देश में न्यायपालिका को लेकर आने वाली शिकायतों को लेकर सरकार ने लोकसभा में बड़ा आंकड़ा पेश किया है. कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने लिखित जवाब में बताया कि 2016 से 2025 के बीच मौजूदा जजों के खिलाफ कुल 8639 शिकायतें चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) के दफ्तर को मिली हैं.
सरकार के मुताबिक सबसे ज्यादा शिकायतें साल 2024 में आईं, जब जजों के खिलाफ 1170 शिकायतें दर्ज की गईं.
कानून मंत्री ने साफ किया कि हाई कोर्ट के जजों और चीफ जस्टिस के खिलाफ आने वाली शिकायतों पर कार्रवाई न्यायपालिका के भीतर मौजूद इन-हाउस मैकेनिज्म के तहत की जाती है. यानी इन मामलों को सरकार नहीं बल्कि न्यायपालिका खुद देखती है.
उन्होंने बताया कि मई 1997 में सुप्रीम कोर्ट ने दो अहम प्रस्ताव पास किए थे. पहला रेस्टेटमेंट ऑफ वैल्यूज ऑफ ज्यूडिशियल लाइफ, जिसमें जजों के लिए आचरण के मानक तय किए गए. दूसरा इन-हाउस प्रोसीजर, जिसके तहत उन जजों के खिलाफ उपयुक्त कदम उठाए जाते हैं जो इन मानकों का पालन नहीं करते.
प्रक्रिया के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट के जजों और हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस के खिलाफ शिकायतें सीधे CJI को भेजी जाती हैं. वहीं हाई कोर्ट के जजों के खिलाफ शिकायतों को संबंधित हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस देखते हैं.
सरकार ने यह भी बताया कि CPGRAMS (सेंट्रलाइज्ड पब्लिक ग्रीवेंस रिड्रेस एंड मॉनिटरिंग सिस्टम) या किसी अन्य माध्यम से मिलने वाली शिकायतों को भी संबंधित प्राधिकरण यानी CJI या संबंधित हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस को भेज दिया जाता है.