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Maharashtra Political Crisis: न चेतावनी काम आ रही, न संगठन में घेराव... शिवसेना के बागियों के आगे बेबस उद्धव के रणनीतिकार

Maharashtra Political Crisis: महाराष्ट्र का सियासी संकट उलझता ही जा रहा है. बागियों पर न तो उद्धव ठाकरे की अपील काम कर रही है और न ही संजय राउत का वादा. चेतावनी का भी बागियों पर असर नहीं पड़ रहा है.

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एकनाथ शिंदे की बगावत ने महाराष्ट्र में सियासी संकट खड़ा कर दिया है. (फाइल फोटो) एकनाथ शिंदे की बगावत ने महाराष्ट्र में सियासी संकट खड़ा कर दिया है. (फाइल फोटो)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • गुवाहाटी के होटल में ठहरे हैं बागी विधायक
  • एकनाथ शिंदे का दावा- 50 विधायक साथ हैं
  • शिंदे की बगावत से उद्धव की कुर्सी पर संकट

Maharashtra Political Crisis: महाराष्ट्र में सियासी संकट बढ़ता ही जा रहा है. शिवसेना विधायक और मंत्री एकनाथ शिंदे ने अपने साथ 50 विधायकों के होने का दावा किया है. शिवसेना प्रमुख और मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे बागियों को मनाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन बागी मानने को तैयार नहीं हैं. बागियों को मनाने के लिए शिवसेना कांग्रेस और एनसीपी से गठबंधन तोड़ने की बात भी कह रही है. इसके अलावा बागी विधायकों की सदस्यता रद्द करने की मांग भी शिवसेना ने उठाई है. इन सबके बावजूद बागी हैं कि मान नहीं रहे हैं.

महाराष्ट्र में इस सियासी संकट की शुरुआत सोमवार रात से ही शुरू हो गई थी. सोमवार रात को अचानक एकनाथ शिंदे अपने साथ कई विधायकों को लेकर सूरत के एक होटल में पहुंच गए. बागी विधायकों के फोन बंद आते रहे. बाद में कुछ और विधायक भी इनके साथ जुड़ गए. बागी विधायक अभी असम के गुवाहाटी में स्थित रेडिसन ब्लू होटल में ठहरे हुए हैं. 

एकनाथ शिंदे का दावा है कि उनके साथ 50 विधायक हैं. इनमें 37 विधायक तो शिवसेना के ही हैं. बाकी निर्दलीय विधायक भी उनके साथ आ गए हैं, ऐसा उन्होंने दावा किया है. शिंदे से जब पूछा गया कि क्या उनकी नजर शिवसेना प्रमुख के पद पर है? तो उन्होंने इस बात को खारिज नहीं किया, बल्कि ये कहा कि मीटिंग के बाद इस पर फैसला होगा. 

शिंदे की बगावत से न सिर्फ उद्धव की सीएम कुर्सी पर तलवार लटक गई है, बल्कि ठाकरे परिवार के हाथ से शिवसेना जाती दिख रही है. 

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गुवाहाटी के होटल में बागी विधायकों के साथ चर्चा करते एकनाथ शिंदे. (फाइल फोटो-PTI)

न चेतावनी काम आ रही, न संगठन का घेराव

शिवसेना के बागी विधायकों पर न तो कोई चेतावनी काम आ रही है और न ही संगठन का घेराव असर दिखा पा रहा है. शिवसेना ने गुरुवार को मीटिंग बुलाई थी. इस मीटिंग में शामिल नहीं होने वाले 16 विधायकों की सदस्यता रद्द करने की मांग अब शिवसेना ने कर दी है. शिवसेना ने इसके लिए महाराष्ट्र विधानसभा के डिप्टी स्पीकर नरहरि जिरवाल को चिट्ठी लिखी है. शिवसेना ने जिन विधायकों की सदस्या रद्द करने की मांग की है, उन्में एकनाथ शिंदे का नाम भी है. 

हालांकि, एकनाथ शिंदे का कहना है कि उन्हें इन सबसे डर नहीं लगता. एकनाथ शिंदे ने गुरुवार को कहा कि वो 'असली शिवसेना' हैं. उन्होंने ये भी कहा कि सदस्या रद्द करने की धमकी से वो और उनके समर्थक विधायक डरने वाले नहीं हैं. 

शिंदे ने ट्वीट कर कहा, 'संविधान की 10वीं अनुसूची के तहत पार्टी व्हीप सदन की कार्यवाही के लिए जारी होता है, न कि पार्टी की मीटिंग के लिए.' शिंदे ने लिखा कि, 'इस बारे में सुप्रीम कोर्ट के कई सारे फैसले हैं. आप किसे डराने की कोशिश कर रहे हैं. आप हमारे विधायकों के खिलाफ एक्शन नहीं ले सकते, क्योंकि हम बालासाहेब ठाकरे के सच्चे वफादार हैं और हम असली शिवसेना और शिव सैनिक हैं. असल में, हम आपके खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हैं, क्योंकि नंबर नहीं होने के बाद भी आप सरकार चला रहे हैं.'

दरअसल, शिवसेना ने गुरुवार को 12 विधायकों की सदस्यता रद्द करने की मांग की थी. इसके बाद शुक्रवार सुबह चार और विधायकों की सदस्यता रद्द करने की मांग की है. इस तरह कुल 16 विधायकों को अयोग्य ठहराने की मांग डिप्टी स्पीकर से की गई है. 

