TCS नासिक धर्मांतरण केस की फरार आरोपी निदा खान अभी भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर है. नासिक कोर्ट में उसकी अग्रिम जमानत पर बहस हुई. सुनवाई के दौरान सरकारी पक्ष की ओर से पब्लिक प्रॉसीक्यूटर अजय मिश्रा और SIT टीम कोर्ट में मौजूद रहे. सरकारी वकील अजय मिश्रा ने कहा कि, केस में कथित रूप से धर्मांतरण से जुड़ी गतिविधियों और फंडिंग के एंगल की जांच भी की जा रही है.
नौकरी या प्रमोशन के बहाने भी धर्मांतरण का दावा
खबर यह भी है कि इस केस के जांच के दौरान पुलिस को कुछ किताबें और सामग्री मिली है. जिन्हें पंचनामा के तहत कोर्ट में प्रस्तुत किया जाएगा. पीड़ित के बयान, मोबाइल मैसेज, और डिजिटल सबूत अदालत के समक्ष रखे गए हैं. खास बात है कि मामले में मालेगांव और कथित रूप से मलेशिया लिंक की भी जांच की जा रही है. जिसमें नौकरी या प्रमोशन के बहाने आगे की साजिश का शक है.
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने मामले में आदेश सुरक्षित रख लिया है. अब निदा खान की अग्रिम जमानत को लेकर 2 मई को अगली सुनवाई होगी. आपको बता दें कि नासिक TCS मामले में जो खुलासे हुए हैं. उसके संकेत आजतक ने पहले ही दे दिए थे.
पीड़ित का नाम रख दिया था हानिया
नासिक कोर्ट में सरकारी वकील ने कोर्ट को बताया कि, आरोपी निदा खान के मालेगांव से संबंध हैं और आरोपियों के मलेशिया से भी संबंध हैं. वो पीड़ित को मलेशिया ले जाने की साजिश रच रहे थे. उन्होंने पीड़ित का नाम 'हानिया' रख दिया था. मालेगांव के कुछ लोगों से संपर्क किया गया था, जिनकी मदद से पीड़ित का धर्म परिवर्तन करवाया जाना था.
निदा खान पर आरोप है कि उसने टीसीएस बीपीओ केस की पीड़ित महिला को इस्लामिक धार्मिक प्रथाओं जैसे बुर्का पहनने और नमाज पढ़ने के संबंध में मार्गदर्शन और ट्रेनिंग दी थी. आरोपी निदा खान ने पीड़ित के फ़ोन पर इस्लामिक रील्स और YouTube लिंक्स डाउनलोड किए थे.