
भारत का एक हिस्सा चिलचिलाती धूप और भयंकर गर्मी से जूझ रहा है. उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत के ज्यादातर हिस्से अभी भी हीटवेव की चपेट में हैं.वहीं, दूसरी तरफ हिमालयी राज्यों में मौसम का मिजाज बदला नजर आ रहा है.
हिमालयों राज्यों के लिए मौसम विभाग ने बारिश, आंधी-तूफान और तेज हवाओं का 'येलो अलर्ट' जारी हो गया है. INSAT-3DS सैटेलाइट तस्वीरों से साफ पता चलता है कि उत्तर भारत के ऊपरी इलाकों में एक बहुत बड़ा 'वेस्टर्न डिस्टर्बेंस' एक्टिव है.
'वेस्टर्न डिस्टर्बेंस' की वजह से जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के ऊपर बादलों का एक घुमावदार चक्र बना हुआ है. घने और ठंडे बादलों की ये परत उत्तर भारत की गर्म हवाओं से टकरा रही है. इसकी वजह से पहाड़ों पर तेज बारिश, बिजली गिरने और ओलावृष्टि हो सकती है.

केरल में वक्त से पहले मानसून
साउथ इंडिया में भी मौसम ने करवट ली है. अरब सागर और दक्षिणी प्रायद्वीप के ऊपर बादलों के गहरे झुंड बहुत तेजी से बन रहे हैं. केरल और लक्षद्वीप के पास बादलों की ये हलचल देश में मानसून की एंट्री की ओर इशारा कर रहा है. IMD ने संभावना जताई है कि केरल में मानसून समय से पहले आ सकता है. केरल में मानसून आमतौर पर 1 जून से आता है, लेकिन अब ये 26 मई को ही दस्तक दे सकता है.

मौसम विभाग ने 28 मई से 3 जून के बीच केरल के कई हिस्सों में बहुत भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है. मानसून की शुरुआत में इस तरह की मूसलाधार बारिश होना बेहद आम बात है.
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सैटेलाइट तस्वीरों में देखा जा सकता है कि मध्य भारत में जहां झुलसाने वाली गर्म और सूखी हवाओं का कब्जा है, वहीं दूसरी तरफ हिमालय और अरब सागर के ऊपर बादलों की विशाल ढाल तैयार हो रही है. ये इस बात का सीधा संकेत है कि भारत अब कड़कड़ाती गर्मी के चरम दौर से निकलकर मानसून की ओर बढ़ रहा है