8 फरवरी की दोपहर को दिल्ली पुलिस के कंट्रोल रूम में आई एक कॉल ने हड़कंप मचा दिया. कॉल करने वाले ने दावा किया कि दिल्ली के चांदनी चौक को उड़ाने की साजिश पुणे के एक होटल में रची गई है. पुलिस ने जब जांच की, तो पता चला कि यह किसी आतंकी संगठन का काम नहीं, बल्कि नौकरी से निकाले गए एक वेटर की खतरनाक खुन्नस थी.
फोन करने वाले ने आरोप लगाया कि साजिश पुणे के बुधवार पेठ स्थित एक होटल में रची गई थी और होटल मालिक को हमले के लिए 20 करोड़ रुपये दिए गए थे. उसने आगे दावा किया कि मालिक के घर पर अभी भी RDX का एक डिब्बा रखा हुआ है.
धमकी को गंभीरता से लेते हुए दिल्ली पुलिस ने तुरंत नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी को अलर्ट किया और राजधानी में सुरक्षा बढ़ा दी. साइबर टीमों ने कुछ ही घंटों में पुणे के एक घर से कॉल का पता लगा लिया. पुलिस ने तुरंत छापा मारा और संदिग्ध को पूछताछ के लिए हिरासत में ले लिया. कई घंटों की पूछताछ के बाद जांचकर्ताओं को एक चौंकाने वाला सच पता चला.
दरअसल, कॉल करने वाले की पहचान एक वेटर के तौर पर हुई, जो COVID-19 के समय बुधवार पेठ स्थित होटल में काम करता था. खबर है कि उसे अजीब बर्ताव की वजह से नौकरी से निकाल दिया गया था. होटल मालिक से रंजिश रखते हुए उसने कथित तौर पर उसे फंसाने और परेशानी खड़ी करने के लिए बम की झूठी धमकी दी.
आगे की जांच में पता चला कि आरोपी मानसिक रूप से ठीक नहीं था और उसने पहले भी पुलिस को गुमराह करने वाले कॉल किए थे. अधिकारियों ने बाद में कन्फर्म किया कि बम की साजिश पूरी तरह से मनगढ़ंत थी. कानूनी फॉर्मैलिटी पूरी करने के बाद पुलिस ने उस व्यक्ति को उसके परिवार वालों को सौंप दिया गया.