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महिला आरक्षण लागू करने की तैयारी तेज, सांसदों को मिला संविधान संशोधन विधेयक

महिला आरक्षण को लेकर बड़ा कदम उठाते हुए सरकार ने संविधान संशोधन विधेयक की प्रति सांसदों को सौंप दी है. इसके साथ ही परिसीमन आयोग के गठन का रास्ता भी साफ करने की तैयारी है. इस पहल का मकसद लोकसभा और विधानसभा में 33 फीसदी महिला आरक्षण लागू करना है.

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संसद में जल्द आएगा महिला आरक्षण बिल, लोकसभा सीटें 815 तक बढ़ाने की तैयारी. (File Photo: ITG)
संसद में जल्द आएगा महिला आरक्षण बिल, लोकसभा सीटें 815 तक बढ़ाने की तैयारी. (File Photo: ITG)

महिला आरक्षण को लेकर केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. संविधान संशोधन विधेयक की प्रति सांसदों को दे दी गई है, जिसके जरिए लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को एक-तिहाई यानी 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करने की दिशा में प्रक्रिया तेज हो गई है. इस पूरे पैकेज के तहत तीन अहम विधेयक लाए जा रहे हैं. 

इनमें एक विधेयक परिसीमन आयोग के गठन से जुड़ा है, जिसका उद्देश्य सीटों और चुनावी क्षेत्रों की सीमाओं का नए सिरे से निर्धारण करना है. इसको कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल संसद में पेश करेंगे. इसके जरिए संविधान के कुछ अनुच्छेदों में संशोधन किया जाएगा, ताकि सीटों का बंटवारा मौजूदा जनसंख्या के आधार पर हो सके.

दरअसल, अभी लोकसभा और विधानसभा सीटों का निर्धारण 1971 की जनगणना के आधार पर है, जबकि देश की आबादी और सामाजिक-राजनीतिक परिस्थितियां बदल चुकी हैं. विधेयक में लोकसभा सदस्यों की संख्या बढ़ाकर 815 करने का प्रावधान रखा गया है. केंद्र शासित प्रदेशों के लिए 35 तक सीटें निर्धारित की जा सकती हैं.

केंद्र सरकार का कहना है कि लंबे समय से सीटों के पुनर्गठन पर रोक लगी हुई थी. इस विधेयक के जरिए वह रोक हटेगी और नए सिरे से परिसीमन की प्रक्रिया शुरू हो सकेगी. प्रस्तावित कानून के अनुसार, नवीनतम जनगणना के आंकड़ों के आधार पर परिसीमन होगा. इसके बाद ही महिला आरक्षण को लागू किया जा सकेगा.

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इसका मतलब है कि सीटों का नया बंटवारा और चुनावी क्षेत्रों की सीमाएं वर्तमान जनसंख्या के अनुसार तय होंगी, ताकि हर क्षेत्र में प्रतिनिधित्व का संतुलन हो सके. विधेयक में यह भी प्रावधान है कि महिला आरक्षण 15 वर्षों की अवधि तक लागू रहेगा. इसके साथ ही आरक्षित सीटों को रोटेशन के आधार पर बदला जाएगा.

इससे अलग-अलग क्षेत्रों की महिलाओं को प्रतिनिधित्व का अवसर मिल सकेगा. इस आरक्षण में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की महिलाओं के लिए भी सीटें शामिल होंगी. विधेयक में परिसीमन आयोग बनाने का भी प्रावधान किया गया है. इस आयोग की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त या कार्यरत न्यायाधीश करेंगे.

आयोग में मुख्य चुनाव आयुक्त या उनके द्वारा नामित चुनाव आयुक्त और संबंधित राज्यों के राज्य चुनाव आयुक्त भी सदस्य होंगे. परिसीमन आयोग अपने प्रस्तावों को सार्वजनिक करेगा. इसके साथ ही जनता से आपत्तियां और सुझाव भी आमंत्रित करेगा. इन पर विचार करने के बाद अंतिम फैसला लिया जाएगा.

जब यह निर्णय गजट में प्रकाशित हो जाएगा, तब वह प्रभावी माना जाएगा. इसके बाद होने वाले चुनाव नए परिसीमन के आधार पर कराए जाएंगे. इस पूरे विधायी पैकेज का मकसद केवल महिला आरक्षण लागू करना ही नहीं, बल्कि देश में संसदीय और विधानसभा क्षेत्रों का संतुलित पुनर्गठन करना भी है.

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