक आंतरिक जांच समिति द्वारा अस्पताल परिसर में धमकी की संस्कृति और धमकी को बढ़ावा देने के लिए जिम्मेदार ठहराए जाने के बाद निलंबित कर दिया गया था. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोमवार, 21 अक्टूबर, 2024 को जूनियर डॉक्टरों के साथ अपनी बैठक में स्वास्थ्य विभाग की मंजूरी के बिना डॉक्टरों के निलंबन पर सवाल उठाया था.
डॉक्टरों की नई एसोसिएशन ने कहा कि हम लोगों को अपना पक्ष बताना चाहते थे. हमारे खिलाफ कई गलत काम हुए हैं और इसने कई लोगों को मानसिक रूप से प्रभावित किया है. कुछ लोगों ने आरजी कर में हुई वीभत्स घटना का फायदा उठाया है. हमने आरजी कर में आंदोलन शुरू किया था लेकिन हम काम बंद करने के लिए तैयार नहीं थे. तब से हमें धमकी देने वालों का हिस्सा माना जाने लगा. हम पर झूठे आरोप लगाए गए, यह एक असफल जांच थी. हमें जांच समिति ने निष्कासित कर दिया. हम हाईकोर्ट गए, हाईकोर्ट ने इस पर रोक लगा दी और हमें काम पर वापस जाने को कहा.
आरजी कर के इंटर्न डॉक्टर सिरीश चौधरी ने कहा कि आरडीए ने सीएम बनर्जी के सामने हमें कुख्यात अपराधी और यौन उत्पीड़न करने वाले कहा. दूसरे वर्ग के सदस्य हमारे करियर को बर्बाद करने में जुटे हैं. हम उन सभी को बुला रहे हैं जिनके खिलाफ गलत फर्जी आरोप लगाए जा रहे हैं. यह आतंक की संस्कृति है न कि धमकी की संस्कृति.
एक अन्य जूनियर डॉक्टर ने डब्ल्यूबीजेडीएफ पर निशाना साधते हुए कहा कि वही सदस्य हैं जो व्यक्तियों के खिलाफ शिकायत कर रहे हैं और निर्णय लेने के लिए जांच समिति के सदस्य हैं.
डॉक्टरों ने कहा कि किसी भी जूनियर डॉक्टर या मेडिकल छात्र को थर्ट कल्चर के नाम पर राजनीतिक रूप से समर्थित जांच समिति द्वारा निष्कासित/निलंबित नहीं किया जा सकता है. इसके अलावा उन्होंने कहा कि हर शिकायत की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए. यदि आवश्यक हो, तो एक निष्पक्ष जांच समिति का गठन किया जाना चाहिए, जो हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीशों को अत्यधिक निष्पक्ष और कुशल जांच के लिए बनाए. डब्ल्यूबीजेडी एसोसिएशन ने बयान में लिखा. डब्ल्यूबीजेडीए ने यह भी कहा कि यह पता लगाना महत्वपूर्ण है कि अभया/तिलोत्तमा के नाम पर विभिन्न खातों के माध्यम से पैसे की निकासी का स्रोत क्या है और उन्हें डर है कि समाज में अशांति पैदा करने के लिए यह पैसा निकाला गया है. वे मांग करते हैं कि राज्य प्रशासन या केंद्रीय एजेंसी इस पैसे के स्रोत की जांच करे.
आरजी कर के एक अन्य जूनियर डॉक्टर सौरव कर ने कहा, "पहले दिन से ही यह अभया के न्याय के बारे में था, लेकिन अब यह लड़ाई रास्ते से भटक गई है. लोग इससे दूर हो गए हैं. यहां हर किसी पर धमकी का आरोप नहीं लगाया जा रहा है. हम बदलाव चाहते थे, लेकिन कुछ अति आक्रामक लोगों ने आंदोलन को हाईजैक कर लिया. 9 सितंबर से पहले किसी के खिलाफ कोई आरोप नहीं था, उसके बाद वे सामने आए और फिर कहा गया कि आरोप साबित होने के बराबर हैं. एक निष्पक्ष और गैर-राजनीतिक निकाय की जरूरत है."