इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज रहे जस्टिस यशवंत वर्मा ने इस्तीफा दे दिया है. वह कैश कांड से चर्चा में आए थे. बीते साल मार्च महीने में उनके दिल्ली स्थित बंगले में आग लग गई थी. इस दौरान बंगले से नोटों के जले हुए बंडल मिलने के दावे किए गए थे. इसके बाद ही ये मामला चर्चा में आ गया था. बीते 13 महीने से जारी इस विवाद और तमाम जांच समेत महाभियोग की आशंकाओं के बीच शुक्रवार को जस्टिस यशवंत वर्मा ने इस्तीफा दे दिया.
यह विवाद पिछले साल मार्च का है, जब उनके सरकारी आवास में आग लग गई थी.आग बुझाने के दौरान वहां से बड़ी मात्रा में नकदी मिलने की बात सामने आई थी. रिपोर्ट्स के मुताबिक, नकदी के बंडल करीब डेढ़ फीट ऊंचे तक रखे हुए थे. इस घटना के बाद तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश ने मामले का संज्ञान लिया था. बाद में जस्टिस वर्मा का ट्रांसफर दिल्ली हाईकोर्ट से इलाहाबाद हाईकोर्ट कर दिया गया था. हालांकि, जस्टिस वर्मा ने घर से कैश बरामद होने के सभी आरोपों से इनकार किया था.
'आग लगने के समय तो मैं था ही नहीं'
इस मामले में पूछताछ कर रही संसदीय समिति के सामने अपने जवाब में उन्होंने कहा कि आग लगने के समय वह घर पर मौजूद नहीं थे, बल्कि वह तो मौके पर भी सबसे पहले नहीं पहुंचे थे. इस मामले के तूल पकड़ने पर बीते साल ही अगस्त 2025 में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने जजेज (इंक्वायरी) एक्ट, 1968 के तहत तीन सदस्यीय जांच कमेटी का गठन किया था. इस कमेटी में सुप्रीम कोर्ट के जज अरविंद कुमार, मद्रास हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस मनींदर मोहन और सीनियर एडवोकेट बीवी आचार्य शामिल थे.
जांच कमेटी की वैधता को कोर्ट में दी थी चुनौती
जस्टिस वर्मा ने इस कमेटी की वैधता को भी सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी. उनका तर्क था कि उनके खिलाफ हटाने का प्रस्ताव राज्यसभा के उपसभापति द्वारा खारिज किया जा चुका है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी और जांच कमेटी को इस मामले में जांच आगे जारी रखने की परमिशन भी दी.
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट की ओर से बनाई गई एक इंटरनल कमेटी ने पाया था कि जिस कमरे से तथाकथित कैश मिला था, वो कमरा जस्टिस वर्मा और उनकी फैमिली का ही था. अब शुक्रवार 10 अप्रैल को जस्टिस वर्मा ने जांच जारी रहने और महाभियोग (impeachment) की आशंका के बीच, ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है.

ये पूरा विवाद इन 13 महीनों तक सिलसिलेवार जारी रहा. जिसमें पहले बंग्ले में आग का लगना, फिर आग बुझाने पहुंचे फायर फाइटर्स को कैश का मिलना, इसके बाद मामले का तूल पकड़ना, जांच कमेटियों का बनना, संसद तक मामले का उठना और फिर इलाहाबाद हाईकोर्ट में उनके ट्रांसफर का भी विवादित बने रहना, ये सब इन 13 महीनों में घटा है. आइए देखते हैं, पूरी टाइमलाइन
14 मार्च 2025- दिल्ली हाई कोर्ट के जज रहे जस्टिस यशवंत वर्मा के आवास में आग लगी. आग घर के एक स्टोर रूम में लगी थी, जहां पर कथित तौर पर उनके घर से बड़ी मात्रा में कैश मिला था. कमरे में 500-500 रुपये के जले नोटों के बंडलों से भरे बोरे मिले थे. इस पर सवाल उठा कि इतना कैश कहां से आया और मामले ने तूल पकड़ लिया.
अगले कई दिनों तक मामला सुर्खियों में बना रहा. संसद में भी उठा और इससे न्यायिक व्यवस्था पर भी सवाल उठने लगे.
21 मार्च 2025: जस्टिस वर्मा का ट्रांसफर इलाहाबाद हाईकोर्ट होने का प्रस्ताव बनाया गया.
22 मार्च 2025: CJI रहे संजीव खन्ना ने जस्टिस वर्मा पर लगे आरोपों की आंतरिक जांच के लिए तीन सदस्यों की एक कमेटी बनाई. उन्होंने दिल्ली हाईकोर्ट चीफ जस्टिस से जस्टिस वर्मा को कोई भी काम न सौंपने को कहा. देर रात सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस के घर से 15 करोड़ कैश मिलने का वीडियो जारी किया. 65 सेकेंड के वीडियो में नोटों से भरी जली बोरियां दिखाई दे रही थीं. सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम न्यायमूर्ति वर्मा के तबादले की घोषणा करता है, उन्हें इलाहाबाद हाईकोर्ट भेजा जाता है।
23 मार्च 2025: कैश कांड के लिए 3 सदस्यीय कमेटी बनीं. इसमें जस्टिस शील नागू (पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस), जी एस संधावालिया (हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस) और कर्नाटक हाईकोर्ट के जस्टिस अनु शिवरामन शामिल थे.
24 मार्च 2025: जस्टिस वर्मा के खिलाफ महाभियोग की मांग, इलाहाबाद HC के बार एसोसिएशन ने दिया हिरासत में लेने का सुझाव
25 मार्च 2025: मामले में गठित तीन जजों की कमेटी जांच के लिए दिल्ली स्थित उनके आवास पर पहुंची.कमेटी करीब 45 मिनट तक वहां रुकी और इस दौरान तीनों जज उस कमरे में भी गए जहां जले हुए नोट मिले थे.
