केरलम (केरल) से एक ऐसी खबर आई है जिसने घर में पक्षी पालने वालों और नॉन-वेज के शौकीनों की चिंता बढ़ा दी है. राज्य के दो बड़े जिलों, अलाप्पुझा और कोझिकोड में खतरनाक बर्ड फ्लू (H5N1) की पुष्टि हो गई है. मामला कितना गंभीर है, इसका अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि सरकार ने तुरंत एक्शन लेते हुए 20,000 से ज्यादा घरेलू पक्षियों को मारने का आदेश दे दिया है. गुरुवार को जब लैब की रिपोर्ट आई, तो प्रशासन की चिंता बढ़ गई और उन्होंने तुरंत हाई अलर्ट जारी कर दिया.
सबसे पहले बात करते हैं अलाप्पुझा की, जहां के मुहम्मा ग्राम पंचायत में इस वायरस के मामले सामने आए हैं. न्यूज एजेंसी पीटीआई (PTI) के मुताबिक, यहां के वार्ड नंबर 7 में जैसे ही संक्रमण का पता चला, जिला कलेक्टर इनबासेकर कालिमुथु ने तुरंत एक जरूरी मीटिंग बुला ली. इसमें यह तय हुआ है कि जहां-जहां संक्रमण मिला है, उसके एक किलोमीटर के दायरे में आने वाले 5,961 घरेलू पक्षियों को खत्म किया जाएगा. इसमें मुर्गियों के साथ-साथ बत्तख और अन्य पाले गए पक्षी भी शामिल हैं. यह काम 21 मार्च की सुबह से ही शुरू हो जाएगा, ताकि यह बीमारी और आगे न फैले.
वहीं कोझिकोड जिले का हाल तो और भी बुरा दिख रहा है. यहां के ओलावन्ना, कक्कोडी और पेरुमन्ना जैसी कई पंचायतों में बर्ड फ्लू के लक्षण मिले हैं. जिला कलेक्टर स्नेहल कुमार सिंह के अनुसार, अकेले कोझिकोड में ही 14,228 घरेलू पक्षियों को मारना पड़ेगा. भोपाल की बड़ी लैब (NIHSAD) से आई रिपोर्ट ने यह पक्का कर दिया है कि यह वही खतरनाक वायरस है जो पक्षियों की जान ले रहा है. राहत की बात बस इतनी है कि अभी तक इंसानों में इसका कोई मामला सामने नहीं आया है, लेकिन खतरा अभी टला नहीं है.
प्रशासन ने जारी की ये जरूरी गाइडलाइंस
प्रशासन ने साफ कह दिया है कि प्रभावित इलाकों में अगले आदेश तक मुर्गी, अंडे और मांस की बिक्री पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है. न तो आप इन्हें बेच सकते हैं और न ही एक जगह से दूसरी जगह ले जा सकते हैं. अगर आपको अपने आसपास कहीं भी अचानक बहुत सारे पक्षी मरे हुए दिखें, तो उन्हें हाथ लगाने की गलती बिल्कुल मत करना. तुरंत सरकारी अस्पताल या पशु विभाग को फोन मिलाओ.
डॉक्टरों और एक्सपर्ट्स ने एक बड़ी राहत की बात भी बताई है. उन्होंने कहा है कि अगर आप मांस को 70 डिग्री सेल्सियस पर कम से कम 3 से 5 मिनट तक खूब अच्छे से पकाते हैं, तो यह वायरस मर जाता है. यानी कच्चा या अधपका मांस और अंडा खाना फिलहाल रिस्की हो सकता है. इसके अलावा, जो लोग घर में पक्षी पालते हैं, उन्हें सलाह दी गई है कि वे मरे हुए पक्षियों को गहरा गड्ढा खोदकर, उसमें चूना और ब्लीचिंग पाउडर डालकर ही दफनाएं ताकि संक्रमण मिट्टी में न फैले.
कोझिकोड में लोगों की मदद के लिए एक कंट्रोल रूम भी बना दिया गया है. सरकार की कोशिश यही है कि इस बीमारी को इन्हीं दो जिलों तक सीमित रखा जाए और यह पड़ोसी राज्यों तक न पहुंचे. फिलहाल तो केरलम के इन इलाकों में सन्नाटा है और घर में पक्षी पालने वाले लोग भारी नुकसान के डर से परेशान हैं. देखना होगा कि 21 मार्च से शुरू होने वाले इस सफाई अभियान के बाद हालात कितने सुधरते हैं.