संसद के बजट सत्र में शुक्रवार प्रश्नकाल के दौरान, कृषि मंत्रालय ने एमएसपी (MSP) को लेकर अहम जानकारी दी. कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने स्पष्ट किया है कि प्रधानमंत्री ने एमएसपी को पारदर्शी बनाने के लिए, एक समिति बनाने की घोषणा की है.
कृषि मंत्री ने यह भी कहा कि किसान किसी भी फसल को पैदा करता है, तो उसका वाजिब दाम किसान को मिलना चाहिए. इसके लिए सरकार प्रतिबद्ध है. खरीद की व्यवस्था भी है. गेहूं और धान पहले से अधिक मात्रा में खरीदा जा रहा है, दलहन और तिलहन को भी खरीदा जा रहा है. साथ ही, मोटे अनाज को भी कोई राज्य अगर पीडीएस में शामिल करके, अपने उपभोग्ताओं को बांटना चाहता है और वह केंद्र सरकार से इसका अनुरोध करता है, तो केंद्र सरकार इसकी इजाज़त देती है.
लागत पर 50% मुनाफा जोड़कर दी जा रही है MSP
MSP पर उन्होंने कहा कि कुल मिलाकर लागत पर 50 प्रतिशत मुनाफा जोड़कर एमएसपी घोषित करने का फैसला सरकार ने किया था, जिसका फायदा पूरे देश के किसानों को मिल रहा है. एमएसपी पर दाम मिलना एक पक्ष है, सरकार की कोशिश है कि किसानों की चौतरफा मदद की जाए, इसलिए पीएम किसान योजना, 1 लाख करोड़ रुपए के इंफ्रास्ट्रक्चर फंड जैसे प्रावधान किए गए हैं. ऐसा इसलिए किया गया है, ताकि जिस इंफ्रास्ट्रक्चर की ज़रूरत किसान को है वह उसे गांव में लें, जिससे वह नुक्सान से बच सकें.
पिछले 7 सालों से एमएसपी पर मिल रहे हैं दोगने दाम
कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने स्पष्ट किया कि 2018-19 से पहले ऐसा कोई प्रावधान नहीं था कि एमएसपी को किसानों के लिए लाभकारी बनाया जाए. स्वामीनाथन समिति की अनुशंसा में भी 14-15 अनुशंसाएं ऐसी थीं जिन्हें जीओएम ने उपयुक्त नहीं पाया था. एक अनुसंशा यह भी थी कि एमएसपी पर 50 प्रतिशत मुनाफा जोड़कर घोषित किया जाए, तब इसे नहीं माना गया था. लेकिन प्रधानमंत्री ने 2018-19 में इसे स्वीकार किया और एमएसपी अब बढ़कर मिल रही है. एमएसपी सरकार का प्रशासिक निर्णय है. पिछले 7 सालों से एमएसपी पर पहले से दुगने दाम दिए गए हैं. बजट में भी 2 लाख 37 हजार करोड़ रुपए किसानों को लाभकारी मूल्य क् लिए दिए जाने का प्रावधान भी है.
एमएसपी को पारदर्शी बनाने के लिए समिति बनाने की घोषणा
उन्होंने कहा कि जहां तक गारंटी कानून का सवाल है, तो प्रधानमंत्री ने क्रॉप डाइवर्सिफिकेशन, नेचुरल फार्मिंग और एमएसपी को पारदर्शी बनाने के लिए, एक समिति बनाने की घोषणा की है. किसान, अर्थशास्त्री, वैज्ञानिक, राज्यों के प्रतिनिधि इस समिति का हिस्सा होंगे. चुनाव समाप्त हो जाने के बाद, इस समिति के गठन की प्रक्रिया पूरी की जाएगी. यह कमेटी जो रिकमेंडेशन करेगी, उसपर सरकार विचार करेगी. कृषि मंत्री ने राज्यसभा में यह जानकारी ओडिशा से बीजेडी सांसद प्रसन्न आचार्य के सवाल के जवाब में दी.