26 मार्च 2025: मामले में दाखिल याचिका पर जल्द सुनवाई की मांग की गई. मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव खन्ना की अगुआई वाली पीठ के समक्ष इस मामले की मेंशनिंग की गई. कोर्ट ने याचिकाकर्ता को सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री से संपर्क करने को कहा. याचिका में मांग की गई है कि दिल्ली पुलिस को एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया जाए. पुलिस ने जस्टिस वर्मा के घर पहुंच कर जले हुए हिस्से और कमरे को सील किया.
28 मार्च 2025: कैश कांड में घिरे जस्टिस यशवंत वर्मा को जांच कमेटी का समन, पूछताछ शुरू. उधर, इसी दिन ये मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन तक पहुंचता है और विवाद और गहराता है.जस्टिस यशवंत वर्मा पर FIR की मांग वाली याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज किया. तबादले के विरोध के बावजूद जस्टिस यशवंत वर्मा के ट्रांसफर को केंद्र की मंजूरी
5 अप्रैल 2025: जस्टिस यशवंत वर्मा ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायाधीश के रूप में शपथ ली, फिलहाल नहीं मिलेगी न्यायिक जिम्मेदारी
3 मई 2025: सुप्रीम कोर्ट की आंतरिक जांच समिति न्यायमूर्ति वर्मा को कदाचार (misconduct) का दोषी मानते हुए उनके खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश करती है.
5 मई 2025: जस्टिस यशवंत वर्मा से जुड़े 'कैश कांड' की जांच पूरी, समिति ने CJI को सौंपी रिपोर्ट
8 मई 2025: तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश भारत के राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर न्यायमूर्ति वर्मा के महाभियोग की मांग करते हैं. जस्टिस वर्मा का इस्तीफे से इनकार
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28 मई 2025: जस्टिस यशवंत वर्मा अपने घर पर मिले कैश के बारे में स्पष्टीकरण नहीं दे पाए. सुप्रीम कोर्ट की जांच कमेटी की रिपोर्ट में उनके खिलाफ महाभियोग की सिफारिश की गई. मानसून सत्र में महाभियोग प्रस्ताव लाने की तैयारी
17 जुलाई 2025: न्यायमूर्ति वर्मा सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर इन-हाउस जांच रिपोर्ट को निरस्त करने की मांग करते हैं. उधर, 207 सांसदों ने किया प्रस्ताव का समर्थन
23 जुलाई 2025: सुप्रीम कोर्ट चीफ जस्टिस बी आर गवई ने भरोसा दिया कि वो जल्दी ही बेंच पीठ का गठन करेंगे. जस्टिस वर्मा की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने सीजेआई की कोर्ट के सामने इस याचिका में उठाए गए कई महत्वपूर्ण संवैधानिक मुद्दों का हवाला देते हुए जल्द सुनवाई की गुहार लगाई.
7 अगस्त 2025: जस्टिस वर्मा ने याचिका में सीजेआई द्वारा उन्हें हटाने की सिफारिश को चुनौती दी. कोर्ट ने ये कहते हुए जस्टिस वर्मा की याचिका खारिज की कि जांच समिति ने तय प्रक्रियाओं का पालन किया है. जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस एजी मसीह की पीठ ने कहा कि जस्टिस वर्मा का आचरण विश्वास पैदा नहीं करता इसलिए उनकी याचिका पर विचार नहीं किया जा सकता.

12 अगस्त 2025: लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने जस्टिस यशवंत वर्मा पर लगे आरोपों की जांच के लिए तीन सदस्यीय जांच कमेटी गठित की है. इस कमेटी में सुप्रीम कोर्ट के जज, मद्रास हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस और एक वरिष्ठ वकील को शामिल किया गया.
22 अक्टूबर 2025: लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने जस्टिस यशवंत वर्मा पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच कर रही समिति में वकील करण उमेश साल्वी को सलाहकार नियुक्त किया. यह समिति 'न्यायाधीश जांच अधिनियम, 1968' के तहत बनी थी.
8 जनवरी 2026: सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ चल रही महाभियोग की कार्यवाही पर सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रखा . कोर्ट ने जस्टिस वर्मा की पेशी से राहत पाने की मांग को सिरे से खारिज कर दिया. उन्हें 12 जनवरी को लोकसभा स्पीकर की कमेटी के सामने पेश होने के निर्देश.
12 जनवरी 2026: जस्टिस वर्मा ने संसदीय समिति के सामने अपना पक्ष रखा. जस्टिस वर्मा ने सवाल उठाया कि जब अधिकारियों ने घटनास्थल को सुरक्षित नहीं किया, तो उन्हें महाभियोग का सामना क्यों करना चाहिए. उन्होंने अपने जवाब में यह भी कहा कि वह मौके पर पहुंचने वाले पहले व्यक्ति नहीं थे. जस्टिस वर्मा ने संसदीय समिति को दिए अपने जवाब में पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाए.
16 जनवरी 2026: जस्टिस यशवंत वर्मा को SC से झटका, लोकसभा स्पीकर के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका खारिज
26 फरवरी 2026: लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने जस्टिस यशवंत वर्मा मामले की जांच के लिए गठित कमेटी में एक बदलाव किया है. अब मद्रास हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस की जगह बॉम्बे हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को लोकसभा की जांच कमेटी में शामिल किया गया है.
10 अप्रैल 2026: इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस यशवंत वर्मा का इस्तीफा