Operation Sindoor reactions: ऑपरेशन सिन्दूर के बाद दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, कोलकाता समेत देशभर में जश्न का माहौल है, लोगों का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पाकिस्तान को करारा जवाब दिया है. वहीं, दूसरी ओर कांग्रेस नेता राशिद अल्वी और समाजवादी पार्टी नेता वीरेंद्र सिंह ने भारत की ओर से पाकिस्तान के खिलाफ की गई कार्रवाई पर सवाल खड़ कर दिए हैं.
कांग्रेस नेता राशिद अल्वी ने क्या कहा?
समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत करते हुए राशिद अल्वी ने कहा कि पाकिस्तान को इससे ज्यादा जवाब देने की जरूरत है. ये कम से कम कार्रवाई की गई. भारतीय सेना ने तो वो किया जो भारत सरकार ने बोला. लेकिन, सवाल अभी भी बना हुआ है कि क्या चुन-चुनकर आतंकियों को मारा गया?
उन्होंने कहा, 'क्या पहलगाम अब फिर से नहीं होगा? प्रधानमंत्री ने कहा था कि आतंकियों को चुन-चुनकर मार गिराया जाएगा—अगर ऐसा हुआ है, तो अच्छी बात है. लेकिन जवाब इससे बेहतर होना चाहिए था'.
समाजवादी पार्टी के नेता वीरेंद्र सिंह ने क्या कहा?
एएनआई से बातचीत करते हुए वीरेंद्र सिंह ने कहा कि जैसे पहलगाम में देशवासियों की निर्मम हत्या की गई थी, उसके हिसाब से यह कार्रवाई कम है. सेना के साथ 140 करोड़ जनता उन पर भरोसा करती है, उन पर पूरी तरीके से गर्व करती है
उन्होंने कहा, उनके किसी भी कार्यशैली पर सवाल नहीं है. सवाल तो राजनीतिक दलों के ऊपर है जिनके हाथों में? सेना की कमान थाम रखी है. उनकी कार्यशैली पर है. चाहे वो राजनीतिक फायदा के लिए चाहे कूटनीतिक फायदा के लिए वो जिस तरीके से सेना का इस्तेमाल कर रही है वो ठीक नहीं है.
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वीरेंद्र सिंह ने कहा, इस देश का 140 करोड़ लोग ये चाहते हैं कि कठोर कार्रवाई हो ताकि आतंकवादियों की कमर टूट जाए और भारत के ऊपर गलत निगाह करने वाले सभी देश जो आतंकवादियों को प्रसारित करते हैं, उनकी दोबारा हिम्मत न पड़े कि भारत की तरफ टेढ़ी नजर से देख सके.
उन्होंने सवाल उठते हुए पूछा कि हम हमला कहां कर रहे हैं? हम पाक अधिकृत कर रहे हैं जिस पीओके को हम भारत का अन्य समझते हैं. हम हमला आतंकवादियों के ऊपर कर रहे हैं या आतंकवादियों को समर्थन करने वाले लोगों के ऊपर कर रहे हैं. दोनों में ये विशेष अंतर है. लेकिन सेना की कार्रवाई का हम सब समर्थन करते हैं और चाहते हैं कि इससे भी बड़ी कार्रवाई हो. देश के 27 निरीह लोगों की हत्या हुई है और इसका जवाब तो भारतवर्ष देगा और कठोरता से देगा और इसके लिए हमारे सैनिकों के हाथ खोल देने चाहिए और एक बार. यह फैसला हो जाना चाहिए कि आतंकवादी हमारी तरफ टेढ़ी निगाह से देखेंगे कि नहीं देखेंगे.