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दिल्ली बॉर्डर से किसानों को हटाने की मांग, 16 दिसंबर को सुप्रीम कोर्ट में होगी सुनवाई

याचिका में दिल्ली बॉर्डर से किसानों को हटाने की मांग की गई है. कहा गया है कि लोगों के इकट्ठा होने से कोरोना के संक्रमण का खतरा बढ़ेगा. याचिका में आगे कहा गया कि लोगों को हटाना आवश्यक है, क्योंकि इससे सड़कें ब्लॉक हो रही हैं. इमरजेंसी और मेडिकल सर्विस भी बाधित हो रही है.  

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17 दिनों से जारी है किसानों का आंदोलन (फोटो- PTI) 17 दिनों से जारी है किसानों का आंदोलन (फोटो- PTI)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • दिल्ली बॉर्डर पर किसानों का आंदोलन
  • कृषि कानूनों का विरोध कर रहे हैं किसान
  • याचिका में किसानों को बॉर्डर से हटाने की मांग

कृषि कानूनों के विरोध में दिल्ली बॉर्डर पर हो रहे किसानों के आंदोलन को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है. कोर्ट अब 16 दिसंबर को मामले की सुनवाई करेगा. चीफ जस्टिस एस ए बोबडे, जस्टिस ए एस बोपन्ना और जस्टिस वी रामसुब्रमण्यम की बेंच सुनवाई करेगी. सुप्रीम कोर्ट में किसान आंदोलन से जुड़ी अब तक तीन याचिकाएं दाखिल की गई हैं.

याचिका में दिल्ली बॉर्डर से किसानों को हटाने की मांग की गई है. कहा गया है कि लोगों के इकट्ठा होने से कोरोना के संक्रमण का खतरा बढ़ेगा. याचिका में आगे कहा गया कि लोगों को हटाना आवश्यक है, क्योंकि इससे सड़कें ब्लॉक हो रही हैं. इमरजेंसी और मेडिकल सर्विस भी बाधित हो रही है.  

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याचिका कानून की पढ़ाई कर रहे ऋषभ शर्मा ने दायर की है. अर्जी में आगे कहा गया कि प्रदर्शनकारियों को सरकार द्वारा आवंटित तय स्थान पर स्थानांतरित किया जाना चाहिए. प्रदर्शन के दौरान सोशल डिस्टेंसिंग का पालन और मास्क का इस्तेमाल किया जाना चाहिए. 

बता दें कि दिल्ली बॉर्डर पर कृषि कानूनों के खिलाफ 17 दिन से किसानों का आंदोलन जारी है. कृषि कानूनों की वापसी को लेकर किसान अड़े हैं तो सरकार संशोधन का प्रस्ताव दे रही है. किसान लगातार सरकार के प्रस्ताव को ठुकरा रहे हैं. इस बीच, किसानों ने आंदोलन को और तेज करने की चेतावनी दी है. 14 दिसंबर को यूनियन के नेता सिंघु बॉर्डर पर भूख हड़ताल पर बैठेंगे. 

कृषि कानूनों के खिलाफ भी याचिकाएं

वहीं, कृषि कानूनों के मसले पर सुप्रीम कोर्ट में करीब पांच याचिकाएं दाखिल हैं. इनमें DMK के तिरुचि सिवा, राजद के मनोज झा, छत्तीसगढ़ कांग्रेस के राकेश वैष्णव की याचिकाएं भी शामिल की गई हैं. भारतीय किसान यूनियन (B) की ओर से मामले में अपनी दलीलें देने की इजाजत मांगी गई है. सुप्रीम कोर्ट पहले ही इन याचिकाओं को लेकर केंद्र को नोटिस सौंप चुका है और जवाब तलब किया है. सुप्रीम कोर्ट में दिसंबर के तीसरे हफ्ते में इन याचिकाओं पर सुनवाई हो सकती है. 

 

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