मशहूर निवेशक और लेखक रुचिर शर्मा ने कहा है कि डोनाल्ड ट्रंप अपने दूसरे कार्यकाल में पहले से भी ज्यादा आक्रामक तरीके से टैरिफ (शुल्क) लगाने की रणनीति अपना सकते हैं. आजतक के न्यूज डायरेक्टर राहुल कंवल के साथ इंटरव्यू में शर्मा ने कहा, 'जहां तक टैरिफ का सवाल है, इसके लिए ट्रंप को अमेरिकी कांग्रेस की जरूरत भी नहीं है. टैरिफ बढ़ाने का अधिकार उनके पास खुद है. उन्हें कांग्रेस की जरूरत टैक्स कटौती और वित्तीय नीतियों को पास कराने के लिए होगी.' उन्होंने जोर देकर कहा कि टैरिफ के मामले में ट्रंप पिछली बार से कहीं ज्यादा बड़ा कदम उठा सकते हैं.
भारत-अमेरिका संबंध: सावधानी की जरूरत
शर्मा ने भारत और अमेरिका के संबंधों को लेकर भी आगाह किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और डोनाल्ड ट्रंप की दोस्ती को ज्यादा महत्वपूर्ण मानने से बचना चाहिए. उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच एक मजबूत रणनीतिक साझेदारी है, लेकिन इसका आधार पूरी तरह से "लेन-देन" (transactional) है.
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उन्होंने कहा, 'मुझे लगता है कि अमेरिका अब इतना भरोसेमंद सहयोगी नहीं रह गया है. अगर कल को अमेरिका के हित में चीन के साथ किसी समझौते पर पहुंचना हो, तो वह 'भारत एक सहयोगी है जैसी बात नहीं सोचेगा.'
शर्मा ने चेतावनी दी कि ट्रंप के शासन में भारत को ऐसे 'लेन-देन' वाले रवैये के लिए तैयार रहना चाहिए, जहां वह किसी देश के साथ अपने लाभ के लिए सौदा कर सकते हैं. उन्होंने कहा, 'मुझे लगता है कि वह दिन चले गए जब अमेरिका हर मामले में अपने सहयोगियों के बारे में सोचे.'
अमेरिकी राजनीति में भारत की स्थिति
रुचिर शर्मा ने यह भी कहा कि अमेरिकी राजनीति में भारत की चर्चा कम ही होती है. उन्होंने कहा, 'अमेरिकी चुनावी कैंपेन में भारत का नाम बहुत कम लिया गया. हालांकि यहां खबरें बनीं, लेकिन अमेरिकी नजरिए से देखें तो भारत का जिक्र बहुत कम हुआ.'
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फिर भी शर्मा ने यह माना कि अमेरिका में भारत की 'ब्रांड इमेज' मजबूत है, खासकर वहां के सफल अप्रवासी भारतीयों की वजह से. उन्होंने कहा, 'आज के समय में भारत की ब्रांड इमेज काफी मजबूत है. यह सफल अप्रवासियों भारतीय से जुड़ी है. हालांकि, भारत अवैध प्रवासियों के मामले में दूसरे नंबर पर है, लेकिन फिर भी भारत की ब्रांड इमेज काफी सकारात्मक है. सफल भारतीय सीईओ और वहां काम कर रहे लोग इसका बड़ा हिस्सा हैं.'
डोनाल्ड ट्रंप की जीत के कारण
डोनाल्ड ट्रंप की जीत के कारणों का विश्लेषण करते हुए शर्मा ने बताया कि अमेरिकी लोगों में आर्थिक असंतोष बहुत गहरा है. उन्होंने कहा कि 70% अमेरिकी वर्तमान व्यवस्था से असंतुष्ट हैं और उनमें से कई लोग मानते हैं कि मौजूदा पूंजीवादी ढांचा उनकी जरूरतें पूरी नहीं कर रहा है.
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उन्होंने कहा, 'अमेरिका के 70% लोग मानते हैं कि सिस्टम को या तो पूरी तरह से बदलने की जरूरत है या फिर कुछ बड़ा कदम उठाने की जरूरत है. शर्मा ने इसे एक 'प्रोटेस्ट वोट' (विरोध का वोट) करार दिया, जिसमें मौजूदा व्यवस्था के प्रति गहरी असंतुष्टि झलकती है.