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'तर्क के लिए सोशल मीडिया का उपयोग न करें...', '151 ग्राम वीर्य' वाली बात पर बोले CJI

सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने गुरुवार को कोलकाता रेप-मर्डर मामले की सुनवाई करते हुए प्रदर्शनकारी डॉक्टरों से गुजारिश की है कि वह समझते हैं कि उनके काम के घंटे लंबे हैं और उनकी चिंताओं को सुना जाएगा।

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कोलकाता रेप-मर्डर केस (फाइल फोटो)
कोलकाता रेप-मर्डर केस (फाइल फोटो)

कोलकाता रेप-मर्डर केस (Kolkata Rape-Murder Case) में सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को फिर से सुनवाई शुरू की. इस दौरान भारत के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने प्रदर्शनकारी डॉक्टरों से काम पर लौटने की गुजारिश की और उन्हें आश्वासन दिया कि उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी. सुप्रीम कोर्ट ने महिला के शरीर में '151 ग्राम वीर्य' की थ्योरी को भी खारिज कर दिया और कहा कि सोशल मीडिया के तर्कों पर यकीन नही करें.

चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली तीन जजों की जजों में जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा भी शामिल हैं.

CBI ने स्टेटस रिपोर्ट में क्या कहा?

सुप्रीम कोर्ट को सौंपी गई अपनी स्टेटस रिपोर्ट में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने कहा कि क्राइम वाली जगह को बदल दिया गया था और पीड़ित परिवार को उनकी बेटी की मौत के बारे में गुमराह किया गया, इसे आत्महत्या बताकर पेश किया गया था.

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, जांच एजेंसी ने कहा कि उसकी अब तक की जांच में आरोपी संजय रॉय की मिलीभगत की तरफ इशारा किया गया है, जिसे गिरफ्तार किया गया था. अर्धनग्न अवस्था में मृतका की बॉडी मिलने के एक दिन बाद, 9 अगस्त को संजय रॉय को कोलकाता पुलिस ने गिरफ्तार किया था.

यह भी पढ़ें: कोलकाता रेप-मर्डर केस: दुर्गा पूजा कमेटियों ने जताया विरोध, CM ममता का अनुदान लौटाने का ऐलान

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सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान क्या-क्या कहा?

  • "डॉक्टरों को काम पर वापस लौटना चाहिए. हम कुछ सामान्य आदेश पारित करेंगे, कृपया बेफिक्र रहें कि एक बार जब डॉक्टर काम पर लौट आएंगे, तो हम अधिकारियों पर प्रतिकूल कार्रवाई न करने के लिए दबाव डालेंगे, अगर वे काम पर वापस नहीं लौटेंगे तो सार्वजनिक प्रशासनिक ढांचा कैसे चलेगा?"
  • "हमारे पास पोस्टमार्टम रिपोर्ट है और हम जानते हैं कि 150 ग्राम का क्या मतलब है. कृपया अपने तर्क देने के लिए सोशल मीडिया का उपयोग न करें."
  • "हम उन सभी लोगों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हैं, जो सरकारी अस्पतालों में जाते हैं."
  • "हम जानते हैं कि कमेटी में सीनियर महिला डॉक्टर हैं और उन्होंने सार्वजनिक स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे के लिए अपनी जिंदगी समर्पित कर दी है. समिति सभी की बात सुनेगी."
  • "कृपया डॉक्टरों को आश्वस्त करें कि हम जानते हैं कि वे 36 घंटे काम कर रहे हैं. मैं खुद एक पब्लिक हॉस्पिटल की फर्श पर सो चुका हूं, जब मेरे परिवार के किसी सदस्य की तबीयत खराब थी."
  • "ड्यूटी करीब 48 घंटे की होती है, फिर आप न तो शारीरिक रूप से और न ही मानसिक रूप से इस स्थिति में होते हैं कि कोई आपको छेड़े तो आप उसका विरोध कर सकें. मैं गंभीर अपराधों के बारे में तो बात ही नहीं कर रहा."
  • "कृपया यहां एक जिम्मेदार पुलिस अधिकारी को मौजूद रखें. हमें अभी तक यह जवाब नहीं मिला है कि मौत का केस कब दर्ज किया गया था."

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