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15 मिनट लोडिंग... 4 मिनट अनलोड! रेलवे की मदद से नमक की ढुलाई होगी सुपरफास्ट

भारतीय रेलवे ने नमक ढुलाई को आसान बनाने के लिए नई तकनीक ट्राई की है. रेलवे के गांधीधाम से हुए ट्रायल में 33 टन नमक को 20 फीट लंबे और 8.5 फीट ऊंचे-चौड़े कंटेनर में लोड किया गया. इस सफल ट्रायल में लोडिंग और अनलोडिंग बेहद कम समय में पूरी हुई है.

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अब रेलवे की मदद से होगी औद्योगिक नमक की आसान ढुलाई. (Photo: X/@drmadiwr)
अब रेलवे की मदद से होगी औद्योगिक नमक की आसान ढुलाई. (Photo: X/@drmadiwr)

भारतीय रेलवे ने नमक परिवहन को आसान और तेज बनाने के लिए नई तकनीक की ओर कदम बढ़ाया है. गांधीधाम, गुजरात से हुए ट्रायल में पहली बार औद्योगिक नमक को स्टेनलेस स्टील कंटेनरों के जरिए रेल मार्ग से भेजा गया. यह प्रयोग न केवल उद्योग जगत के लिए अहम साबित हो सकता है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी एक बड़ा बदलाव लेकर आ सकता है.

नीलकंठ जोन, गांधीधाम से हुए इस सफल ट्रायल में 33 टन औद्योगिक नमक को 20 फीट लंबे और 8.5 फीट ऊंचे और 8.5 ही चौड़े स्टेनलेस स्टील कंटेनर में लोड किया गया. खास बात यह रही कि लोडिंग में केवल 15 मिनट और अनलोडिंग में मात्र 4 मिनट लगे. इतनी तेज प्रोसेसिंग रेलवे फ्रेट लॉजिस्टिक्स के लिए नया बेंचमार्क बन सकती है. रेलवे ने इसकी जानकारी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर शेयर की है.

 

स्टेनलेस स्टील कंटेनरों का इस्तेमाल नमक परिवहन में क्रांतिकारी साबित हो सकता है. रेलवे ने बताया कि इससे जंग की समस्या खत्म होने में मदद मिलेगी. इससे नमक सुरक्षित रहेगा, हैंडलिंग प्रदूषण-रहित होगी और टर्नअराउंड टाइम बेहद कम हो सकेगा. साथ ही, सड़क परिवहन से रेल की ओर शिफ्ट होने से लागत घटेगी, ईंधन की खपत कम होगी और कार्बन उत्सर्जन भी घटेगा.

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यह पहल ग्रीन लॉजिस्टिक्स की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है. उद्योगों के लिए यह सुविधा गेम चेंजर साबित हो सकती है. माना जा रहा है कि पश्चिम रेलवे की इस कोशिश से कच्छ को नई पहचान मिलेगी और निर्यात-आयात की प्रोसेस भी तेज होगी. इनोवेशन, स्पीड और सस्टेनेबिलिटी की मदद से यह ट्रायल भविष्य के लिए फायदेमंद बन सकता है. 

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