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'सोमनाथ मंदिर का मामला मुझे परेशान कर रहा...', नेहरू के पत्रों में चौंकाने वाला खुलासा

देश की आजादी के तुरंत बाद शुरू हुए सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण को लेकर तत्कालीन सरकार के शीर्ष नेतृत्व के बीच गंभीर मतभेद थे. भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के निजी पत्रों से खुलासा हुआ है कि वह सरकार के किसी भी प्रतिनिधि के धार्मिक आयोजन से जुड़ने के खिलाफ थे. वहीं तत्कालीन राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद और गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल मंदिर पुनर्निर्माण के पक्ष में खड़े रहे.

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नेहरू के निजी पत्रों से खुलासा हुआ है कि वह सोमनाथ मामले में तत्कालीन सरकार के प्रतिनिधियों के जुड़ने को लेकर असहज महसूस कर रहे थे. (Photo: ITG)
नेहरू के निजी पत्रों से खुलासा हुआ है कि वह सोमनाथ मामले में तत्कालीन सरकार के प्रतिनिधियों के जुड़ने को लेकर असहज महसूस कर रहे थे. (Photo: ITG)

सोमनाथ मंदिर को लेकर आजादी के बाद की राजनीति और तत्कालीन सत्ता के भीतर मतभेदों पर फिर बहस छिड़ गई है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण के 75 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित 'सोमनाथ अमृत महोत्सव' के मंच से कहा कि देश के पहले उप प्रधानमंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल और प्रथम राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद के अथक प्रयासों के चलते सोमनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण हो पाया था, लेकिन तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने इसका विरोध किया था.

देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के निजी पत्रों में सोमनाथ मंदिर पुनर्निर्माण को लेकर उनकी नाराजगी और असहजता सामने आई है. बीजेपी ने नेहरू के 17 पत्रों का हवाला देते हुए दावा किया है कि उन्होंने सोमनाथ मंदिर से जुड़े पूरे मामले को 'Somnath Temple Business' बताया था और मंदिर के पुनर्निर्माण कार्य में सरकार के किसी भी प्रकार के जुड़ाव पर लगातार आपत्ति जताई थी. बीजेपी के मुताबिक ये सभी पत्र नेहरू आर्काइव्स में मौजूद हैं. तत्कालीन प्रधानमंत्री नेहरू के वो 17 पत्र आजतक के हाथ भी लगे हैं...

इन पत्रों के मुताबिक देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू का 1950-51 के दौरान के.एम. मुंशी, राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद, जाम साहेब नवानगर, मृदुला साराभाई और अन्य कई लोगों को पत्र लिखे थे. इन पत्रों में उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा था कि भारत सरकार को किसी भी धार्मिक आयोजन या मंदिर निर्माण से खुद को दूर रखना चाहिए. बता दें कि के.एम. मुंशी सोमनाथ मंदिर के जीर्णोद्धार के पीछे मुख्य प्रेरक शक्ति थे.

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17 अप्रैल 1951 को के.एम. पणिक्कर को लिखे एक पत्र में नेहरू ने लिखा था कि सोमनाथ मंदिर का पूरा मामला उन्हें 'फैंटास्टिक' यानी बेहद अजीब और असहज लग रहा है. नेहरू ने पत्र में यह भी लिखा कि उन्होंने राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद और के.एम. मुंशी से आग्रह किया था कि वे खुद को इस कार्यक्रम से न जोड़ें, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी.

24 अप्रैल 1951 को मृदुला साराभाई को लिखे पत्र में नेहरू ने कहा कि 'सोमनाथ मंदिर का यह मामला मुझे बहुत परेशान कर रहा है.' नेहरू ने लिखा कि उन्होंने राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद को अपना मत स्पष्ट रूप से बता दिया था, लेकिन उनकी व्यक्तिगत इच्छा में बाधा डालना उचित नहीं समझा.

20 जुलाई 1950 को के.एम. मुंशी को लिखे पत्र में नेहरू ने कहा था कि सरकार के रूप में किसी धार्मिक भवन का निर्माण करना उचित नहीं है. उन्होंने देश की आर्थिक स्थिति और आवास संकट का हवाला देते हुए सोमनाथ मंदिर पुनर्निर्माण परियोजना को अनुपयुक्त बताया था.

नेहरू ने तत्कालीन राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद के सोमनाथ मंदिर के उद्घाटन समारोह में शामिल होने पर भी आपत्ति जताई थी. उनका मानना था कि इससे यह संदेश जाएगा कि सरकार किसी धार्मिक आयोजन से आधिकारिक तौर पर जुड़ी हुई है.

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सबसे बड़ा विवाद तब सामने आया जब सोमनाथ ट्रस्ट की ओर से विदेशी दूतावासों को विभिन्न देशों की नदियों का जल और पवित्र टहनियां भेजने के लिए पत्र लिखे गए. नेहरू ने इसे लेकर नाराजगी जताई और कहा कि इससे भारत की धर्मनिरपेक्ष छवि पर असर पड़ सकता है. उन्होंने अपने पत्रों में लिखा कि विदेशी मिशनों को इस तरह के अनुरोध भेजना उन्हें असहज स्थिति में डाल रहा है.

22 अप्रैल 1951 को जाम साहेब नवानगर को लिखे पत्र में नेहरू ने साफ कहा था कि भारत सरकार का सोमनाथ मंदिर से जुड़े समारोह से कोई संबंध नहीं है और संसद में भी वह यही स्पष्ट करेंगे. उन्होंने यह भी लिखा कि पाकिस्तान इस मुद्दे का इस्तेमाल यह साबित करने के लिए कर रहा है कि भारत एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र नहीं है.

इन तमाम आपत्तियों के बावजूद तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद 11 मई 1951 को सोमनाथ मंदिर के उद्घाटन समारोह में शामिल हुए. उन्होंने मंदिर का उद्घाटन किया. सरदार पटेल, के.एम. मुंशी समेत कई लोगों के अथक प्रयासों और जनसहयोग से सोमनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण पूरा हुआ.

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