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पहलगाम हमले और OP सिंदूर पर संसद में चर्चा, क्या शशि थरूर को बोलने का मौका देगी कांग्रेस?

संसद में आज से पहलगाम हमले और ऑपरेशन सिंदूर को लेकर चर्चा शुरू होगी. इसी बीच एक सवाल ये भी उठ रहा है कि क्या कांग्रेस इस चर्चा में शशि थरूर को चर्चा में बोलने का मौका देगी, क्योंकि उन्होंने अमेरिका और अन्य देशों के दौरे पर गए एक प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया था, जहां उन्होंने सरकार का समर्थन किया था.

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कांग्रेसी सांसद शशि थरूर. (Photo: ITG)
कांग्रेसी सांसद शशि थरूर. (Photo: ITG)

संसद के मॉनसून सत्र में आज पहलगाम आतंकी हमले और ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा शुरू होगी. इसी बीच एक सवाल ये भी है कि क्या कांग्रेस ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा के लिए अपने नेता शशि थरूर को बोलने की अनुमति देगी, क्योंकि थरूर अमेरिका और अन्य देशों के दौरे पर गए एक प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया था, जिसके बाद से उनकी पार्टी के साथ तनाव की खबरें सामने आईं थीं.

कांग्रेस सूत्रों के अनुसार, शशि थरूर के इस बहस में बोलने की संभावनाएं नहीं हैं.

सूत्रों ने कहा, 'जो सांसद सदन में कुछ मुद्दों पर बोलना चाहते हैं. उन्हें CPP ऑफिस को अपना अनुरोध भेजना होगा. हालांकि, शशि थरूर ने ऑपरेशन सिंदूर पर बोलने के लिए कांग्रेस संसदीय दल (CPP) कार्यालय में कोई अनुरोध नहीं भेजा है.'  यदि शशि थरूर इस चर्चा में शामिल नहीं होते हैं तो इससे कई सवाल उठ सकते हैं. तिरुवनंतपुरम के सांसद का अपनी पार्टी के साथ तनाव चल रहा है, क्योंकि उन्होंने कांग्रेस की लाइन के इतर भारत-पाकिस्तान संघर्ष पर विदेश में सरकार द्वारा गठित प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया था.

सरकार का पक्ष रख सकते हैं ये नेता

सत्तारूढ़ बीजेपी के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) और विपक्षी दलों ने लोकसभा और राज्यसभा में इस चर्चा के लिए अपने शीर्ष नेताओं को उतारने की तैयारी की है. गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और विदेश मंत्री एस. जयशंकर सरकार का पक्ष रखेंगे. हालांकि, अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन संकेत हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इसमें शामिल हो सकते हैं.

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कौन शुरू करेंगे विपक्ष की ओर से चर्चा?

वहीं, विपक्ष की ओर से चर्चा शुरू करने के लिए किसे चुना जाएगा, ये देखना दिलचस्प होगा. हालांकि, राहुल गांधी इसकी शुरुआत कर सकते हैं, लेकिन 2023 के अविश्वास प्रस्ताव के दौरान उन्होंने अपने डिप्टी गौरव गोगोई को मौका दिया था.

आपको बता दें कि सरकार और विपक्ष ने 25 जुलाई को पहलगाम आतंकी हमले और ऑपरेशन सिंदूर पर लोकसभा और राज्यसभा में 16-16 घंटे की चर्चा के लिए सहमति जताई थी. ये चर्चा 22 अप्रैल को हुए पहलगाम हमले पर केंद्रित होगी, जिसमें 26 नागरिकों की जान गई थी. विपक्षी नेता, विशेष रूप से राहुल गांधी, ने खुफिया विफलताओं और भारत के अंतरराष्ट्रीय समर्थन पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भारत-पाकिस्तान के बीच मध्यस्थता के दावों का हवाला दिया है, जिसे सरकार ने खारिज कर दिया है.

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