
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार को दिल्ली में एक हाई लेवल मीटिंग में देश में संभावित बाढ़ और हीट वेव से निपटने की तैयारियों की समीक्षा की. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में हमें 'जीरो कैजुअल्टी डिजास्टर मैनेजमेंट' के लिए काम करना होगा.
मीटिंग में देश के हर राज्य में बाढ़ संकट प्रबंधन टीमों (FCMT) के गठन, हीटवेव से कृषि क्षेत्र को होने वाले नुकसान को न्यूनतम रखने और मौसम संबंधी योजनाओं को जमीनी स्तर तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने पर फोकस किया गया.
इसके साथ ही भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) और सेंट्रल वाटर कमीशन के मौसम और बाढ़ संबंधी पूर्वानुमान के समय को 3 दिन से बढ़ाकर 7 दिन करने की बात भी कही गई.

एनडीएमए के दिशानिर्देशों का पालन
गृह मंत्रालय की ओर से कहा गया कि आपदाओं को लेकर नेशनल डिज़ास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी (NDMA) द्वारा जारी दिशानिर्देशों के पालन की राज्य, जिला और नगरपालिका स्तर पर नियमित समीक्षा की जानी चाहिए.
जल संचय और चेक डैम परियोजनाओं के जरिए जलस्तर सुधारने और जल संरक्षण की संभावनाओं को बढ़ाने पर जोर दिया गया. इसके अलावा कैम्पा फंड का इस्तेमाल पर्यावरण संतुलन के लिए किए जा रहे प्रयासों को और प्रभावी बनाने के लिए कहा गया है.
साथ ही, कम से कम 60 जोखिम वाली झीलों के लिए पूर्व चेतावनी प्रणाली विकसित करने की योजना पर काम करने के निर्देश दिए हैं. सभी राज्यों में स्टेट-लेवल इंटीग्रेटेड रिज़र्वॉयर ऑपरेशंस लागू करने पर भी जोर दिया गया. मौसम संबंधी पूर्वानुमानों और चेतावनियों का व्यापक और प्रभावी प्रचार-प्रसार की बात भी कही गई.