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कोरोना काल में लंगर ऑन व्हील्स, ये शख्स सैकड़ों को बांटता है दाल खिचड़ी, गुरु नानक देव जी से ली प्रेरणा

कपूर इस लंगर के तहत जगह-जगह जाकर हर दिन सैकड़ों लोगों को दाल खिचड़ी बांटते हैं. कपूर ने नागपुर में ये सेवा 2013 में शुरू की थी. पहले सिर्फ गरीब और वंचित लोग ही उनसे खाना लेते थे. लेकिन कोरोना लॉकडाउन में रेस्तरां-होटल बंद होने की वजह अब सभी वर्गों के लोगों को इस मोबाइल लंगर से दाल-खिचड़ी लेते देखा जा सकता है.

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नागपुर में लंगर ऑन व्हील्स
नागपुर में लंगर ऑन व्हील्स
स्टोरी हाइलाइट्स
  • कोरोना काल में लंगर ऑन व्हील्स
  • सैकड़ों को बांटा जाता है दाल खिचड़ी
  • गुरु नानक देव जी से हैं प्रेरित

मानव सेवा परमो धर्म...इसी की पहचान हैं नागपुर के एक सिख शख्स. 41 साल के जमशेद सिंह कपूर को नागपुर की सड़कों पर टू व्हीलर पर हर दिन जरूरतमंदों को खाना बांटते देखा जा सकता है. कपूर ये मोबाइल लंगर सेवा पिछले कई साल से चला रहे हैं. कोरोना महामारी के दौरान भी ये मिशन जारी है. 

कोरोना काल में लंगर ऑन व्हील्स

कपूर इस लंगर के तहत जगह-जगह जाकर हर दिन सैकड़ों लोगों को दाल खिचड़ी बांटते हैं. कपूर ने नागपुर में ये सेवा 2013 में शुरू की थी. पहले सिर्फ गरीब और वंचित लोग ही उनसे खाना लेते थे. लेकिन कोरोना लॉकडाउन में रेस्तरां-होटल बंद होने की वजह अब सभी वर्गों के लोगों को इस मोबाइल लंगर से दाल-खिचड़ी लेते देखा जा सकता है. कपूर कहते हैं कि कुछ लोग कच्चे चावल और दाल से उनकी मदद करते हैं जिससे की उनका मिशन चलता रहे.   

जरूरतमंदों की मदद सच्ची सेवा

कपूर ने आज तक को बताया कि वो इस काम को सेवा मानते हैं. उन्होंने कहा, “सिख धर्म में जरूरतमंदों की मदद को ही सच्ची सेवा कहा जाता है. कोरोना महामारी के दौरान लोग दूर दूर से नागपुर में इलाज के लिए आ रहे हैं. ऐसे में उनके साथ जो तीमारदार आते हैं, उन्हें खाना मिलने में दिक्कत होती है क्योंकि होटल और खाने के स्टाल सब बंद हैं. ऐसे में उनके लिए जो मुझसे बन पड़ रहा है, वो कर रहा हूं.” पेशे से ज्योतिषी कपूर चाहते हैं कि भविष्य में उनकी लंगर ऑन व्हील्स सेवा हफ्ते के सातों दिन और 24 घंटे चले.   

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गुरु नानक देव जी से है प्रेरित

कपूर ने बताया कि सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानक देव जी 1512 में नागपुर आए थे और यहां स्थानीय आदिवासियों को उन्होंने लंगर सेवा उपलब्ध कराई थी. कपूर के मुताबिक उनसे खाना लेने वाले एक भिखारी ने कपड़ों से भरा एक थैला सौंपा था और कहा था कि उसकी मौत के बाद ये थैला खोलें और इसमें जो कपड़े हैं वो जरूरतमंदों को बांट दिए जाएं. भिखारी की मौत के बाद कपूर ने वो थैला खोला तो हैरान रह गए, थैले में कपड़ों के साथ 25,000 रुपए भी थे. अब उसी राह पर चल दिए हैं जमशेद सिंह कपूर जिन्हें लगता है कि लोगों की सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है और किसी का पेट भरना सबसे बड़ा पुण्य. इस कोरोना काल में उनके जैसे कई दूसरे लोग भी मौजूद हैं जो इस मुश्किल समय को आसान बनाने की पूरी कोशिश कर रहे हैं और सही मायनों में समाज के प्रति अपना योगदान दे रहे हैं.

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