भारत सरकार ने स्पष्ट किया है कि देश अपनी ऊर्जा जरूरतों को ध्यान में रखते हुए उन देशों से कच्चा तेल खरीदना जारी रखेगा जहां तेल सस्ता और बेहतर गुणवत्ता का उपलब्ध होगा. मंगलवार को सरकार के शीर्ष अधिकारियों ने यह जानकारी विदेश मामलों की संसदीय स्थायी समिति को दी.
सूत्रों के मुताबिक, विदेश मंत्रालय और वाणिज्य मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने समिति को बताया कि भारतीय तेल कंपनियां भू-राजनीतिक परिस्थितियों और गैर-प्रतिबंधित स्रोतों को ध्यान में रखते हुए तेल की खरीद करेंगी. इस बैठक की अध्यक्षता कांग्रेस नेता शशि थरूर ने की.
न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक बैठक के बाद थरूर ने कहा कि यह तीन घंटे से अधिक समय तक चली बेहद प्रभावी बैठक थी, जिसमें 30 में से 28 सदस्य मौजूद रहे. उन्होंने बताया कि बैठक का बड़ा हिस्सा भारत-अमेरिका व्यापार समझौते और भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर केंद्रित रहा. इसके साथ ही रूसी तेल और कृषि उत्पादों जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई.
18 प्रतिशत टैरिफ पर भी हुई चर्चा
थरूर ने कहा कि अधिकारियों ने समिति को बताया कि भारत अमेरिका के साथ अंतरिम व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने पर काम कर रहा है, हालांकि इसके विस्तृत विवरण के लिए अगले महीने तक इंतजार करना होगा. उन्होंने यह भी बताया कि अमेरिका द्वारा भारतीय उत्पादों पर लगाए जाने वाले 18 प्रतिशत पारस्परिक टैरिफ पर चर्चा हुई. इससे पहले अमेरिकी टैरिफ 25 प्रतिशत था और रूसी तेल खरीदने पर अतिरिक्त 25 प्रतिशत लगाया जाता था, जो कुल मिलाकर 50 प्रतिशत हो जाता था. अब इसे घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया गया है.
उन्होंने कहा कि भारत उन देशों में शामिल है, जिन्हें अपेक्षाकृत कम टैरिफ दर मिली है. यूरोपीय संघ के उत्पादों पर 15 प्रतिशत और ब्रिटेन के उत्पादों पर शून्य टैरिफ के बदले 10 प्रतिशत टैरिफ लगाया जाएगा.
इस पर भी हुई चर्चा
बैठक में अमेरिका से अगले पांच वर्षों में 500 अरब डॉलर के सामान खरीदने की संभावना पर भी चर्चा हुई. थरूर ने कहा कि यह कोई बाध्यकारी लक्ष्य नहीं है, लेकिन इसे हासिल करने की दिशा में प्रयास किए जाएंगे. फिलहाल भारत अमेरिका से लगभग 42 अरब डॉलर का आयात करता है और इसे दोगुना करना कठिन नहीं माना जा रहा है.
सूत्रों ने यह भी बताया कि ऊर्जा क्षेत्र में प्रतिबंध हटने के बाद भारतीय कंपनियां अब अमेरिका और वेनेजुएला से भी तेल खरीद सकती हैं.
वहीं, आम आदमी पार्टी के सांसद राघव चड्ढा ने कहा कि अधिकारियों ने भारत-अमेरिका और भारत-ईयू व्यापार समझौतों के विभिन्न पहलुओं पर विस्तृत प्रस्तुति दी. उन्होंने कहा कि इन समझौतों के प्रभाव को समझने के लिए आने वाले समय का इंतजार करना होगा. इसके अलावा, भारत-बांग्लादेश संबंधों पर भी चर्चा हुई. थरूर ने बताया कि बांग्लादेश में चुनाव परिणाम आने के बाद इस विषय पर अलग से चर्चा की जाएगी.