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Farmers Protest Live Updates: सरकार से किसान नेताओं की टूटी वार्ता, अब NDA नेताओं का करेंगे घेराव, 21 को दिल्ली कूच, जानिए आगे का प्लान

aajtak.in | नई दिल्ली | 20 फरवरी 2024, 2:46 PM IST

सरकार और प्रदर्शनकारी किसानों के बीच बातचीत का दौर फिलहाल थमता दिख रहा है. किसानों ने MSP पर सरकार का प्रस्ताव अस्वीकार कर दिया है, जिसके बाद अब 21 फरवरी को एक बार फिर शंभू बॉर्डर पर बैठे किसान दिल्ली की तरफ कूच करेंगे.

Farmer Protest Farmer Protest

किसान नेताओं और सरकार के बीच बातचीत एक बार फिर टूट गई है. सरकार ने किसानों के सामने MSP पर कथित रूप से 5 साल के कॉनट्रेक्ट का प्रस्ताव दिया था, जिसे किसानों ने खारिज कर दिया है. सरकार के प्रस्ताव को लेकर शंभू बॉर्डर पर किसानों और सरकार के नुमाइंदों के बीच अहम बैठक हुई, जिसमें सरकार के प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया गया.

अब किसान 21 फरवरी को दिल्ली कूच की तैयारी कर रहे हैं. किसानों का कहना है कि फिलहाल सरकार के साथ कोई मीटिंग नहीं होगी, लेकिन वह बातचीत के लिए हमेशा तैयार हैं. आंदोलन के बीच किसान पंजाब में BJP के तीन बड़े नेताओं का घेराव कर रहे हैं. लेकिन अब किसानों ने पूरे NDA के नेताओं का घेराव करने का ऐलान किया है.

2:46 PM (एक वर्ष पहले)

संयुक्त किसान मोर्चा की बैठक 22 फरवरी को

Posted by :- akshay shrivastava

संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) की बैठक 22 फरवरी को दिल्ली के सुरजीत भवन में होगी. इसमें एसकेएम की सभी यूनियनें भाग लेंगी और किसानों के विरोध पर सामूहिक निर्णय लेंगी. अभी तक पंजाब हरियाणा बॉर्डर पर मौजूद प्रदर्शनकारियों में सभी किसान संगठनों के शामिल होने की कोई योजना नहीं है. एसकेएम हालांकि घटनाक्रम पर करीब से नजर रख रहा है, लेकिन उसका मानना है कि दिल्ली की ओर मार्च करने का यह सही समय नहीं है. पूरी संभावना है कि एसकेएम संबंधित राज्यों में अपने विरोध को मजबूत करने के लिए निर्णय लेगा. एसकेएम का मानना है कि विरोध प्रदर्शन चुनाव से आगे तक जाएगा और इसलिए कोई भी कदम उठाया जाना चाहिए, इस बात को ध्यान में रखते हुए कि प्रदर्शनकारियों को लंबी लड़ाई के लिए तैयार रहना चाहिए.

2:41 PM (एक वर्ष पहले)

इस तरह खुशहाल रहेगा किसान: पंढेर

Posted by :- akshay shrivastava

किसान नेता सरवन सिंह पंढेर ने कहा कि दिल्ली कूच का हमारा कार्यक्रम पहले की तरह रहेगा. कल 11 बजे तक का समय दिया गया है. उसके बाद दिल्ली जाएंगे. अभी तक केंद्र सरकार ने बाकी मांगों पर भी हमें कोई जानकारी नहीं दी गई है. सरकार के पास पहले ही 2 साल का समय था अगर नियत ठीक है तो समय बहुत है अगर नियत ठीक नहीं है तो समय नही है. अभी तक हमारी कोई केंद्र सरकार से बात नहीं हुई है. केंद्र ने जो प्रस्ताव भेजा था, उसमें जितना पैसा खर्च होना है. डेढ़ लाख करोड़ का खर्च इसमें आना था. इतना पैसा सभी 23 फसलों को एमएसपी पर खरीदने पर भी आएगा. पाम ऑयल खरीदने में जो पैसा दिया जा रहा है, उसको MSP पर खर्च किया जाए, उससे हमारा पैसा बाहर नही जाएगा और किसान भी खुशहाल होगा.

2:39 PM (एक वर्ष पहले)

Farmers Protest Live: फिर दोहराई WTO से बाहर निकलने की मांग

Posted by :- akshay shrivastava

किसान नेता सरवन सिंह पंढेर ने कहा कि अब केंद्र का चेहरा बेनकाब हो गया है. विशेषज्ञ कहते हैं अगर एमएसपी का कानून आता है तो सरकार जो आयत पर खर्च करती है, उससे कम पैसे में एमएसपी पर फसल खरीदी जा सकती है. सीटू 50% फार्मूले से आगे बढ़कर किसानों के कर्ज को माफ किया जा सकता है. प्रधानमंत्री को इसका ऐलान करना चाहिए. कहा जाता है कि भाजपा ऐसे दावा करती है कि सबसे मजबूत प्रधानमंत्री हैं. हम ये मान लेते हैं, लेकिन सरकार हमारी मांगे तो माने हम भी मान लेंगे प्रधानमंत्री मजबूत हैं. WTO से खेती के मामले में भारत सरकार बाहर निकले. अंबाला समेत पंजाब के 7 भी सात जिलों में इंटरनेट बंद है. पंजाब सरकार के न चाहते हुए भी क्या केंद्र सरकार इंटरनेट बंद कर सकती है, पंजाब सरकार ये स्पष्ट करे.

