गुजरात का एक दंपति पिछले डेढ़ साल से अपनी बच्ची से हजारों मील की दूरी पर है और उससे मिलने की गुहार लगा रहा है. अहमदाबाद के भावेश और धारा हिंदुस्तान में हैं जबकि उनकी दो साल की बेटी अरिहा जर्मनी में है.
सितंबर 2021 इस परिवार के लिए स्याह साबित हुआ. वर्क वीजा पर जर्मनी के बर्लिन गए इस गुजराती परिवार की दुनिया उस समय बिखर गई, जब अरिहा के प्राइवेट पार्ट पर चोट लग गई और अस्पताल ले जाने पर मां-बाप पर ही यौन उत्पीड़न का आरोप लगा. इसके बाद अरिहा को प्रशासन ने फोस्टर केयर होम भेज दिया. सितंबर 2021 के बाद से ही यह परिवार अरिहा की कस्टडी के लिए कानूनी जंग लड़ रहा है.
यह दंपति बीते कई महीनों से गुहार लगा रहा है कि उन्हें उनकी बेटी लौटा दी जाए. लेकिन ना भारत सरकार उनकी सुन रही है और ना ही जर्मनी सरकार से उन्हें मदद मिल पा रही है. ऐसे में बायकॉट जर्मनी सोशल मीडिया पर ट्रेंड कर रहा है. जर्मनी सरकार पर बच्ची अरिहा को बंधक बनाकर फोस्टर केयर होम में रखने के भी आरोप लग रहे हैं.
अरिहा के मां-बाप की अपील ठुकराई
भावेश और धरा ने जर्मनी सरकार से गुहार लगाई थी कि उनमें से किसी एक अभिभावक को जर्मनी के फोस्टर होम में अरिहा के पास रुकने दिया जाए.लेकिन जर्मनी सरकार ने उनकी यह अपील ठुकरा दी. जर्मनी प्रशासन का कहना है कि फोस्टर होम में अगस्त तक किसी के ठहरने की जगह नहीं है.
बता दें कि डॉक्टर को अरिहा के डाइपर पर खून मिल था, जिसके बाद बच्ची को प्रशासन ने फोस्टर केयर होम भेज दिया था. अरिहा तभी से फोस्टर केयर होम में ही है.
अरिहा की मां धरा का कहना है कि इस साल अगस्त में अरिहा को फोस्टर केयर होम में दो साल पूरे हो जाएंगे. जर्मनी सरकार के नियमों के तहत अगर किसी बच्चे को फोस्टर केयर होम में रहते हुए दो साल हो जाते हैं तो उस बच्चे को उनके मां-बाप को नहीं लौटाया जाता.
जर्मनी सरकार ने अरिहा से बार-बार मिलने के मां-बाप के अनुरोध को भी ठुकरा दिया है. फिलहाल भावेश और धरा महीने में एक बार ही बच्ची से मिल पाते हैं.
इससे पहले पिछला साल नवंबर में अरिहा की मां धारा शाह अपनी बच्ची की कस्टडी पाने के लिए गुजरात में बीजेपी ऑफिस के बाहर धरने पर बैठ गई थीं. उनकी मांग है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस मामले में हस्तक्षेप कर उनकी मदद करें. धारा शाह की अपील है कि अब सिर्फ प्रधानमंत्री मोदी ही उनकी मदद कर सकते हैं. धारा का कहना है कि मोदी इस मामले में हस्तक्षेप करें और उनकी बेटी को उन तक पहुंचाने में मदद करें.
मां धारा का कहना है कि उनकी बेटी फिलहाल किसी ईसाई परिवार के पास है और उसने जर्मन भाषा बोलना शुरू कर दिया है. उनका कहना है कि मामले की सुनवाई में सालों लग सकते हैं. लेकिन तब तक उन्हें अरिहा की कस्टडी मिलनी चाहिए या उसे किसी रिश्तेदार को सौंप देना चाहिए.
बता दें कि बेटी अरिहा की कस्टडी की मांग को लेकर उसके माता-पिता जंतर मंतर पर भी प्रदर्शन कर चुके हैं. मामले की अगली सुनवाई पांच मई को है.