लश्कर-ए-तैयबा और ओवर ग्राउंड वर्कर्स (LeT-OGW) से लिंक मामले में IPS अफसर अरविंद दिग्विजय नेगी पर NIA ने शिकंजा कस दिया है. नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) ने अरविंद दिग्विजय नेगी समेत 7 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है. नेगी की फरवरी में गिरफ्तारी हुई थी. नेगी पर लश्कर-ए-तैयबा को खुफिया जानकारी लीक करने का आरोप है.
अरविंद दिग्विजय नेगी (Arvind Digvijay Negi) हिमाचल प्रदेश काडर के आईपीएस अधिकारी (IPS officer) था. नेगी पूर्व में NIA का टॉप इन्वेस्टिगेटर भी रह चुका है. बाद में नेगी को केंद्रीय प्रतिनियुक्ति से वापस हिमाचल प्रदेश भेजा गया था.
सूत्रों के मुताबिक, NIA जांच में कुछ आरोपियों के सीधे पाकिस्तान से कनेक्शन मिले हैं. नेगी समेत 7 लोगों पर लश्कर-ए-तैयबा को खुफिया जानकारी लीक करने का आरोप है. NIA ने केंद्रीय गृह मंत्रालय से चार्जशीट दाखिल करने की अनुमति मांगी थी. सूत्रों के मुताबिक NIA में काम कर चुके एडी नेगी, खुर्रम परवेज, मुनीर अहमद, अरशद अहमद टोंक, जफर अब्बास, रामभान प्रसाद, चंदन महतो के खिलाफ NIA ने कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की है.
पैसों के एवज में सौंप दिए थे दस्तावेज
NIA को जांच में पता चला है कि अरविंद दिग्विजय नेगी ने कश्मीर घाटी में जिस ओवर ग्राउंड वर्कर (OGW) परवेज खुर्रम के घर पहली बार NIA की रेड की थी, उसी को आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (LeT) से जुड़े गोपनीय दस्तावेज पैसों के एवज में सौंप दिए थे. खुफिया टेलीग्राम चैट के जरिए पूर्व NIA अफसर नेगी पैसों के लेने-देन की बात करता था.
नेगी के पास 10 से ज्यादा मोबाइल नंबर थे, जिससे वो डीलिंग करता था. सूत्रों के मुताबिक पाकिस्तान का रहने वाला हैदर अली फरार चल रहा है, उसके चार्जशीट में शामिल कुछ आरोपियों के सीधे संबंध थे. बता दें कि नेगी 11 साल तीन महीने NIA में प्रतिनियुक्ति (deputation) में रहा, उसके बाद वापस मूल कैडर हिमाचल प्रदेश वापस भेज दिया गया था.
नेगी NIA टीम में बड़ी जिम्मेदारी संभालता था
नेगी NIA में सबसे लंबा कार्यकाल पूरा करने वाले अधिकारियों में शामिल था. बीते साल नवंबर में NIA ने हिमाचल प्रदेश के किन्नौर में नेगी के आवास पर छापेमारी की थी. इस मामले में NIA ने 6 नवंबर 2021 को केस दर्ज किया था. बता दें कि अरविंद दिग्विजय नेगी NIA की उस टीम का हिस्सा थे, जो फेक करेंसी (fake currency), आईएसआईएस (ISIS) के आतंकियों की भर्ती और जम्मू-कश्मीर में टेरर फंडिंग के लिए नियंत्रण रेखा (LOC) की दूसरी तरफ व्यापार के संबंधित मामलों की जांच करती थी.