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राष्ट्रपति भवन में लुटियंस की जगह अब लगी राजाजी की मूर्ति... आर्किटेक्ट के परपोते ने जताया अफसोस

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्रपति भवन में स्वतंत्र भारत के पहले भारतीय गवर्नर-जनरल चक्रवर्ती राजगोपालाचारी की प्रतिमा का अनावरण किया. यह ब्रिटिश वास्तुकार एडविन लुटियंस की प्रतिमा की जगह लगाई गई है और इसे औपनिवेशिक प्रतीकों से आगे बढ़ने की पहल बताया गया. अशोक मंडप के पास ग्रैंड ओपन स्टेयरकेस क्षेत्र में स्थापित यह प्रतिमा महात्मा गांधी की प्रतिमा के सामने है.

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यह प्रतिमा ब्रिटिश आर्किटेक्ट एडविन लुटियंस की प्रतिमा की जगह स्थापित की गई है. (File Photo: PTI)
यह प्रतिमा ब्रिटिश आर्किटेक्ट एडविन लुटियंस की प्रतिमा की जगह स्थापित की गई है. (File Photo: PTI)

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने रविवार को राष्ट्रपति भवन में स्वतंत्र भारत के पहले और एकमात्र भारतीय गवर्नर-जनरल चक्रवर्ती राजगोपालाचारी (राजाजी) की प्रतिमा का अनावरण किया. यह प्रतिमा ब्रिटिश आर्किटेक्ट एडविन लुटियंस की प्रतिमा की जगह स्थापित की गई है, जिसे सरकार ने औपनिवेशिक प्रतीकों से आगे बढ़ने की व्यापक पहल का हिस्सा बताया.

राजगोपालाचारी की प्रतिमा राष्ट्रपति भवन के अशोक मंडप के पास ग्रैंड ओपन स्टेयरकेस क्षेत्र में लगाई गई है, जो महात्मा गांधी की प्रतिमा के सामने स्थित है. इस बदलाव को राष्ट्रपति परिसर में भारतीय व्यक्तित्वों और परंपराओं को प्रमुखता देने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है.

'राजाजी ने लगाई थी रामकृष्ण परमहंस और गांधी की तस्वीर'

अनावरण समारोह राष्ट्रपति भवन में आयोजित ‘राजाजी उत्सव’ के दौरान हुआ, जिसमें उपराष्ट्रपति सी पी राधाकृष्णन और कई केंद्रीय मंत्री मौजूद रहे. अपने संबोधन में राष्ट्रपति मुर्मू ने राजगोपालाचारी की भूमिका को भारत के 'मानसिक उपनिवेशवाद से मुक्ति' की प्रक्रिया से जोड़ा. उन्होंने याद किया कि स्वतंत्रता के बाद जब राजाजी गवर्नमेंट हाउस में रहने आए थे, तब उन्होंने अपने कमरे में रामकृष्ण परमहंस और महात्मा गांधी के चित्र लगाए थे.

राष्ट्रपति ने यह भी बताया कि राष्ट्रपति भवन में हाल के वर्षों में कई बदलाव हुए हैं, जैसे ब्रिटिश अधिकारियों के चित्रों की जगह परमवीर चक्र विजेताओं के चित्र लगाना और भवन के कई हिस्सों को आम जनता के लिए खोलना. उन्होंने कहा कि कानून, राजनीति, सामाजिक सुधार और साहित्य के क्षेत्र में राजगोपालाचारी का बहुआयामी जीवन 2047 तक 'विकसित भारत' की यात्रा को प्रेरित करता है.

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'जहां पहले लुटियंस की प्रतिमा थी वहां आज...'

कार्यक्रम में पढ़े गए प्रधानमंत्री के संदेश में कहा गया कि जहां पहले लुटियंस की प्रतिमा थी, वहां राजगोपालाचारी की प्रतिमा स्थापित करना मानसिक उपनिवेशवाद से मुक्ति का महत्वपूर्ण कदम है और आज राष्ट्रपति भवन भारतीय सभ्यता में निहित लोकतांत्रिक आत्मविश्वास का प्रतीक है.

लुटियंस के परपोते ने जताया दुख

हालांकि इस बदलाव पर लुटियंस के परपोते और ब्रिटिश विज्ञान लेखक मैट रिडले ने दुख जताया. उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि उन्हें यह जानकर अफसोस हुआ कि नई दिल्ली में उनके परदादा द्वारा डिजाइन किए गए राष्ट्रपति भवन से उनकी प्रतिमा हटा दी गई है. उन्होंने यह भी कहा कि पिछले वर्ष उन्होंने देखा था कि लुटियंस का नाम पहले ही आधार पट्टिका से हटा दिया गया था. सरकार ने बताया है कि राजाजी उत्सव के तहत राजगोपालाचारी के जीवन और कार्यों पर एक प्रदर्शनी अमृत उद्यान में 24 फरवरी से 1 मार्च तक आयोजित की जाएगी.

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