सुप्रीम कोर्ट ने 2015 के चर्चित शीना बोरा हत्याकांड में ट्रायल को लेकर स्पेशल सीबीआई कोर्ट को सख्त हिदायत दी है. कोर्ट ने 9 महीने में ट्रायल पूरा करने के लिए कहा है और साफ कर दिया है कि इसके बाद कोई एक्सटेंशन नहीं दिया जाएगा. इस मामले में इंद्राणी मुखर्जी, उनके पूर्व पति पीटर मुखर्जी समेत कई आरोपी ट्रायल का सामना कर रहे हैं.
सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और एन. कोटिस्वर सिंह की पीठ ने कहा कि स्पेशल सीबीआई कोर्ट द्वारा की गई मांग को ध्यान में रखते हुए ट्रायल पूरा करने की समयसीमा 9 महीने के लिए बढ़ाई जाती है. हालांकि, कोर्ट ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि यह अंतिम मौका है और भविष्य में समयसीमा बढ़ाने की कोई भी मांग स्वीकार नहीं की जाएगी.
बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने पहले भी इस मामले में तेजी लाने के निर्देश दिए थे. पिछले साल कोर्ट ने इंद्राणी मुखर्जी की विदेश यात्रा की अनुमति वाली याचिका खारिज कर दी थी और कहा था कि वह वापस लौटेंगी इसकी कोई गारंटी नहीं है. साथ ही, कोर्ट ने ट्रायल को एक वर्ष के भीतर समाप्त करने का निर्देश दिया था. इसके बावजूद, मामले की सुनवाई अब भी जारी है.
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सीबीआई कोर्ट ने जांच अधिकारियों ने क्रॉस एग्जामिनेशन की प्रक्रिया अब तक पूरी नहीं की है. इसके बाद गवाहों के बयानों के आधार पर प्रॉसिक्यूशन और डिफेंस की अंतिम दलीलें सुनी जानी हैं, जिसमें अभी और समय लग सकता है. हालांकि कोर्ट में मामले की रोजाना सुनवाई हो रही है, फिर भी प्रक्रिया लंबी होने की संभावना बनी हुई है. इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए मुंबई की स्पेशल सीबीआई कोर्ट के जज ने 5 फरवरी, 2026 को सुप्रीम कोर्ट को पत्र लिखकर ट्रायल की समयसीमा बढ़ाने का अनुरोध किया था.
इस पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सीमित अवधि के लिए राहत दी, लेकिन साथ ही कड़ा संदेश भी दिया कि अब देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी. सीबीआई के अनुसार, यह मामला 24 अप्रैल 2012 का है, जब शीना बोरा की हत्या कथित तौर पर उनकी मां इंद्राणी मुखर्जी, उनके पूर्व पति संजीव खन्ना और ड्राइवर श्यामवर राय ने मिलकर की थी. आरोप है कि हत्या के बाद शव को बैग में डालकर रायगढ़ जिले के पेन इलाके में ले जाकर जला दिया गया.
यह मामला 2015 में तब सामने आया, जब श्यामवर राय को अवैध हथियार रखने के मामले में मुंबई के खार पुलिस स्टेशन ने गिरफ्तार किया. पूछताछ के दौरान इस हत्याकांड का खुलासा हुआ. शुरुआती जांच मुंबई पुलिस ने की, जिसे बाद में सीबीआई को सौंप दिया गया. अब सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद उम्मीद की जा रही है कि लंबे समय से लंबित इस हाई-प्रोफाइल केस का ट्रायल तय समयसीमा के भीतर पूरा हो सकेगा.