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कल्याण-डोंबिवली मेयर रेस में बड़ा मोड़, ठाकरे गुट के तीन नगरसेवकों की शिंदे सेना में एंट्री

मेयर पद की रेस के बीच कल्याण-डोंबिवली नगर निगम में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है. बहुमत के खेल में ठाकरे गुट के तीन नगरसेवकों की टूट ने समीकरण बदल दिए हैं. सूत्रों के मुताबिक, उद्धव ठाकरे गुट के तीन नगरसेवकों को एकनाथ शिंदे की शिवसेना ने अपने पाले में कर लिया है. ये घटनाक्रम उस वक्त सामने आया है, जब नगर निगम में मेयर की कुर्सी के लिए जोड़-तोड़ तेज हो गई है.

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Mumbai Mahanagar Palika: मेयर चुनाव से पहले बड़ा उलटफेर
Mumbai Mahanagar Palika: मेयर चुनाव से पहले बड़ा उलटफेर

मुंबई में मेयर पद को लेकर चल रही खींचतान के बीच कल्याण-डोंबिवली नगर निगम में भी बड़ा सियासी उलटफेर देखने को मिल रहा है. सूत्रों के मुताबिक, उद्धव ठाकरे गुट के तीन नगरसेवकों को एकनाथ शिंदे की शिवसेना ने अपने पाले में कर लिया है. ये घटनाक्रम उस वक्त सामने आया है, जब नगर निगम में मेयर की कुर्सी के लिए जोड़-तोड़ तेज हो गई है.

कल्याण-डोंबिवली नगर निगम में किसी भी पार्टी के पास फिलहाल स्पष्ट बहुमत नहीं है. 62 सीटों का जादुई आंकड़ा हासिल करने के लिए सभी दल जोड़-घटाव में जुटे हैं. मौजूदा स्थिति की बात करें तो शिंदे गुट की शिवसेना के पास 53 सीटें हैं, जबकि बीजेपी के पास 50 सीटें हैं.

ऐसे में उद्धव ठाकरे गुट के 11 नगरसेवक और मनसे के 5 नगरसेवक किंगमेकर की भूमिका में आ गए हैं. सूत्रों का दावा है कि बहुमत के आंकड़े तक पहुंचने के लिए अंदरखाने जबरदस्त हॉर्स ट्रेडिंग चल रही है. ठाकरे गुट के तीन नगरसेवकों का शिंदे खेमे में जाना सत्ता संतुलन को पूरी तरह शिंदे सेना के पक्ष में झुका सकता है.

फिलहाल महायुति में बातचीत का दौर जारी है, लेकिन इस कथित टूट से साफ है कि मेयर की कुर्सी की लड़ाई ने स्थानीय राजनीति को पूरी तरह गरमा दिया है. आने वाले दिनों में और भी सियासी चालें चलने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता.

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क्यों अहम है कल्याण-डोंबिवली की मेयर रेस?

कल्याण-डोंबिवली नगर निगम महाराष्ट्र की अहम शहरी निकायों में से एक है जहां किसी भी पार्टी को फिलहाल स्पष्ट बहुमत हासिल नहीं है. 62 सीटों के जादुई आंकड़े तक पहुंचने के लिए सभी दलों को सहयोगियों और निर्दलीयों पर निर्भर रहना पड़ रहा है.

वर्तमान में शिंदे गुट की शिवसेना और बीजेपी मिलकर बहुमत के करीब जरूर हैं, लेकिन कुछ सीटों की कमी के चलते ठाकरे गुट और मनसे के नगरसेवक किंगमेकर की भूमिका में आ गए थे. इसी सियासी दबाव के बीच नगरसेवकों की टूट की खबरें सामने आ रही हैं.

सूत्रों के मुताबिक मेयर पद सिर्फ एक प्रशासनिक जिम्मेदारी नहीं बल्कि आने वाले समय में शहरी राजनीति में पकड़ मजबूत करने का जरिया भी है. यही वजह है कि सभी दल पूरी ताकत झोंक रहे हैं और जोड़-तोड़ की राजनीति तेज होती जा रही है.

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