भारत ने सात साल बाद ईरान से तेल निर्यात किया है. दो बड़े तेल टैंकर ईरानी कच्चा तेल लेकर भारत के बंदरगाहों पर पहुंच गए हैं. यह तब हुआ है जब अमेरिका ने पिछले महीने भारत को एक अस्थायी छूट दी थी कि वो ईरान से तेल खरीद सकता है. लेकिन यह छूट 19 अप्रैल को खत्म हो रही है. इसलिए भारतीय कंपनियां इस मौके का जल्द से जल्द फायदा उठाने में लगी हैं.
अमेरिका और के बीच जो जंग शुरू हुआ और फिर सीजयफायर हुई, उस दौरान अमेरिका ने भारत को एक अस्थायी छूट दी. इस छूट के तहत भारत कुछ समय के लिए ईरान से तेल खरीद सकता है. लेकिन यह छूट सिर्फ 19 अप्रैल 2026 तक है. उसके बाद क्या होगा, यह अभी साफ नहीं है. इसीलिए भारतीय तेल कंपनियां जल्दी-जल्दी इस मौके का फायदा उठा रही हैं.
कौन से जहाज आए और कहां पहुंचे?
जहाजों की आवाजाही पर नजर रखने वाली कंपनी LSEG के डेटा के मुताबिक दो बहुत बड़े तेल टैंकर यानी VLCC भारत पहुंचे हैं. पहला जहाज है 'फेलिसिटी जो ईरान का अपना जहाज है. यह पश्चिम भारत में गुजरात के सिक्का बंदरगाह पर पहुंचा है.
दूसरा जहाज है 'जाया' जो कुराकाओ देश का झंडा लगाकर चलता है. यह पूर्वी भारत में ओडिशा के बंदरगाह पर पहुंचा है. एक VLCC यानी बहुत बड़ा कच्चा तेल वाहक में करीब 20 लाख बैरल तेल आता है. यह बहुत बड़ी मात्रा है.
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किन भारतीय कंपनियों ने तेल खरीदा?
भारत की दो बड़ी कंपनियों ने यह तेल खरीदा है. पहली है इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन यानी IOC जो देश की सबसे बड़ी तेल रिफाइनरी कंपनी है. IOC ने 'जाया' जहाज में लदा तेल खरीदा है. दूसरी है रिलायंस इंडस्ट्रीज जो दुनिया की सबसे बड़ी रिफाइनिंग कंपनी चलाती है. रिलायंस को चार जहाजों से तेल खरीदने की इजाजत मिली है. ये जहाज हैं कविज, लेनोर, फेलिसिटी और हेडी. एक खास बात यह है कि ये सभी जहाज अमेरिकी प्रतिबंधों की सूची में हैं और 20 साल से भी पुराने हैं. फिर भी भारत ने इन्हें आने दिया क्योंकि अमेरिकी छूट मिली हुई है.
आगे क्या होगा, 19 अप्रैल के बाद का सवाल
सबसे बड़ा सवाल यही है कि 19 अप्रैल के बाद क्या होगा. अगर छूट नहीं बढ़ाता तो भारत को फिर से ईरानी तेल बंद करना पड़ सकता है. और अगर छूट बढ़ती है तो यह सिलसिला जारी रह सकता है. दूसरी ओर सीजफायर पर जो इस्लामाबाद में बात विफल रही है, उसकी वजह से डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज के रास्ते पर नाकेबंदी का ऐलान कर दिया है.
भारत के लिए ईरानी तेल इसलिए फायदेमंद है क्योंकि यह आम तौर पर सस्ता मिलता है और भारत के करीब है तो ढुलाई का खर्च भी कम पड़ता है. लेकिन अमेरिकी दबाव एक बड़ी रुकावट है जो हमेशा से रही है. फिलहाल भारतीय कंपनियां इन कुछ दिनों में जितना हो सके उतना तेल मंगाने की कोशिश में हैं.
इनपुट: रॉयटर्स