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सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद आया CBI का जवाब, खुद को दिए 100 में से 70 अंक, जानें क्यों?

CBI के निदेशक सुबोध कुमार जायसवाल ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि पिछले 10 सालों में एजेंसी दोष सिद्धि करने में लगभग 65 से 70 प्रतिशत की सफलता दर बनाए रखने में सक्षम रही है. दरअसल, केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की कार्यशैली पर नाराजगी जाहिर करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने उससे उसकी सफलता दर की रिपोर्ट मांगी थी, जिसके जवाब में जायसवाल ने जवाबी हलफनामा दिया है.

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CBI's Response in Supreme Court
CBI's Response in Supreme Court
स्टोरी हाइलाइट्स
  • कोर्ट में CBI ने खुद को दिए सौ में सत्तर अंक
  • CBI की कार्यशैली पर SC ने जताई थी नाराजगी

बीते माह सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर से केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की कार्यशैली पर नाराजगी जाहिर की थी और एजेंसी से सफलता दर की रिपोर्ट मांगी थी. इसको लेकर सीबीआई के निदेशक सुबोध कुमार जायसवाल ने अपने जवाबी हलफनामे में सुप्रीम कोर्ट को बताया कि पिछले 10 सालों में एजेंसी दोष सिद्ध करने में लगभग 65 से 70 प्रतिशत की सफलता दर बनाए रखने में सक्षम रही है.

उन्होंने कहा कि सीबीआई लगातार अपनी कार्यशैली और जांच के आधुनिकतम और सटीक तकनीक में सुधार करने की कोशिश कर रही है. अगस्त 2022 तक दोष सिद्ध, समुचित सजा दिलाने सहित अपने लक्ष्य को पाने में कामयाबी का यह औसत 75 प्रतिशत तक हो जाएगा. 

इसमें कहा गया कि विभिन्न कारणों से केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) 30 से 35 फीसद मामलों में दोषियों को सजा नहीं दिलवा पाया. लेकिन कुल दर्ज हुई एफआईआर का सफलता ग्राफ देखें तो 65 से 70 फीसद मामलों में आरोपियों पर दोष सिद्ध हुआ और उनको सजा भी मिली.अधिकतर बड़े और चर्चित मामलों में सीबीआई कामयाब हुई है. 

अपना व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करते हुए जायसवाल ने सुप्रीम कोर्ट को जानकारी दी कि सीबीआई ने 2020 और 2019 में 69.83 प्रतिशत और 69.19 प्रतिशत मामलों में आरोपियों को दोषी ठहराया. प्रमुख जांच एजेंसी के कामकाज पर कई महत्वपूर्ण आंकड़े देते हुए निदेशक के हलफनामे में कहा गया है कि सीबीआई की कोशिश अगस्त 2022 तक वर्तमान दोषसिद्धि दर को 75 प्रतिशत तक लाने का है.

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हलफनामा 3 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट द्वारा पूछे गए सवालों के जवाब में दायर किया गया था. जस्टिस एमएम सुंदरेश की पीठ ने सीबीआई से पूरे देश में एजेंसी द्वारा मुकदमा चलाए जा रहे मामलों और उनकी सफलता दर पर डेटा जमा करने के लिए कहा था. सीबीआई के हलफनामे में बताया गया है कि 31 दिसंबर, 2020 तक सीबीआई के 9,757 मामले लंबित थे. इनमें से एक तिहाई (3,249) मामले 10 से अधिक वर्षों से लंबित थे. 20 साल बाद भी 500 मामले सुनवाई के चरण में हैं.
 

 

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