नासिक के बहुचर्चित टीसीएस केस में शनिवार को नासिक रोड न्यायालय ने बड़ा फैसला सुनाते हुए आरोपी निदा खान की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी. इस निर्णय को मामले की जांच के लिए अहम माना जा रहा है. अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद पहले आदेश सुरक्षित रखा था, जिस पर आज फैसला सुनाया गया.
इस मामले में सरकारी पक्ष की ओर से विशेष लोक अभियोजक अजय मिसर न्यायालय में उपस्थित रहे. वहीं आरोपी पक्ष की ओर से अधिवक्ता राहुल कासलीवाल ने अपनी दलीलें पेश कीं. 29 अप्रैल को इस याचिका पर बंद कक्ष में सुनवाई हुई थी. उस दौरान विशेष जांच दल की ओर से सहायक पुलिस आयुक्त संदीप मिटके ने जांच अधिकारी के रूप में न्यायालय के समक्ष अपना पक्ष रखा और जमानत का विरोध किया.
इससे पहले 18 अप्रैल को भी आरोपी की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई हुई थी, जिसमें बचाव पक्ष ने अपना पक्ष विस्तार से रखा था. इसके बाद जांच एजेंसियों द्वारा प्रस्तुत तथ्यों और दस्तावेजों पर न्यायालय ने गंभीरता से विचार किया.
हिजाब पहनना सिखाया गया
सरकारी पक्ष का दावा है कि आरोपी ने पीड़िता को धार्मिक तौर-तरीके अपनाने के लिए प्रभावित किया. आरोप है कि उसे हिजाब पहनना सिखाया गया, धार्मिक मान्यताओं से जुड़े नियम उसके फोन में डाले गए और विभिन्न धार्मिक सामग्री भेजे गए. इस मामले में मलेशिया से जुड़े संभावित संपर्कों की भी जांच की जा रही है.
पीड़िता का नाम बदल दिया गया था
पीड़िता के अधिवक्ता ने न्यायालय में कहा कि पीड़िता का नाम तक बदल दिया गया था और उसके जरूरी दस्तावेज आरोपी दानिश के पास थे. यह भी आरोप लगाया गया कि नौकरी और पदोन्नति के बहाने आगे की साजिश रची जा रही थी.
सरकारी वकील अजय मिसर ने अदालत को बताया कि पीड़िता पिछड़ा वर्ग से संबंधित है और उसे कथित रूप से प्रभावित करने की कोशिश की गई. उन्होंने यह भी कहा कि जांच के दौरान कुछ पुस्तकें और अन्य सामग्री जब्त की गई हैं, जिन्हें पंचनामा के तहत न्यायालय में प्रस्तुत किया जाएगा.
बयान में शामिल किए गए डिजिटल सबूत
जांच में पीड़िता के बयान, फोन के मैसेज, डिजिटल सबूत और परिवार के सदस्यों के बयान भी शामिल किए गए हैं. सरकारी पक्ष ने यह भी कहा कि आरोपी की ओर से पीड़िता को प्रभावित करने, डराने-धमकाने से जुड़े पहलुओं की भी जांच जारी है.
अदालत के इस फैसले के बाद अब जांच एजेंसियों को मामले में आगे की कार्रवाई के लिए मजबूती मिली है. अग्रिम जमानत याचिका खारिज होने से आरोपी पक्ष को बड़ा झटका लगा है, जबकि जांच दल इसे अपने पक्ष में महत्वपूर्ण प्रगति मान रहा है.