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कैंची से काट दी नवजात की उंगली..., अस्पताल में ड्रिप बदलते हुए नर्स से हुई गलती

बेंगलुरु के इंदिरानगर स्थित एक निजी अस्पताल में छह महीने के शिशु की उंगली इलाज के दौरान कट जाने का मामला सामने आया है. परिजनों ने इसे गंभीर लापरवाही बताते हुए शिकायत दर्ज कराई है. आरोप है कि ड्रिप हटाते समय कैंची लगने से बच्चे की छोटी उंगली आंशिक रूप से अलग हो गई. पुलिस ने तीन स्टाफ सदस्यों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है.

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अस्पताल में कैंची से काट दी नवजात की उंगली  (Photo: representational image)
अस्पताल में कैंची से काट दी नवजात की उंगली (Photo: representational image)

कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु से कथित चिकित्सीय लापरवाही का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है. इंदिरानगर स्थित चिन्मया अस्पताल में इलाज के दौरान छह महीने के एक शिशु की उंगली आंशिक रूप से कट जाने का आरोप लगा है. परिजनों की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है.

शिशु की मां प्रियदर्शिनी के मुताबिक, उनके बच्चे को 19 फरवरी को बुखार और खांसी की शिकायत के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था. डॉक्टरों ने स्थिति को देखते हुए भर्ती रहने की सलाह दी थी. कई दिनों तक उपचार चलने के बाद अस्पताल प्रशासन ने बच्चे को छुट्टी दे दी.

मां का आरोप है कि डिस्चार्ज की औपचारिकताएं पूरी करने और बिल चुकाने के बाद बच्चे को एक इंजेक्शन दिया गया. करीब आधे घंटे बाद जब नर्स ड्रिप और ड्रेसिंग हटाने आई, उसी दौरान कैंची का इस्तेमाल करते समय बच्चे के बाएं हाथ की छोटी उंगली गंभीर रूप से कट गई. परिजनों का कहना है कि उंगली नीचे से अलग हो गई थी.

प्रियदर्शिनी ने बताया कि घटना दोपहर करीब 3:30 बजे की है. उस समय वह अस्पताल के प्रवेश द्वार के पास थीं. उनका आरोप है कि उन्हें काफी देर तक इंतजार करने को कहा गया और आश्वस्त किया गया कि सब ठीक है. बाद में बच्चे की स्थिति बिगड़ने पर उसे आईसीयू में रखा गया, जहां उसका इलाज जारी है.

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परिजनों का यह भी कहना है कि अस्पताल ने बिल में किसी प्रकार की राहत नहीं दी और पूरी राशि वसूल की. घटना से आक्रोशित परिवार ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर तीन अस्पताल कर्मियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है. पुलिस ने अस्पताल प्रशासन से संबंधित दस्तावेज और सीसीटीवी फुटेज मांगे हैं. अधिकारियों का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच की जाएगी और यदि लापरवाही सिद्ध होती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी. इस घटना के बाद निजी अस्पतालों में उपचार के दौरान सुरक्षा मानकों को लेकर सवाल उठने लगे हैं. फिलहाल शिशु की हालत पर नजर रखी जा रही है और जांच रिपोर्ट का इंतजार है.
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