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‘महाराष्ट्र-दिल्ली में मात्र 41% हेल्थ वर्कर को मिली दूसरी डोज’, सबको कोरोना वैक्सीन देने की बात पर बोले हर्षवर्धन

देश में 18 साल से ऊपर के सभी लोगों को कोरोना वैक्सीन देने की मांग को लेकर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने बुधवार को नाराजगी जताई. उन्होंने बयान जारी कर कहा कि ये राज्यों की खुद के स्तर पर की गई विफलता को छिपाने की कोशिश है.

स्वास्थ्य मंत्री हर्ष वर्धन (Photo:File) स्वास्थ्य मंत्री हर्ष वर्धन (Photo:File)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • ‘महाराष्ट्र के नेता का बयान भय पैदा करने वाला’
  • महाराष्ट्र में मात्र 86% हेल्थवर्कर्स को पहली डोज
  • टीकाकरण की रूपरेखा राज्यों के साथ बनीः हर्षवर्धन

देश में 18 साल से ऊपर के सभी लोगों को कोरोना वैक्सीन देने की मांग को लेकर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने आज बुधवार को नाराजगी जताई. उन्होंने बयान जारी कर कहा कि ये राज्यों की खुद के स्तर पर की गई विफलता को छिपाने की कोशिश है. साथ ही सवाल किया कि क्या उन्होंने कोरोना के पहले चरण के सभी लाभार्थियों तक वैक्सीन पहुंचा दी है. जानें और क्या कहा स्वास्थ्य मंत्री ने... 

'क्या पहले चरण का लक्ष्य पूरा'
राज्यों की 18 वर्ष से ऊपर सभी को कोरोना वैक्सीन देने की मांग पर हर्षवर्धन ने सवाल किया कि जो राज्य ऐसी मांग कर रहे हैं, उनके बारे में क्या ये मान लिया जाना चाहिए कि उन्होंने अपने राज्य में हेल्थवर्कर्स और फ्रंटलाइन वर्कर्स के बीच अच्छी खासी संख्या में कोरोना वैक्सीनेशन का काम कर लिया है. लेकिन आंकड़े असल में इससे अलग हैं.

'महाराष्ट्र में 86% हेल्थवर्कर्स को पहली डोज'
स्वास्थ्य मंत्री ने अपने बयान में कहा कि पहले चरण में हेल्थवर्कर्स और फ्रंटलाइन वर्कर्स को कोरोना वैक्सीन दी जानी थी. एक अच्छी संख्या में इनका कोरोना वैक्सीनेशन होने के बाद अभी देश में 45 साल से ऊपर के हर व्यक्ति के लिए कोरोना वैक्सीनेशन की सुविधा उपलब्ध है. इसमें भी जो लोग सरकारी अस्पतालों में वैक्सीन लगवा रहे हैं उनके लिए ये मुफ्त है

ऐसे में सवाल ये है कि महाराष्ट्र ने अभी तक 86% हेल्थवर्कर्स को कोरोना वैक्सीन का पहला डोज दिया है जबकि दिल्ली में ये आंकड़ा 72% और पंजाब में 64% है. जबकि देश के 10 राज्य और केंद्रशासित प्रदेश 90% से अधिक के लक्ष्य को पूरा कर चुके हैं.

'पंजाब में 27% हेल्थवर्कर्स को दूसरी डोज'
हर्षवर्धन ने कहा कि कोरोना वैक्सीनेशन की दूसरी डोज के मामले में भी हालात कमोबेश ऐसे ही हैं. महाराष्ट्र और दिल्ली में मात्र 41% हेल्थवर्कर्स को कोरोना वैक्सीन दूसरी डोज मिली है जबकि पंजाब में ये आंकड़ा 27% का है. दूसरी तरफ देश के 12 राज्य और केंद्रशासित प्रदेश 60% के लक्ष्य को पार कर चुके हैं.

'फ्रंटलाइन वर्कर्स के बीच भी ऐसी ही स्थिति'
फ्रंटलाइन वर्कर्स को कोरोना वैक्सीनेशन देने के फ्रंट पर भी इन राज्यों का प्रदर्शन खराब है. महाराष्ट्र में 73% फ्रंटलाइन वर्कर्स को पहली डोज जबकि 41% को दूसरी डोज मिली है. दिल्ली में ये आंकड़ा क्रमश: 71% और 22% है. वहीं पंजाब में क्रमश: 65% फ्रंटलाइन वर्कर्स को पहली डोज और 20% को दूसरी डोज मिली है. जबकि 5 राज्य और केंद्रशासित प्रदेश फ्रंटलाइन वर्कर्स को पहली डोज देने के मामले में 85% और दूसरी डोज देने के मामले में 45% के आंकड़े को पार कर चुके हैं.

'बयान गैर-जिम्मेदराना'
हर्षवर्धन ने कहा कि कुछ राजनीतिक नेताओं और राज्यों की ओर से की जा रही इस तरह की मांग उनके खराब वैक्सीनेशन प्रयासों को दिखाती है. विशेषकर महाराष्ट्र में नेताओं के वैक्सीन की कमी को लेकर आया बयान गैर-जिम्मेदार, लोगों के बीच भय बढ़ाने वाला और राज्य सरकार की विफलताओं से ध्यान भटकाने की कोशिश है.

'टीकाकरण की रूपरेखा राज्यों के साथ बनी'
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने एक बार फिर दोहराया कि भारत में चलाया जा रहा कोरोना वैक्सीनेशन दुनिया का सबसे बड़ा टीकाकरण अभियान है. इसका मुख्य लक्ष्य कोरोना के मरने वालों की संख्या में कमी लाना है. हम ये भी जानते हैं वैक्सीन की आपूर्ति सीमिति है, इसलिए वैक्सीनेशन के लिए जो प्रक्रियाएं तय हुई हैं वह राज्यों के साथ सलाह-मशविरा करके और वैश्विक मानदंडों को ध्यान में रखकर की गई हैं. पिछले कई महीनों से बात सार्वजनिक भी है.

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