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'अब बहुत देर हो चुकी है...', मणिपुर पर गृह मंत्रालय की बैठक पर बोलीं ममता बनर्जी

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मणिपुर की स्थिति पर चर्चा के लिए 24 जून को नई दिल्ली में एक सर्वदलीय बैठक बुलाई है. इसमें सभी दलों के नेताओं के पहुंचने की उम्मीद जताई जा रही है. पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस अध्यक्ष ममता बनर्जी ने स्पष्ट किया है कि वह इस बैठक में नहीं जा सकेंगी.

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पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (File Photo)
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (File Photo)

मणिपुर में हिंसक झड़पें थमने का नाम नहीं ले रही हैं. तमाम कोशिशों के बाद राज्य में स्थिति पर काबू नहीं पाया जा सका है. विपक्षी पार्टियां लगातार केंद्र सरकार पर इसको लेकर निशाना साध रही है. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मणिपुर की स्थिति पर चर्चा के लिए 24 जून को नई दिल्ली में एक सर्वदलीय बैठक बुलाई है. इसमें सभी दलों के नेताओं के पहुंचने की उम्मीद जताई जा रही है. 

इस बीच अब पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस अध्यक्ष ममता बनर्जी ने स्पष्ट किया है कि वह इस बैठक में नहीं जा सकेंगी. उनकी जगह बैठक में पार्टी के राज्यसभा सांसद डेरेक ओ ब्रायन शामिल होंगे. सीएम ममता ने इस पर बयान देते हुए कहा कि अब बहुत देर हो चुकी है. मैंने एक पत्र लिखा था कि मैं मणिपुर जाना चाहती हूं, मुझे कल ही सर्वदलीय बैठक बुलाए जाने के बाद जवाब मिला. मैं बैठक के लिए डेरेक ओ ब्रायन को भेजूंगी.

ममता बनर्जी ने मणिपुर की तुलना कश्मीर से करते हुए कहा कि स्थिति को नियंत्रित करने में सरकार पूरी तरह फेल है. हम बैठक में शामिल होंगे. अमित शाह द्वारा बुलाई गई बैठक में डेरेक जाएंगे. पहले वे (केंद्र सरकार) मणिपुर में शांति लाएं, फिर हमसे राजनीतिक लड़ाई लड़ें. पहले वे मणिपुर में शांति बहाल करें और फिर विपक्ष से लड़ने के बारे में सोचें.

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विपक्ष लगातार कर रहा था सर्वदलीय बैठक की मांग

मणिपुर के हालातों को लेकर कांग्रेस लगातार केंद्र सरकार से कह रही थी कि समान विचारधारा वाली 10 पार्टियां 10 जून से मणिपुर हिंसा के मामले में प्रधानमंत्री से मिलना चाह रही हैं. उधर, सीपीआई के राष्ट्रीय महासचिव व पूर्व सांसद डी राजा ने कहा था कि मणिपुर के मुख्यमंत्री अक्षम हो गए हैं. वहां के लोगों का भरोसा उठ गया है.

3 मई से मणिपुर में हो रही झड़पें

बता दें कि मेइतेई समुदाय की अनुसूचित जनजाति (एसटी) दर्जे की मांग के विरोध में 3 मई को पहाड़ी जिलों में 'आदिवासी एकजुटता मार्च' आयोजित किए जाने के बाद मणिपुर में हिंसक झड़पें हुईं. इसके बाद से स्थिति बिगड़ती चली गई. अब तक करीब 120 लोगों की जान जा चुकी है और 3,000 से ज्यादा लोग घायल हैं.

कैसे हैं मणिपुर के हालात?

मणिपुर में हिंसा इस कदर बढ़ चुकी है कि हाल ही में भीड़ ने केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री आरके रंजन का घर तक फूंक डाला था. शांति बहाल करने के लिए कई बार प्रयास किए जा चुके हैं लेकिन हालात सुधरने का नाम नहीं ले रहे हैं. केंद्रीय सशस्त्र बल की 84 कंपनियों को राज्य में तैनात किया गया है, असम राइफल्स के भी 10 हजार से ज्यादा जवान तैनात हैं, लेकिन सड़कों पर भारी सैन्य बल होने के बाद भी स्थिति बिगड़ती जा रही है.

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