इन चेतावनियों के अलावा बागियों के खिलाफ अब संगठन में भी विरोध शुरू हो गया है. उद्धव ठाकरे के समर्थक शिंदे के खिलाफ नारेबाजी कर रहे हैं. इसके अलावा बागी विधायकों के पोस्टर पर कालिख भी पोती जा रही है. लेकिन, इस सबके बावजूद बागी विधायक झुकने को तैयार नहीं.

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शिवसेना के रणनीतिकार बेबस!

बागियों के आगे शिवसेना के रणनीतिकार बेबस हो चुके हैं. उनकी कोई अपील, कोई चेतावनी काम नहीं आ रही है. बुधवार को शिवसेना प्रमुख और मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने सोशल मीडिया के जरिए महाराष्ट्र की जनता को संबोधित करते हुए. उन्होंने अपील करते हुए कहा कि अगर एक भी विधायक आकर कहता है तो वो मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने को तैयार हैं. 

इतना ही नहीं, उद्धव ठाकरे ने इमोशनल कार्ड खेलते हुए ये भी कहा कि वो मुख्यमंत्री की कुर्सी पर किसी शिव सैनिक को देखना चाहते हैं. उसी रात ठाकरे मुख्यमंत्री आवास भी छोड़कर मातोश्री भी चले गए थे. इसे भी एक तरह से इमोशनल कार्ड के तौर पर ही देखा गया. 

उद्धव ठाकरे के अलावा शिवसेना से राज्यसभा सांसद संजय राउत भी बागियों को मनाने में जुटे हुए हैं, लेकिन अभी तक कोई कामयाबी हाथ नहीं लगी है. संजय राउत ने तो यहां तक कह दिया कि अगर बागी विधायक मुंबई आकर बात करते हैं, तो शिवसेना महाविकास अघाड़ी गठबंधन को छोड़ने पर विचार कर सकती है. 

हालांकि, चाहे उद्धव ठाकरे की अपील हो या संजय राउत का गठबंधन तोड़ने का वादा, एकनाथ शिंदे और बागी विधायक मानने को राजी नहीं हैं. शिवसेना बार-बार बागी विधायकों को मुंबई आकर बात करने की बात कह रही है, लेकिन बागी विधायक आ नहीं रहे हैं. इसकी एक वजह ये भी हो सकती है कि अगर बागी मुंबई आते हैं, तो उनके टूटने का खतरा भी है.

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गुवाहाटी के होटल में एकनाथ शिंदे और बागी विधायक. (फाइल फोटो-PTI)

तो क्या गिर जाएगी सरकार और टूट जाएगी शिवसेना?

एकनाथ शिंदे की बगावत ने उद्धव सरकार के भविष्य पर तलवार तो लटका दी है. शिंदे की बातों से लग रहा है कि वो अब अपना मन बदलने के मूड में नहीं हैं. शिंदे ने अपने साथ 50 विधायकों के होने का दावा किया है. अगर ये सही है तो इसका मतलब है कि उद्धव सरकार अल्पमत में आ चुकी है. हालांकि, ये सदन में तय होगा. 

संजय राउत भी इस बात को मान चुके हैं कि बगावत से विधानसभा में सरकार का नंबर गेम बिगड़ गया है. राउत ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि बागियों का दावा है कि उनके पास जरूरी नंबर है और लोकतंत्र नंबर पर चलता है, लेकिन ये संख्या कभी भी बदल सकती है. जब बागी वापस आएंगे तो बालासाहेब ठाकरे और शिवसेना के प्रति उनकी वफादारी का टेस्ट होगा.

हालांकि, राउत ने ये भी कहा कि महा विकास अघाड़ी एकजुट है और पूरा विश्वास है कि फ्लोर टेस्ट में बागी विधायक गठबंधन का समर्थन करेंगे.

इस सियासी संकट के बीच गुरुवार रात को शिंदे का एक वीडियो भी सामने आया था. इस वीडियो में शिंदे कह रहे हैं कि एक राष्ट्रीय पार्टी उनकी हर मदद करने के लिए तैयार है. शिंदे इस वीडियो में कह रहे हैं कि हमारा सुख-दुख एक ही है. हम एक हैं और जीत हमारी होगी. एक राष्ट्रीय पार्टी है, वो महाशक्ति है, उसने भरोसा दिया है कि वो हमारी हर मदद करने को तैयार है.

इस वीडियो में शिंदे ने किसी पार्टी का नाम नहीं लिया, लेकिन इसे बीजेपी से ही जोड़कर देखा जा रहा है. माना जा रहा है कि शिंदे बीजेपी के साथ जा सकते हैं. ऐसा हुआ तो महाराष्ट्र में उद्धव सरकार का गिरना लगभग तय है. इसके अलावा शिंदे साफ कर चुके हैं कि मीटिंग के बाद शिवसेना के प्रमुख के पद को लेकर फैसला होगा. शिंदे का ये भी कहना है कि वो आगे चलकर पार्टी सिम्बल पर भी फैसला लेंगे. यानी, हो सकता है कि शिंदे आगे चलकर शिवसेना को कब्जा लें.

 

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