केंद्र की मोदी सरकार ने सरकारी तेल कंपनियों को कहा है कि वो LPG यानी रसोई गैस का इतना स्टॉक अपने पास रखें जो कम से कम 30 दिन चल सके. पेट्रोलियम मंत्रालय की ज्वाइंट सेक्रेटरी सुजाता शर्मा ने शुक्रवार को यह बात पत्रकारों को बताई. यह कदम इसलिए उठाया गया क्योंकि पश्चिम एशिया यानी मिडल ईस्ट में चले तीन महीने के युद्ध की वजह से भारत में तेल और गैस की सप्लाई बुरी तरह प्रभावित हुई थी.
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से मंगाता है. इस युद्ध की वजह से भारत का 40 फीसदी कच्चा तेल, 65 फीसदी नेचुरल गैस और 90 फीसदी LPG सप्लाई बाधित हो गई. यानी रसोई में जो गैस सिलिंडर इस्तेमाल होता है, उसकी 90 फीसदी सप्लाई वहीं से आती है और वो रुक गई.
कच्चा तेल वो होता है जिससे पेट्रोल और डीजल बनता है. नेचुरल गैस से बिजली बनती है, खाद्य बनती है, CNG बनती है जो गाड़ियों में जलती है और पाइप से घरों में भी आती है. इन दोनों की सप्लाई किसी तरह मैनेज हो गई. लेकिन LPG की कमी ने कमर्शियल यूजर्स यानी होटल, ढाबे और दुकानदारों की सप्लाई पर असर डाला.
सरकार ने क्या आदेश दिए
सरकार ने तीन बड़ी सरकारी तेल कंपनियों - Indian Oil (IOC), भारत पेट्रोलियम (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) को निर्देश दिया है कि वो अपने रोजाना के कमर्शियल स्टॉक से अलग, 30 दिन का एक्स्ट्रा LPG स्टॉक बनाने का प्लान तैयार करें. इसे स्ट्रैटेजिक रिजर्व कहते हैं यानी एक ऐसा भंडार जो आपात स्थिति में काम आए. सरकार कच्चे तेल का स्टोरेज भी बढ़ाने पर काम कर रही है, हालांकि इस बारे में अभी कोई विस्तृत जानकारी नहीं दी गई.
अभी हालात कैसे हैं - सरकार का दावा
सरकार ने कहा कि देश में पेट्रोल, डीजल, LPG, कच्चा तेल और नेचुरल गैस का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है. रिफाइनरियां यानी तेल साफ करने के कारखाने पूरी क्षमता पर चल रहे हैं. LPG का उत्पादन अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर है, करीब 52,000 टन प्रतिदिन. किसी भी LPG डिस्ट्रिब्यूटर के यहां गैस खत्म होने की खबर नहीं आई है.
पेट्रोल-डीजल की बिक्री क्यों अचानक बढ़ गई
पेट्रोल पंपों पर भीड़ बढ़ रही है और कई जगहों पर असामान्य रूप से ज्यादा बिक्री हो रही है. इसकी दो बड़ी वजहें हैं. पहली वजह है खेती. इस समय खेतों में काम ज्यादा है जिससे डीजल की मांग बढ़ी है.
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दूसरी और बड़ी वजह है कीमतों का फर्क. सरकारी कंपनियों के पंपों पर पेट्रोल-डीजल की कीमत लागत से भी कम पर बिक रही है. वहीं प्राइवेट कंपनियों ने कीमतें बहुत ज्यादा बढ़ा दी हैं. इसीलिए जो बड़े खरीदार पहले प्राइवेट पंपों से या थोक में खरीदते थे, वो अब सरकारी पंपों पर आ गए हैं.
IOC, BPCL और HPCL ने 15 मई के बाद से पेट्रोल और डीजल की कीमतें करीब 7.50 रुपये प्रति लीटर बढ़ाई हैं. ये तीनों कंपनियां मिलकर देश के 90 फीसदी ईंधन बाजार को कंट्रोल करती हैं.
प्राइवेट डीजल रिटेलर्स की बिक्री 38 फीसदी गिर गई है. सरकारी कंपनियों की थोक डीजल बिक्री भी 29 फीसदी घटी है क्योंकि बड़े खरीदार, जैसे टेलीकॉम टावर ऑपरेटर, मार्केट रेट पर खरीदते हैं इसलिए वो कम खरीद रहे हैं.
कितनी बड़ी है डिमांड की तस्वीर
150 से ज्यादा जिलों में पेट्रोल की बिक्री 30 फीसदी से ज्यादा बढ़ी है. 14 जिलों में तो बिक्री दोगुनी हो गई है. डीजल की बात करें तो 156 जिलों में 30 फीसदी से ज्यादा बिक्री बढ़ी है और 6 जिलों में बिक्री 100 फीसदी से ज्यादा बढ़ी है.
सरकार ने जमाखोरी पर क्या किया?
सरकार हालात पर नजर रख रही है. राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को कहा गया है कि वो जमाखोरी और काला बाजारी रोकने के लिए स्पेशल टीमें बनाएं. लोगों से भी अपील की गई है कि वो घबराहट में ईंधन न खरीदें और सिर्फ अधिकृत यानी सरकारी मान्यता प्राप्त जगहों से ही ईंधन खरीदें.