कोरोना महामारी से लड़ाई के दौरान हमने कई स्तर पर इस मुसीबत का सामना किया. इससे हमारी लाइफ स्टाइल (life style) और हेल्थ (health) पर बुरा असर पड़ा है. जान पर बन आई तो हर चेहरे पर मास्क और जेब में सेनेटाइजर तो आ गया. लेकिन इस उलझन के बीच कहीं न कहीं हम बच्चों की ठीक तरह से देखभाल नहीं कर सके. लिहाजा उनकी हेल्थ पर असर पड़ने लगा. स्कूल बंद होने, किसी तरह की फिजिकल एक्टिविटी न होने, सोने का सिस्टम बिगड़ने से बच्चों को भी बीमारियों ने घेरना शुरू कर दिया. लिहाजा उन्हें मोटापा जैसी खतरनाक समस्या होने लगी.
सर गंगा राम अस्पताल के मिनिमल एक्सेस, मेटाबोलिक और बेरिएट्रिक सर्जरी संस्थान के अध्यक्ष डॉ. सुधीर कल्हन के अनुसार "हमने 1 अक्टूबर से 31 अक्टूबर तक 1309 बच्चों के बीच एक सर्वेक्षण किया, इसमें उन्हें शामिल किया, जिन्हें कोरोना संकट के कारण घर बैठने के लिए मजबूर होना पड़ा था. इस दौरान चौंकाने वाले नतीजे मिले. हमने अपने सर्वे में पाया कि 60 फीसदी यानी 785 बच्चों का लगभग 10 % वजन बढ़ा था."
डॉ. कल्हन ने बताया कि जिन लोगों के बीच सर्वे किया गया था. उनमें से 36.8% ने बताया कि फिजिकल एक्टिविटी नहीं हो रही है. इसके चलते वजन बढ़ गया है. जबकि 27.55% ने देर से सोने को वजन बढ़ने का कारण बताया. वहीं 22.4% ने कहा कि अधिक खाना खाने की वजह से ऐसा हुआ है. हमने बीते समय में कोरोना के कारण कई संकट झेले हैं. इसका सबसे ज्यादा बुरा असर हमारी हेल्थ पर ही हुआ है.
सर्वे के दौरान 60% से अधिक लोगों ने कहा कि उनके बच्चों का वजन 10% से अधिक बढ़ गया है. अधिकांश ने इसे फास्ट फूड को वजह बताया. इसके साथ ही गतिहीन जीवन शैली भी इसकी एक बड़ी वजह है. इसके साथ ही लोगों का कहना है कि कोरोना संक्रमण की वजह से खानपान में विकार और असामान्य नींद भी मोटापा बढ़ाने में सहायक है.