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महाराष्ट्र में रेस्क्यू के दौरान तेंदुए से मारपीट का आरोप, शिवसेना विधायक चंद्रकांत पाटिल पर कार्रवाई की मांग

महाराष्ट्र के जलगांव में तेंदुए के रेस्क्यू के दौरान कथित मारपीट का वीडियो सामने आया है. इसमें शिवसेना विधायक चंद्रकांत पाटिल पर आरोप लगे हैं. पशु अधिकार संगठनों ने कार्रवाई की मांग की है और इसे वन्यजीव संरक्षण कानून का उल्लंघन बताया है. मामले की जांच और एफआईआर की मांग की गई है.

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शिवसेना विधायक चंद्रकांत पाटिल पर कार्रवाई की मांग तेज (Photo: Screengrab)
शिवसेना विधायक चंद्रकांत पाटिल पर कार्रवाई की मांग तेज (Photo: Screengrab)

महाराष्ट्र के जलगांव जिले में एक तेंदुए के रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान कथित रूप से मारपीट का मामला सामने आया है, जिसके बाद राजनीतिक और पशु अधिकार संगठनों के बीच विवाद खड़ा हो गया है. एक वायरल वीडियो में शिवसेना विधायक चंद्रकांत पाटिल और कुछ अन्य लोगों को तेंदुए पर डंडों से हमला करते हुए दिखाया गया है.

इस घटना के बाद पशु अधिकार संगठनों ने कड़ी आपत्ति जताई है और विधायक के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है. पीपल फॉर द एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ एनिमल्स इंडिया, कम्पैशन अनलिमिटेड प्लस एक्शन, वाइल्डलाइफ रेस्क्यू एंड रिहैबिलिटेशन सेंटर और फेडरेशन ऑफ इंडियन एनिमल प्रोटेक्शन ऑर्गेनाइजेशंस ने महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को पत्र लिखकर इस मामले में कार्रवाई की मांग की है.

संगठनों ने कहा है कि इस मामले में तुरंत प्रारंभिक अपराध रिपोर्ट दर्ज की जानी चाहिए. इसके साथ ही उन्होंने जलगांव के उप वन संरक्षक को भी शिकायत दी है. जानकारी के अनुसार, मक्तैनगर में एक सरकारी गेस्ट हाउस के पास एक मादा तेंदुआ देखी गई थी. 

इसके बाद वन विभाग की टीम ने उसे ट्रैंक्विलाइजर डार्ट से बेहोश किया. जब दवा का असर शुरू हुआ, तभी वहां मौजूद कुछ लोग, जिनमें विधायक चंद्रकांत पाटिल भी बताए जा रहे हैं, उन्होंने कथित रूप से तेंदुए को डंडों से पीटना शुरू कर दिया. बाद में वन विभाग की टीम ने स्थिति को संभालते हुए तेंदुए को सुरक्षित कब्जे में लिया.

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पशु अधिकार संगठनों का कहना है कि एक घायल या बेहोश जंगली जानवर किसी तरह का खतरा नहीं होता, ऐसे में उसके साथ इस तरह का व्यवहार गलत है. संगठनों ने इसे गंभीर मामला बताते हुए कहा कि अगर कोई जनप्रतिनिधि भी ऐसे कृत्य में शामिल होता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए.

संगठनों ने यह भी कहा कि यह घटना वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 का उल्लंघन है और इस मामले में समयबद्ध जांच होनी चाहिए. फिलहाल इस पूरे मामले पर विधायक चंद्रकांत पाटिल की ओर से कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है. वहीं वन विभाग और प्रशासन इस वायरल वीडियो की जांच में जुटे हुए हैं.


 

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