2:35 PM (एक वर्ष पहले)

Farmers Protest: विशेष सत्र बुलाए सरकार: किसान नेता पंढेर

Posted by :- akshay shrivastava

किसान नेता सरवन सिंह पंढेर ने कहा कि केंद्र ने जो प्रस्ताव भेजा था उसे हमने रद्द कर दिया है. बहुत सारे विशेषज्ञों ने कहा है कि 5 फसलों के लिए केंद्र सरकार कांट्रेक्ट करेगी. इसमें जो किसान पहले से इसकी खेती कर रहे हैं वो बाहर हो जाएंगे. इसमें 5 साल की सीमा निर्धारित की गई थी, जो ठीक नहीं है. सरकार जो भी करती है, उसके लिए कानून लेकर आती है. इसी कानून के आधार पर लूट को यकीनी बनाती है. इस लूट को एमएसपी कानून के माध्यम से ही रोका जा सकता है, लेकिन कपोरेट घराने इसे लाने नही दे रहे हैं. सरकार चाहे तो इसके लिए विशेष सत्र बुला सकती है. कोई विरोधी दल इसका विरोध नहीं करेगा. मैं सभी विपक्षी दलों से अपील करता हूं की सभी अपना रुख स्पष्ट करें की वो संसद में इसका विरोध नहीं करेंगे.

(इनपुट: कमलजीत संधु)

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11:03 AM (एक वर्ष पहले)

राहुल गांधी बोले- सिर्फ 21 हजार करोड़ का बोझ

Posted by :- akshay shrivastava

MSP को लेकर राहुल गांधी ने ट्वीट किया है. उन्होंने कहा है कि जबसे कांग्रेस ने MSP की कानूनी गारंटी देने का संकल्प लिया है, तबसे बीजेपी के प्रचारतंत्र ने MSP पर झूठ की झड़ी लगा दी है. उन्होंने कहा,'यह बात झूठ है कि MSP की कानूनी गारंटी दे पाना भारत सरकार के बजट में संभव नहीं है. जबकि सच तो यह है कि CRISIL के अनुसार 2022-23 में किसान को MSP देने में सरकार पर 21,000 करोड़ का अतिरिक्त भार आता, जो कुल बजट का मात्र 0.4% है.'

उन्होंने आगे कहा,'जिस देश में 14 लाख करोड़ के बैंक लोन माफ कर दिए गए हों. 1.8 लाख करोड़ कॉर्पोरेट टैक्स में छूट दी गई हो, वहां किसान पर थोड़ा सा खर्च भी इनकी आंखों को क्यों खटक रहा है? MSP की गारंटी से कृषि में निवेश बढ़ेगा, ग्रामीण भारत में डिमांड बढ़ेगी और किसान को अलग-अलग किस्म की फसलें उगाने का भरोसा भी मिलेगा, जो देश की समृद्धि की गारंटी है. जो MSP पर भ्रम फैला रहे हैं, वो डॉ. स्वामीनाथन और उनके सपनों का अपमान कर रहे हैं.  MSP की गारंटी से भारत का किसान, बजट पर बोझ नहीं, GDP ग्रोथ का सूत्रधार बनेगा.'

8:11 AM (एक वर्ष पहले)

दुखद है कि किसानों को सड़कों पर उतरना पड़ा: हरसिमरत कौर

Posted by :- akshay shrivastava

किसानों के विरोध पर शिरोमणि अकाली दल (SAD) सांसद हरसिमरत कौर बादल का कहना है,' यह दुखद है कि किसानों को एक बार फिर सड़कों पर उतरना पड़ा. उन्होंने आगे कहा कि जब आपने सरकार बनाई थी तो पंजाबियों से वादा किया था कि 23 फसलों पर MSP देंगे, चाहे केंद्र सरकार भी ऐसा ही करे. उन्होंने कहा,'मैं किसान संगठनों से कहती हूं कि केंद्र से तो मांग करो, लेकिन राज्य सरकार से भी मांग करते रहना चाहिए.'

7:28 AM (एक वर्ष पहले)

प्रस्ताव में कोई स्पष्टता नहीं: किसान नेता

Posted by :- akshay shrivastava

किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल ने कहा कि सरकार की नीयत में खोट है. सरकार हमारी मांगों पर गंभीर नहीं है. हम चाहते हैं कि सरकार 23 फसलों पर MSP यानी न्यूनतम समर्थन मूल्य का फॉर्मूला तय करे. सरकार के प्रस्ताव से किसानों को कोई लाभ नहीं होने वाला है.डल्लेवाल ने कहा कि हमने तय किया है कि सरकार की ओर से जो प्रस्ताव दिया गया है, उसमें किसी तरह की स्पष्टता नहीं है. सरकार ने जो प्रस्ताव दिया है, उसका नाप-तोल किया जाए तो उसमें कुछ नजर नहीं आ रहा है. हमारी सरकार 1.75 लाख करोड़ रुपये का ताड़ का तेल (Palm Oil) बाहर से खरीदती है लेकिन अगर इतनी धनराशि खेती के लिए तिलहन के लिए तय की जाती तो किसानों को इससे बहुत फायदा होता.

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