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क्या शीतल तेजवानी को मिलेगी रिहाई? पुणे लैंड स्कैम केस में सुनवाई पूरी

बॉम्बे हाई कोर्ट ने पुणे भूमि घोटाले में गिरफ्तार कारोबारी शीतल तेजवानी की उस याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया है, जिसमें उन्होंने तीन अलग-अलग मामलों में गिरफ्तारी को अवैध बताते हुए रिहाई की मांग की है. मामला 44 एकड़ सरकारी जमीन की कथित बिक्री से जुड़ा है, जिसमें पार्थ पवार की हिस्सेदारी वाली कंपनी का नाम सामने आया था, हालांकि उनका नाम एफआईआर में नहीं है.

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अदालत ने तीन याचिकाओं पर सुनवाई के बाद आदेश सुरक्षित रखा है. (File Photo: PTI)
अदालत ने तीन याचिकाओं पर सुनवाई के बाद आदेश सुरक्षित रखा है. (File Photo: PTI)

बॉम्बे हाई कोर्ट ने सोमवार को पुणे भूमि घोटाले में गिरफ्तार कारोबारी शीतल तेजवानी की याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया. तेजवानी उस मामले में जेल में हैं जिसमें उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार के बेटे पार्थ पवार का नाम सामने आया था. जस्टिस एन जे जमादार की पीठ ने तेजवानी की तीन याचिकाओं पर सुनवाई के बाद आदेश सुरक्षित रखा. 

तेजवानी ने अदालत से कहा कि तीनों मामलों में उन्हें गिरफ्तारी के आधार नहीं बताए गए, इसलिए उनकी गिरफ्तारी अवैध घोषित कर उन्हें रिहा किया जाए. तेजवानी को तीन अलग-अलग मामलों में गिरफ्तार किया गया. पहला मामला 7 नवंबर 2025 को खड़क पुलिस स्टेशन में दर्ज हुआ था. यह एफआईआर 44 एकड़ सरकारी जमीन, जिसकी कीमत करीब 1,800 करोड़ रुपये बताई गई, की कथित अवैध बिक्री को लेकर हुए विरोध प्रदर्शन के बाद दर्ज की गई. 

एफआईआर में नहीं था पार्थ पवार का नाम

आरोप है कि यह जमीन Amadea Enterprise LLP नामक कंपनी को बेची गई, जिसमें पार्थ पवार की बहुमत हिस्सेदारी है. हालांकि पार्थ पवार का नाम एफआईआर में नहीं था, लेकिन उनके साझेदार दिग्विजय पाटिल, तहसीलदार सूर्यकांत येवले, तेजवानी और अन्य लोगों को आरोपी बनाया गया. इसके बाद बावधन पुलिस स्टेशन में स्टांप ड्यूटी चोरी का अलग मामला दर्ज हुआ, जिसमें तेजवानी को फिर गिरफ्तार किया गया. 

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'गिरफ्तारी के आधार कभी बताए नहीं गए'

आगे चलकर सीआईडी ने 3 जनवरी 2026 को यरवडा जेल से तेजवानी को सेवा विकास कोऑपरेटिव बैंक ऋण घोटाले के मामले में हिरासत में लिया. तेजवानी की ओर से पेश वकील अजय भिसे ने अदालत में दलील दी कि तीनों मामलों में गिरफ्तारी के आधार उन्हें कभी नहीं बताए गए. वहीं राज्य की ओर से लोक अभियोजक मंखुनवार देशमुख ने कहा कि तेजवानी को पता था कि जमीन सरकारी है, इसके बावजूद उन्होंने महार वतनदारों से पावर ऑफ अटॉर्नी बनवाकर जमीन की बिक्री की प्रक्रिया आगे बढ़ाई.

'तेजवानी कई साल से महाराष्ट्र में हैं और मराठी समझती हैं'

देशमुख ने कहा कि जांच अधिकारी ने सभी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया और नोटिस दिए जाने के बावजूद तेजवानी सहयोग नहीं कर रही थीं. उन्होंने यह भी कहा कि गिरफ्तारी के कारण उन्हें विस्तार से बताए गए थे. देशमुख ने बचाव पक्ष की उस दलील का भी विरोध किया जिसमें कहा गया था कि तेजवानी को मराठी में गिरफ्तारी के आधार बताए गए, जिसे वह समझती नहीं हैं.

देशमुख ने अदालत को बताया कि तेजवानी कई वर्षों से महाराष्ट्र में रह रही हैं, उनके खिलाफ करीब नौ मामले दर्ज हैं और उन सभी में दस्तावेज मराठी में हैं. उन्होंने कहा कि अधिकारी ने शपथपत्र में बताया है कि तेजवानी को हिंदी में भी विस्तार से जानकारी दी गई थी. बावधन मामले में भी यही स्थिति बताई गई. अदालत ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया.

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