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गोवा SIR: पूर्व नौसेना प्रमुख को नोटिस पर EC की सफाई, कहा- फॉर्म में नहीं थीं जरूरी जानकारियां

चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया कि गोवा में चल रही एसआईआर प्रक्रिया के तहत पूर्व नौसेना प्रमुख एडमिरल अरुण प्रकाश को भेजा गया नोटिस किसी विशेष वजह से नहीं, बल्कि फॉर्म में जरूरी जानकारी अधूरी होने के कारण सिस्टम के जरिए अपने आप जारी हुआ था. आयोग के अनुसार, उनके गणना फॉर्म में पिछली एसआईआर से जुड़ी अनिवार्य जानकारियां भरी नहीं गई थीं, जिससे फॉर्म वोटर लिस्ट से स्वतः लिंक नहीं हो सका और अनमैप्ड कैटेगरी में चला गया.

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EC ने स्पष्ट किया कि नोटिस सिस्टम आधारित प्रक्रिया के तहत अपने आप जारी हुआ था. (Photo: Representational)
EC ने स्पष्ट किया कि नोटिस सिस्टम आधारित प्रक्रिया के तहत अपने आप जारी हुआ था. (Photo: Representational)

चुनाव आयोग ने गोवा में चल रही विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया यानी एसआईआर के तहत पूर्व नौसेना प्रमुख एडमिरल अरुण प्रकाश (रिटायर्ड) को भेजे गए नोटिस को लेकर सोमवार को स्थिति साफ की है. आयोग ने कहा कि उनके फॉर्म में पिछली एसआईआर से जुड़ी जरूरी जानकारियां नहीं भरी गई थीं.

चुनाव आयोग ने अरुण प्रकाश को पहचान सत्यापन के लिए बैठक में बुलाने का नोटिस भेजा था. वह रिटायरमेंट के बाद से गोवा में रह रहे हैं. इस नोटिस को लेकर सोशल मीडिया पर कई लोगों ने चिंता जताई थी. खासतौर पर इसलिए क्योंकि अरुण प्रकाश 1971 के भारत-पाक युद्ध में अपनी भूमिका के लिए वीर चक्र से सम्मानित रह चुके हैं.

सफाई में चुनाव आयोग ने क्या कहा?

सोमवार को जारी बयान में कॉर्टालिम विधानसभा क्षेत्र की निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी डॉक्टर मेडोरा एरमोमिला डीकोस्टा ने कहा कि एसआईआर के दौरान बूथ लेवल अधिकारी ने अरुण प्रकाश से संबंधित फॉर्म कलेक्ट किया था. उन्होंने बताया कि इस फॉर्म में पिछली एसआईआर से जुड़ी अनिवार्य जानकारियां नहीं थीं. इनमें मतदाता का नाम, पहचान पत्र संख्या, रिलेटिव का नाम, विधानसभा क्षेत्र का नाम और नंबर, भाग संख्या और मतदाता सूची में क्रम संख्या शामिल हैं.

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'अनमैप्ड कैटेगरी में चला गया फॉर्म'

डीकोस्टा ने कहा कि इन जरूरी जानकारियों के अभाव में बूथ लेवल अधिकारी की एप्लिकेशन जमा किए गए गणना फॉर्म को मौजूदा वोटर लिस्ट के डेटाबेस से अपने आप नहीं जोड़ पाई. बयान में कहा गया कि पिछली एसआईआर से जुड़े सभी कॉलम खाली छोड़े गए थे. इसी कारण यह फॉर्म सिस्टम की अनमैप्ड कैटेगरी में चला गया.

'अपने आप जारी हुआ नोटिस'

उन्होंने बताया कि बूथ लेवल अधिकारी का सिस्टम तभी फॉर्म को अपने आप जोड़ता है, जब सभी जरूरी जानकारियां सही तरीके से भरी हों. ऐसा होने पर ही मौजूदा वोटर लिस्ट से मिलान संभव होता है. जहां फॉर्म अनमैप्ड रह जाते हैं, वहां एसआईआर प्रक्रिया के तहत सुनवाई के जरिए आगे की जांच जरूरी होती है. डीकोस्टा ने कहा कि तय, सिस्टम आधारित प्रक्रिया के अनुसार ही सुनवाई का नोटिस अपने आप जारी हुआ, ताकि मतदाता का वेरिफिकेशन हो सके.

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